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महिलाओं के खतने से परेशान ब्रिटेन

Thu, 23 May 2013 03:54 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 23 May 2013 03:54 PM IST
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female genita mutilation in britain

ब्रिटेन अपने यहाँ रह रही पूर्वी अफ़्रीकी देशों के मूल की महिलाओं के खतने की प्रथा से बेहद परेशान है। एक अनुमान है की ब्रिटेन में करीब 66000 महिलाएं इस कुप्रथा से प्रभावित हैं।

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कई बार पूर्वी अफ़्रीकी मूल की ब्रितानी लड़कियों को अपने पूर्वजों के देश में ले जा कर उनका खतना कर दिया जाता है।

ब्रिटेन में इस बात पर अभी तक कोई सज़ाएँ नहीं हुई हैं लेकिन देश की सरकार का कहना है कि वो महिलाओं के जननांगों को काटे जाने की प्रथा के अंत के लिए कटिबद्ध है। महिलाओं का खतना या उनके जननांगों को काटने की इस कुप्रथा को कई बार ब्रिटेन में भी अंजाम दिया जाता है।
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इस तरह की हिंसा से प्रभावित महिलाओं की मदद लंदन, ब्रिस्टल, बर्मिंघम, में कई अस्पताल और क्लीनिक कर रहे हैं।

आप बीती
पैतीस साल की उम्र की महिला फ़िल्सन उन्ही महिलाओं में से एक हैं जिनके जननांग सामाजिक मान्यताओं के कारण सिल दिए गए थे।

फ़िल्सन के तीन बच्चे हैं और वो ब्रिटेन में रहती हैं। उस दिन को याद करते हुए वो बताती हैं कि सात साल की उम्र में सोमालिया में उनके खतने के पहले उन्हें नए कपड़े दिए गए। पर उसके बाद जो हुआ उसमे कुछ भी अच्छा नहीं था।
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फ़िल्सन बताती हैं, "वो बेहद दर्दनाक था। हालांकि मुझे दर्द निवारक इंजेक्शन दिया गया था, लेकिन जब उसका असर खत्म हुआ तो मैं टॉयलेट भी नहीं जा पाती थी।"

फ़िल्सन याद करती हैं, "मुझे ज़मीन पर सोना पड़ता था, चलना तो दूर, मैं खड़ी तक नहीं हो सकती थी। मेरे पाँव रस्सी से बांध दिए गए जिससे मैं अपने पावों को फैला ना सकूं। वो सब बेहद दर्दभरा था।"

फ़िल्सन बताती हैं "जब मेरे पहले बच्चे के जन्म का वक़्त आया तो मैं बस यही सोच रही थी कि यह बच्चा मेरे शरीर के इतने क्षतिग्रस्त हिस्से से कैसे निकलेगा। लेकिन मेरे पास एक अच्छा डॉक्टर था जो मेरी परेशानी को समझता था।"

फ़िल्सन की वो यादें अभी तक उनके अंदर सिहरन पैदा कर देती हैं।

प्रयास
आज फ़िल्सन अपने जैसी महिलाओं की मदद के लिए काम करती हैं। सोमाली मूल के लोगों के बीच उनका काम धीरे-धीरे रंग ला रहा है।

फ़िल्सन कहती हैं "ब्रिटेन में लोग धीरे-धीरे समझ रहे हैं कि यह कोई अच्छी प्रथा नहीं है और इससे दूर जाने की ज़रुरत है। अफ़्रीका में इसके खिलाफ़ लोगों को जागरूक करने की ज़रुरत है।"

ब्रिटेन में सोमाली भाषा के टीवी चैनलों पर इसके खिलाफ़ विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं और प्रभावित महिलाओं की सर्जरी भी की जा रही है।

क्वीन शार्लेट अस्पताल में काम करने वाली एक विशेषज्ञ जूलिएट एल्बर्ट बताती हैं कि क्यों ब्रिटेन में कई परिवार आज भी इस बर्बर प्रथा का पालन करते हैं।

एल्बर्ट के अनुसार "यूं तो महिलाएं इससे दूर रहना चाहती हैं, लेकिन वो घबराती है कि आगे चल कर उनकी बेटियों की शादी में इसकी वजह से कहीं दिक्कत ना उठ खड़ी हो।"

एल्बर्ट कहती हैं कि इस खतने की वजह से महिलाओं को यूरिन इन्फेक्शन होता है, सेक्स तथा अपने मासिक के दौरान उन्हें बेहद दर्द का सामना भी करना पड़ता है।

इस नुकसान को पलटना बहुत मुश्किल नहीं है और यह एक छोटे से ऑपरेशन के साथ किया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय अभियान
ब्रिटेन की सामाजिक स्वास्थ्य मंत्री ऐना सर्बी का कहती हैं "ब्रिटेन अपने हर बच्चे को अत्याचार से बचाएगा चाहे उसके दादा या दादी किसी भी देश से ताल्लुक रखते हों।"

ब्रिटेन की सरकार ने हाल ही में साढ़े तीन करोड़ पाउंड या करीब 292 करोड़ रुपयों के बराबर के कार्यक्रम की घोषणा की है जिसके तहत महिलाओं के खतने की प्रथा के खिलाफ ना केवल ब्रिटेन में बल्कि उन देशों में भी अभियान चलाया जाएगा जहाँ इस कुप्रथा का पालन होता है।

ब्रिटेन की अंतर्राष्ट्रीय विकास मंत्री लिन फ़ेदरमोर का कहना है "पूर्व में इस तरह के मसले सांस्कृतिक कारणों से नहीं छुए जाते थे लेकिन अब और नहीं। महिलाओं के खिलाफ हिंसा हिंसा है चाहे वो बंद दरवाजों के पीछे हो और किसी भी कारण से हो।"

उनके अनुसार सरकार और गृह मंत्रालय इसके बारे में जो कर सकेंगे वो करेंगे। फ़ेदरमोर कहती हैं कि इस प्रथा से निपटने के लिए के नए क़दमों की ज़रुरत है पर बल देती है। वो कहती हैं " फ़्रांस में छह साल तक की बच्चियों के जननांगों का परीक्षण किया जाता है। लेकिन इस देश में इसकी ज़रुरत नहीं है क्योंकि यहाँ ज़्यादातर आबादी के बीच इस तरह की समस्या नहीं है।"


तरीका चाहे जो हो लेकिन सरकार का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए और काम की ज़रुरत है ब्रिटेन में मौजूद सामाजिक समूहों के बीच भी और स्कूलों के बच्चों के बीच भी।

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