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बिन शादी एक से ज्यादा जीवनसाथियों के साथ जीवन...

Sun, 07 Apr 2013 05:49 PM IST
Updated Sun, 07 Apr 2013 05:49 PM IST
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england relationship

मिक और माइरेड फिलपॉट के घर में मिक की गर्लफ्रेंड और 11 बच्चे भी रहते थे।

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इस रिश्ते को एक से ज्यादा प्रेमीके साथ रहने वाला रिश्ता माना जा सकता है जिसे पॉलीएमोरस रिश्ता कहा जाता है।

कुछ दिन पहले ही मिक और माइरेड को इंग्लैंड में कोर्ट ने आग लगाने का दोषी पाया था।

इस आग में छह बच्चे मारे गए थे ताकि मिक की पुरानी महिला साथी लिसा को मामले में उलझाया जा सके। लिसा भी मिक और माइरेड के साथ उसी घर में रहा करती थी।

कोर्ट की कार्रवाई के दौरान माइरेड और लिसा ने माना था कि वो बहनों की तरह रहने लगी थीं और एक दूसरे के बच्चों को अपने बच्चे मानने लगी थी। लेकिन बाद में संबंध बिगड़ गए।

सवाल ये है कि आख़िर लोग एक से ज्यादा प्रेमी के साथ कैसे रह लेते हैं? क्या इन रिश्तों की वजह से कईसमस्याएंनहीं खड़ी होती?

एक से ज्यादा प्रेमी के साथ रहने वाली प्रवृति से जुड़े शोध से यह अंदाजा मिलता है कि कुछ महिलाएं इसके लिए रज़ामंद होते वक्त दबाव महसूस कर सकती हैं।

रिश्तों की गोपनीयता
वैवाहिक और पारिवारिक मामलों की थैरेपिस्ट डोजी इस्टन ने भी कई लोगों को अपना जीवनसाथी मानने जैसे रिश्ते बनाए हैं।उनका कहना है कि ये कई लोगों के साथ शादी करके रहने से अलग होता है।
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अपने अनुभव के बारे में वो कहती हैं, हम सब जो जीवनसाथी के तरह रहते थे, हम बच्चों का मिलकर पालन पोषण करते थे। कभी नज़दीकियां होती हैं, कभी दूरियाँ लेकिन सब परिवार की तरह रहते हैं।
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वो कहती हैं कि अब लोग एक से ज्यादा साथी रखने का प्रयोग कर रहे हैं और इसके लिए ठीक उसी तरह से स्वीकार्यता बढ़ रही है जिस तरह समलैंगिक रिश्तों को स्वीकार किया जा रहा है।

'बढ़ रही है स्वीकार्यता'
डरहम विश्वविद्यालय के डॉक्टर ब्रुक्स के मुताबिक ऐसे रिश्तों में आमतौर पर एक आदमी का संबंध दो या तीन महिलाओं के साथ बनता है जिसमें पुरुष केंद्र में होता है।

आखिर महिलाओं की तुलना में पुरुष क्यों एक से ज्यादा प्रेमी चाहते हैं? डॉक्टर ब्रुक्स का कहना है कि इसकी धार्मिक और कानूनी वजहें सभी जानते हैं लेकिन बाकी वजहें अटकलों पर आधारित हैं।

उन्होंने कहा कि इसका एक तर्क यह दिया जाता है कि पुरुष आमतौर पर ज्यादा ईर्ष्यालु होते हैं और वे दूसरे पुरुष के साथ अपनी साथी या पत्नी को साझा नहीं करना चाहते हैं। हालांकि मुझे इस तर्क के समर्थन के लिए ज्यादा प्रमाण नहीं मिले।

'बहुविवाह पुरुषों के लिए बेहतर नहीं'
डॉक्टर ब्रुक्स शोध के हवाले से कहते हैं कि बहुविवाह में महिलाओं को यौन रोग, पारिवारिक हिंसा जैसे कई ख़तरों से जूझना पड़ता है।

वह कहते हैं कि मुख्यतौर पर अवसाद की वजह से महिलाओं को मानसिक औरमनोवैज्ञानिकसमस्याएं होती हैं। मिसाल के तौर पर अगर कोई पत्नी गर्भवती होती है तो उसका पति अपनी दूसरी पत्नियों में दिलचस्पी दिखाना शुरू कर सकता है।

महिलाएं ऐसे संबंधों में सशक्त नहीं रह पातीं। ठीक इसी तरह बहुविवाह पुरुषों के लिए बेहतर साबित नहीं होता है क्योंकि उन्हें भी एक बड़े परिवार कीजिम्मेदारीलेनी पड़ती है।


वहीं डोज़ी कहती हैं कि एक से ज्यादा साथी के साथ जीवन बिताने में ईर्ष्या एक समस्या होती है। पर अगर सभी साथी अपनी रजामंदी दे दें तब भी एक से ज्यादाप्रेमी वाले रिश्तेमें मुश्किल आएगी? इस्टन ऐसा नहीं मानती हैं।

उनका कहना है कि लोग ऐसे रिश्ते में ईर्ष्या को दूर करने की कोशिश करते हैं। इस प्रक्रिया में एक स्वस्थ भावनात्मक अहसास को भी महसूस करते है।

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