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पेटू होना कहीं आपकी मजबूरी तो नहीं
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 06 May 2013 04:45 PM IST
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ज्यादा खाने की लत वैश्विक स्तर पर मोटापा बढ़ा रही है। इस बारे में वैज्ञानिकों के बीच काफी मतभेद है। कुछ लोगों का मानना है कि खाने की लत जैसी कोई चीज़ होती ही नहीं है।
यह गुत्थी सुलझाने के लिए शोध हो रहे हैं कि क्या ज्यादा खाने की लत जैसी कोई चीज़ होती भी है या नहीं और अगर होती है तो इसका उपचार क्या है?
शराब, सिगरेट और कैफीन का सेवन करने वाले बताते हैं कि किसी लत पर काबू पाना आसान नहीं होता है।
किसी तरह की लत से छुटकारा पाने का एक जांचा-परखा तरीका है कि नशे वाली वस्तु के सेवन से बचना। जैसे शराब पीने वाले पब में जाने और सिगरेट पीने वाले घर में इसके इस्तेमाल से बचते हैं।
लेकिन इस तरह के उपायों को आजमाने में लोगों को काफी दिक्कत होती है और वे बार-बार विफल होते हैं।
बढ़ता मोटापा, बढ़ती चिंता
अगर आपको जिस चीज़ की लत है, वह सहजता से आपके घर में उपलब्ध है तो आप क्या करेंगे? मसलन खाने-पीने की वस्तुएं।
ऐसी स्थिति में खाने से दूर रहना संभव नहीं होता।
वैश्विक स्तर पर मोटापे की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है इसलिए वैज्ञानिक मोटापे और खाने की लत के बीच रिश्ते की पड़ताल कर रहे हैं
यूरोपीय यूनियन इस तरह के न्यूरो फास्ट नाम के प्रोजेक्ट को आर्थिक मदद दे रही है।
इसमें कोशिश हो रही है कि सारे साक्ष्यों को एकसाथ जुटाकर उनके विश्लेषण से कोई निष्कर्ष निकाला जा सके।
अभी तक केवल एक तरह के खाने का विकार शोध में सामने आया है, जिसमें बार-बार खाना एक लत का रुप ले लेता है।
जिसका साइड एफेक्ट मोटापे के रुप में सामने आता है।
नुकसान
वैज्ञानिक ज्यादा खाने और इसकी लत के बीच किसी तरह का रिश्ता होने की बात से साफ तौर पर इंकार करते हैं।
लेकिन कुछ वैज्ञानिक चॉकलेट खाने की लत के साथ जोड़कर अपनी बात को साबित करने का प्रयास करते हैं जो किसी अन्य लत के समान हमें शारीरिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुंचाती है।
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शोधकर्ता ने अपनी टीम के एक सदस्य माइकल से पूछा तो उन्होंने बताया, "मोटापे का कारण समझना काफी कठिन है। हर कोई ज्यादा खाता है और वे सोचते हैं कि बस थोड़ा सा ज्यादा खा रहे हैं। दिन में हर मिनट पर कुछ न कुछ खाते रहना बेहद अलग तरीके का अनुभव है।"
शोध करने वाली टीम की एक अन्य सदस्य लुइस ने खाने की आदतों के बारे में काफी रोचक जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि "किसी लत के शिकार लोगों के व्यवहार में काफी समानताएं होती हैं।"
मोटापे से जुड़ी रोचक बातें
लुइस के अनुसार, "एक शराबी अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग दुकानों से शराब खरीदता है। उसी तरह मैं भी चॉकलेट के लिए दुकानें बदलती हूं। घरों में शराबी शराब छिपाते हैं, उसी तरह से चॉकलेट के लती लोग चॉकलेट छिपाने की कोशिश करते हैं।"
डॉक्टर नोरा वोल्को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ड्रग एब्यूज की प्रमुख और प्रसिद्ध न्यूरोसाइंटिस्ट हैं।
उनका मानना है, "माइकल और लुइस जो बात कह रही हैं दरअसल वह एक जैविक प्रक्रिया है।"
उन्होनें शोध में पाया, "डोपामाइन नाम का एक न्यूरो ट्रांसमीटर खाने की लत को बढ़ाना देता है। यह मस्तिष्क में ड्रग की लत के समान काम करता है। जो खाने की लत के मौजूदगी की पुष्टि करता है।"
किसी चीज़ की लत छुड़ाने के दौरान कोशिश होती है कि या तो व्यक्ति पूरी तरह से लत छुटकारा पा जाए या फिर उससे होने वाला नुकसान कम हो जाए।
शोधकर्ता यह भी कहते हैं कि खाने से परहेज़ मुश्किल है, लेकिन ज्यादा खाने से बचना संभव है।
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यह गुत्थी सुलझाने के लिए शोध हो रहे हैं कि क्या ज्यादा खाने की लत जैसी कोई चीज़ होती भी है या नहीं और अगर होती है तो इसका उपचार क्या है?
