सेल्फी लेते समय बच्ची की मौत, रेलवे ने मांगा हर्जाना
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जिगर के टुकड़े को ट्रेन हादसे में गंवा चुकी एक दुखियारी मां की आंखों से गम की नमी अभी सूखी भी नहीं थी कि रेलवे ने उसे लाखों के हर्जाने का बिल थमा दिया।
मामला बेल्जियम का है। कारला नंज नाम की महिला से स्थानीय बेल्जियम रेल ऑपरेटर एसएनसीबी ने 14 हजार पाउंड यानी करीब 13 लाख 94 हजार रुपए का हर्जाना एक खत लिखकर मांगा है।
मिरर पर प्रकाशित खबर के मुताबिक बीते साल नवंबर में कारला की 12 वर्षीय बेटी चारलोट की उस वक्त ट्रेन की चपेट में आकर मौत हो गई थी जब वो प्लेटफॉर्म पर सेल्फी ले रही थी।
"ऐसा हादसा क्या रेलवे के लोग बर्दाश्त कर लेते?"
रेलवे की मानें तो हादसे के दौरान रेल ट्रैक को पहुंची क्षति के लिए कारला नंज से हर्जाना मांगा गया है। हालांकि रेलवे ये गंभीरता से विचार करती रही है कि इस क्षतिपूर्ति के लिए सही समय का इंतजार किया जाए और फिर कारला के घर का दरवाजा खट-खटाया जाए।
उधर दुखियारी मां की मानें तो इस हर्जाने को हलांकि बीमा कंपनी भरेगी लेकिन ऐसे समय हर्जाने के खत का आना उस ट्रेन हादसे से कम नहीं है।
कारला नंज ने दुख जताते हुए कहा कि ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, शायद ऐसे हादसे को ये लोग बर्दाश्त भी नहीं कर पाते।
मामले को लेकर गरमाई सियासत
उधर जब एसएनसीबी के चीफ एक्जिक्यूटिव से इस हर्जाने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने ये कहते हुए मामले से पल्ला झाड़ लिया कि हम अच्छी नीयत के साथ उनके पास हर्जाना मांगने गए थे।
इलाके में हर्जाने के इस मामले ने इस कदर तूल पकड़ लिया है कि इस पर सियासत भी गर्मा गई है। सोशलिस्ट सांसद डेविट गियर्ट्स के मुताबिक हर्जाने के लिए खत को भेजने से पहले उसके भावनात्मक पहलू को कैसे नजर अंदाज किया जा सकता है, जहां एक मां ने अपनी नाबालिग बच्ची को हादसे में गंवा दिया है।
गियर्ट्स के मुताबिक भले दुखी मां को खुद इस हर्जाने को न देना पड़े फिर भी रेलवे को हर्जाने के खत की बजाय उन्हें सांत्वना देना चाहिए था।