फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Europe ›   female genital mutilation

सात साल में हो गया खतना, उठे सवाल

Mon, 24 Jun 2013 01:45 PM IST
Updated Mon, 24 Jun 2013 01:45 PM IST
विज्ञापन
female genital mutilation

मिस्र में 13 साल की एक बच्ची की खतना के दौरान हुई मौत ने दुनिया का ध्यान इस मुद्दे की तरफ खींचा है और इस बारे में नए सिरे से बहस शुरू हो गई है।

विज्ञापन


ब्रितानी आंकड़ों के मुताबिक देश में पिछले दो सालों में जिन लड़कियों की खतना के दौरान हुई समस्याओं के लिए इलाज किया गया, उनमें सबसे कम उम्र की लड़की सात साल की थी।
विज्ञापन


बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था एनएसपीसीसी के मुताबिक विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इस दौरान करीब 1700 महिलाओं और लड़कियों का खतना से हुई विकृतियों के लिए इलाज किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


कुछ अफ्रीकी, मध्य पूर्वी और एशियाई देशों में खतना की प्रथा है। एनएसपीसीसी ने ब्रिटेन में इस बारे में लड़कियों के जागरूक बनाने के लिए एक हेल्पलाइन शुरू की है।

गैरकानूनी

संस्था के मुताबिक खतना की प्रथा 'गैरकानूनी और जानलेवा' है। इससे बच्चियों को भयानक शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है और वे लंबे समय तक इससे उबर नहीं पाती हैं।

खतना को ब्रिटेन में 1985 में प्रतिबंधित कर दिया गया था लेकिन अब भी गुपचुप रूप से ये बदस्तूर जारी है। अक्सर खतना के दौरान संवेदनहारी दवा का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

कभी कभार लड़कियों को खतना के लिए बाहर भेजा जाता है और कभी इसे ब्रिटेन में ही अंजाम दिया जाता है।

एनएसपीसीसी का कहना है कि जिन लड़कियों का खतना किया जाता है उनकी उम्र चार से दस साल के बीच होती है। कुछ मामलों में तो लड़कियों की उम्र इससे भी कम होती है।


खतरा

लंदन के गाइज एंड सेंट थॉमस अस्पताल में मिडवाइफ कंफर्ट मोमोह ने कहा कि कई महिलाओं के खतना के बारे में तब तक पता नहीं चलता जब तक कि वे गर्भवती नहीं हो जाती हैं या डॉक्टर से नहीं मिलती।

उन्होंने कहा, “कई महिलाएं को तो पता भी नहीं है कि उनका खतना कब हुआ था क्योंकि जब ये हुआ था उस समय वे बच्चियां थीं।”

सरकारी अनुमान के मुताबिक इंग्लैंड और वेल्स में करीब 20,000 लड़कियों पर इसका खतरा मंडरा रहा है लेकिन इस बारे में सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

मेट्रोपोलिटन पुलिस सर्विस के अधिकारी कीथ निवेन ने कहा, “संस्कृति के नाम पर इसे जारी नहीं रखा जा सकता है। ये बच्चों के अधिकारों का हनन है और इसमें शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।”

ज्यूडिथ बर्न्स/बीबीसी संवाददाता

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed