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सेल्फी लेते समय बच्ची की मौत, रेलवे ने मांगा हर्जाना

Sat, 24 Oct 2015 04:58 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 24 Oct 2015 04:58 PM IST
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Grief-stricken mum of girl killed by train while taking selfies BILLED for damage

जिगर के टुकड़े को ट्रेन हादसे में गंवा चुकी एक दुखियारी मां की आंखों से गम की नमी अभी सूखी भी नहीं थी कि रेलवे ने उसे लाखों के हर्जाने का बिल थमा दिया।

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मामला बेल्जियम का है। कारला नंज नाम की महिला से स्थानीय बेल्जियम रेल ऑपरेटर एसएनसीबी ने 14 हजार पाउंड यानी करीब 13 लाख 94 हजार रुपए का हर्जाना एक खत लिखकर मांगा है।
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मिरर पर प्रकाशित खबर के मुताबिक बीते साल नवंबर में कारला की 12 वर्षीय बेटी चारलोट की उस वक्त ट्रेन की चपेट में आकर मौत हो गई थी जब वो प्लेटफॉर्म पर सेल्फी ले रही थी।
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"ऐसा हादसा क्या रेलवे के लोग बर्दाश्त कर लेते?"

Grief-stricken mum of girl killed by train while taking selfies BILLED for damage

रेलवे की मानें तो हादसे के दौरान रेल ट्रैक को पहुंची क्षति के लिए कारला नंज से हर्जाना मांगा गया है। हालांकि रेलवे ये गंभीरता से विचार करती रही है कि इस क्षतिपूर्ति के लिए सही समय का इंतजार किया जाए और फिर कारला के घर का दरवाजा खट-खटाया जाए।

उधर दुखियारी मां की मानें तो इस हर्जाने को हलांकि बीमा कंपनी भरेगी लेकिन ऐसे समय हर्जाने के खत का आना उस ट्रेन हादसे से कम नहीं है।

कारला नंज ने दुख जताते हुए कहा कि ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, शायद ऐसे हादसे को ये लोग बर्दाश्त भी नहीं कर पाते।

मामले को लेकर गरमाई सियासत

Grief-stricken mum of girl killed by train while taking selfies BILLED for damage

उधर जब एसएनसीबी के चीफ एक्जिक्यूटिव से इस हर्जाने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने ये कहते हुए मामले से पल्ला झाड़ लिया कि हम अच्छी नीयत के साथ उनके पास हर्जाना मांगने गए थे।

इलाके में हर्जाने के इस मामले ने इस कदर तूल पकड़ लिया है कि इस पर सियासत भी गर्मा गई है। सोशलिस्ट सांसद डेविट गियर्ट्स के मुताबिक हर्जाने के लिए खत को भेजने से पहले उसके भावनात्मक पहलू को कैसे नजर अंदाज किया जा सकता है, जहां एक मां ने अपनी नाबालिग बच्ची को हादसे में गंवा दिया है।

गियर्ट्स के मुताबिक भले दुखी मां को खुद इस हर्जाने को न देना पड़े फिर भी रेलवे को हर्जाने के खत की बजाय उन्हें सांत्वना देना चाहिए था।

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