शराब, सिगरेट और कैफीन का सेवन करने वाले बताते हैं कि किसी लत पर काबू पाना आसान नहीं होता है।
किसी तरह की लत से छुटकारा पाने का एक जांचा-परखा तरीका है कि नशे वाली वस्तु के सेवन से बचना। जैसे शराब पीने वाले पब में जाने और सिगरेट पीने वाले घर में इसके इस्तेमाल से बचते हैं।
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लेकिन इस तरह के उपायों को आजमाने में लोगों को काफी दिक्कत होती है और वे बार-बार विफल होते हैं।
बढ़ता मोटापा, बढ़ती चिंता
अगर आपको जिस चीज़ की लत है, वह सहजता से आपके घर में उपलब्ध है तो आप क्या करेंगे? मसलन खाने-पीने की वस्तुएं।
ऐसी स्थिति में खाने से दूर रहना संभव नहीं होता।
वैश्विक स्तर पर मोटापे की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है इसलिए वैज्ञानिक मोटापे और खाने की लत के बीच रिश्ते की पड़ताल कर रहे हैं
यूरोपीय यूनियन इस तरह के न्यूरो फास्ट नाम के प्रोजेक्ट को आर्थिक मदद दे रही है।
इसमें कोशिश हो रही है कि सारे साक्ष्यों को एकसाथ जुटाकर उनके विश्लेषण से कोई निष्कर्ष निकाला जा सके।
अभी तक केवल एक तरह के खाने का विकार शोध में सामने आया है, जिसमें बार-बार खाना एक लत का रुप ले लेता है।
जिसका साइड एफेक्ट मोटापे के रुप में सामने आता है।
नुकसान
वैज्ञानिक ज्यादा खाने और इसकी लत के बीच किसी तरह का रिश्ता होने की बात से साफ तौर पर इंकार करते हैं।
लेकिन कुछ वैज्ञानिक चॉकलेट खाने की लत के साथ जोड़कर अपनी बात को साबित करने का प्रयास करते हैं जो किसी अन्य लत के समान हमें शारीरिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुंचाती है।
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शोधकर्ता ने अपनी टीम के एक सदस्य माइकल से पूछा तो उन्होंने बताया, "मोटापे का कारण समझना काफी कठिन है। हर कोई ज्यादा खाता है और वे सोचते हैं कि बस थोड़ा सा ज्यादा खा रहे हैं। दिन में हर मिनट पर कुछ न कुछ खाते रहना बेहद अलग तरीके का अनुभव है।"
शोध करने वाली टीम की एक अन्य सदस्य लुइस ने खाने की आदतों के बारे में काफी रोचक जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि "किसी लत के शिकार लोगों के व्यवहार में काफी समानताएं होती हैं।"
मोटापे से जुड़ी रोचक बातें
लुइस के अनुसार, "एक शराबी अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग दुकानों से शराब खरीदता है। उसी तरह मैं भी चॉकलेट के लिए दुकानें बदलती हूं। घरों में शराबी शराब छिपाते हैं, उसी तरह से चॉकलेट के लती लोग चॉकलेट छिपाने की कोशिश करते हैं।"
डॉक्टर नोरा वोल्को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ड्रग एब्यूज की प्रमुख और प्रसिद्ध न्यूरोसाइंटिस्ट हैं।
उनका मानना है, "माइकल और लुइस जो बात कह रही हैं दरअसल वह एक जैविक प्रक्रिया है।"
उन्होनें शोध में पाया, "डोपामाइन नाम का एक न्यूरो ट्रांसमीटर खाने की लत को बढ़ाना देता है। यह मस्तिष्क में ड्रग की लत के समान काम करता है। जो खाने की लत के मौजूदगी की पुष्टि करता है।"
किसी चीज़ की लत छुड़ाने के दौरान कोशिश होती है कि या तो व्यक्ति पूरी तरह से लत छुटकारा पा जाए या फिर उससे होने वाला नुकसान कम हो जाए।
शोधकर्ता यह भी कहते हैं कि खाने से परहेज़ मुश्किल है, लेकिन ज्यादा खाने से बचना संभव है।