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बच्चों का करीब 70 फीसदी प्रदर्शन उनके जीन्स से तय होता है: रिपोर्ट
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 11 Sep 2018 12:37 PM IST
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यह बहस बहुत पुरानी है कि बच्चों का विकास आखिर किन पैमानों से तय होता है। एक मत है कि बच्चों को मिलनेवाली अवसर उनके मानसिक विकास की दिशा तय करते हैं। तो एक दूसरा मत है कि यह बच्चों का नैसर्गिक गुण है जिससे उनका विकास और प्रदर्शन तय होता है। हालांकि लंदन में हुए एक नए शोध से यह जानकारी सामने आई है कि बच्चों का करीब 70 फीसदी प्रदर्शन उनकी आनुवंशिकता से तय होता है, जो उन्हें माता-पिता से मिलते हैं। बाकी बचा 30 फीसदी प्रदर्शन उनकी मेहनत और उनके आस-पास के वातावरण से तय होता है।
लंदन के किंग्स कॉलेज के हालिया अध्ययन का विषय था- जुड़वा बच्चों का स्कूल में प्रदर्शन। इसके लिए उन्होंने जुड़वा बच्चों के करीब 6 हजार जोड़ों को बुलाया, यानी करीब 12 हजार बच्चे। लेकिन इसी अध्ययन के दौरान उन्हें बच्चों के स्कूल में प्रदर्शन का उनके जीन से भी संबंध मिल गया। इसके आधार पर साथ-साथ ही नया अध्ययन भी शुरू किया गया।
रिपोर्ट में आनुवांशिकी के असर का अर्थ है माता-पिता का कौशल
इस शोध के नतीजों के मुताबिक प्राइमरी स्तर से लेकर कॉलेज स्तर तक बच्चे का कौशल बनता-बिगड़ता रहता है और ये प्रक्रिया आनुवांशिकता से तय होती है। इसी का असर बच्चे के परीक्षा के नंबरों पर भी दिखता है। इस अध्ययन में जीन्स के असर का मतलब इस बात से नहीं है कि माता-पिता कितने पढ़े-लिखे हैं, बल्कि उनके कौशल से है। माता-पिता कम पढ़े-लिखे लेकिन बेहतर स्किल वाले हों तो भी मुमकिन है कि बच्चा स्कूल में बेहतर प्रदर्शन करे।
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जीन और बच्चे के प्रदर्शन के बीच संबंध के अध्ययन को रिसर्चर ने जेनोम वाइड एसोसिएशन स्टडी का नाम दिया। इस स्टडी से ये भी पता चला कि बच्चे के प्रदर्शन पर जीन का असर समय के साथ-साथ बढ़ता भी जाता है। प्राइमरी लेवल तक ये असर 4 से 10 फीसदी तक रहता है। मिडिल स्कूल के स्तर तक बढ़कर 30 से 40 फीसदी और कॉलेज तक बढ़ते-बढ़ते 70 फीसदी तक हो जाता है। अध्ययन में इसे पॉलीजेनिक स्कोर का नाम दिया गया।
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लंदन के किंग्स कॉलेज के हालिया अध्ययन का विषय था- जुड़वा बच्चों का स्कूल में प्रदर्शन। इसके लिए उन्होंने जुड़वा बच्चों के करीब 6 हजार जोड़ों को बुलाया, यानी करीब 12 हजार बच्चे। लेकिन इसी अध्ययन के दौरान उन्हें बच्चों के स्कूल में प्रदर्शन का उनके जीन से भी संबंध मिल गया। इसके आधार पर साथ-साथ ही नया अध्ययन भी शुरू किया गया।
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रिपोर्ट में आनुवांशिकी के असर का अर्थ है माता-पिता का कौशल
इस शोध के नतीजों के मुताबिक प्राइमरी स्तर से लेकर कॉलेज स्तर तक बच्चे का कौशल बनता-बिगड़ता रहता है और ये प्रक्रिया आनुवांशिकता से तय होती है। इसी का असर बच्चे के परीक्षा के नंबरों पर भी दिखता है। इस अध्ययन में जीन्स के असर का मतलब इस बात से नहीं है कि माता-पिता कितने पढ़े-लिखे हैं, बल्कि उनके कौशल से है। माता-पिता कम पढ़े-लिखे लेकिन बेहतर स्किल वाले हों तो भी मुमकिन है कि बच्चा स्कूल में बेहतर प्रदर्शन करे।
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जीन और बच्चे के प्रदर्शन के बीच संबंध के अध्ययन को रिसर्चर ने जेनोम वाइड एसोसिएशन स्टडी का नाम दिया। इस स्टडी से ये भी पता चला कि बच्चे के प्रदर्शन पर जीन का असर समय के साथ-साथ बढ़ता भी जाता है। प्राइमरी लेवल तक ये असर 4 से 10 फीसदी तक रहता है। मिडिल स्कूल के स्तर तक बढ़कर 30 से 40 फीसदी और कॉलेज तक बढ़ते-बढ़ते 70 फीसदी तक हो जाता है। अध्ययन में इसे पॉलीजेनिक स्कोर का नाम दिया गया।
आपराधिक प्रवृत्ति के लिए भी जीन जिम्मेदार
कोर्ट
अध्ययन से ये भी पता चला कि आनुवांशिकी ही किसी इंसान के अंदर की आपराधिक प्रवृत्ति का भी निर्धारण कर देते हैं। इस बात को साबित करने के लिए रिसर्चर ने अमेरिका के 2012 के एक मर्डर केस का जिक्र किया। वॉल्ड्रप नाम के इंसान ने अपनी पत्नी और उसकी दोस्त की हत्या की थी।
मामला कोर्ट पहुंचा। यहां वॉल्ड्रप के वकील ने कहा कि उनके शरीर में मोनोअमीन ऑक्सिडेस-ए जीन है, जिसे वॉरियर जीन भी कहते हैं। इसकी वजह से इंसान खुद-ब-खुद ज्यादा आक्रामक हो जाता है।
मतलब वॉल्ड्रप ने ये हत्या की तो है, लेकिन ये इरादतन नहीं है। वो जीन की वजह से मजबूर हो गए थे। इसलिए घटना में वॉल्ड्रप को ज्यादा सख्त सजा नहीं दी जानी चाहिए। अदालत ने लंबे समय तक चले केस में वॉल्ड्रप के पक्ष को माना और उनकी सजा भी कम की।
मामला कोर्ट पहुंचा। यहां वॉल्ड्रप के वकील ने कहा कि उनके शरीर में मोनोअमीन ऑक्सिडेस-ए जीन है, जिसे वॉरियर जीन भी कहते हैं। इसकी वजह से इंसान खुद-ब-खुद ज्यादा आक्रामक हो जाता है।
मतलब वॉल्ड्रप ने ये हत्या की तो है, लेकिन ये इरादतन नहीं है। वो जीन की वजह से मजबूर हो गए थे। इसलिए घटना में वॉल्ड्रप को ज्यादा सख्त सजा नहीं दी जानी चाहिए। अदालत ने लंबे समय तक चले केस में वॉल्ड्रप के पक्ष को माना और उनकी सजा भी कम की।