नौकरी के लिए यहां लड़कियों को देना पड़ता है वर्जिनिटी टेस्ट
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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इंडोनेशिया से सेना में भर्ती होने वाली महिलाओं का कौमार्य परीक्षण रोकने की अपील की है। ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि हाइमन टेस्ट महिलाओं के लिए अपमानजनक और हानिकारक है। एक अन्य समूह ने इसे शोषण बताया है। इंडोनेशिया की सेना ने 'कौमार्य परीक्षण' का बचाव करते हुए कहा है कि यह 'अनैतिक महिलाओं' को सेना में आने से रोकने के लिए है।
पिछले साल इंडोनेशिया की पुलिस को भी इस परीक्षा के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा था। अत्याचार पीड़ितों के लिए अंतर्राष्ट्रीय पुनर्वास परिषद और एचआरडब्ल्यू का ये भी कहना है कि सेना के पुरूष अधिकारियों का विवाह जिन महिलाओं से हो रहा होता है उन्हें भी पहले ये परीक्षण करवाने होते हैं। हालांकि सेना ने इससे इंकार किया है।
सेना नहीं करती स्वीकार
इंडोनेशिया सेना के प्रवक्ता फवाद बासया का कहना है कि ये परीक्षण अभी भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि वो समझते हैं कि कौमार्य खो चुकीं कुछ लोग सेना में क्यों आने की कोशिश कर रहे हैं।
"उनके साथ कोई दुर्घटना हुई होगी या वो किसी बीमारी या आदत का शिकार हो सकते हैं। "आदत से उनका मतलब सेक्स संबंधों से था। उन्होंने कहा, "यदि ये उनकी आदत है तो इंडोनेशिया की सेना उन्हें स्वीकार नहीं कर सकती है।"
यौन हिंसा
विश्व स्वास्थ्य संगठन कौमार्य परीक्षण को यौन हिंसा मानता है। संगठन का कहना है कि इसका कोई वैज्ञानिक भी आधार नहीं है। संगठन का कहना है कि महिला का हाइमन कई बार यथावत् नहीं मिल सकता लेकिन उसकी बहुत सारी वजह हो सकती है।
सार्वजनिक आलोचना के बाद 2014 में इंडोनेशिया की सरकार ने पुलिस भर्ती में इस परीक्षण को खत्म कर दिया था। इसी साल जावा में छात्राओं को डिप्लोमा देने से पहले वर्जिनिटी टेस्ट की प्रक्रिया को भी खत्म कर दिया गया था।