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डायबिटीज है, तो किडनी टेस्ट कराना न भूलें
Updated Tue, 16 Jul 2013 08:09 AM IST
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एक ब्रितानी चैरिटी संस्था के अनुसार मधुमेह से पीड़ित करीब एक चौथाई लोग किडनी की ज़रूरी जाँच नहीं कराते हैं।
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मधुमेह (डायबिटीज़) के कारण किडनी को होने वाले नुकसान का शुरुआती चरण में ही पता लगाने के लिए ये जाँच ज़रूरी होती है।
डायबिटीज़ यूके का कहना है कि 2010-11 के राष्ट्रीय डायबिटीज़ ऑडिट के आंकड़े बताते हैं कि इंग्लैंड में लगभग एक चौथाई लोगों का एल्बूमिन मूत्र परीक्षण नहीं हुआ।
इस दौरान इंग्लैंड और वेल्स में मधुमेह के कारण किडनी फेल होने का इलाज कराने वाले लोगों की संख्या दस हजार से भी कम थी।
डायबिटीज़ यूके का कहना है कि ये आंकड़े “चिंताजनक” हैं।
मधुमेह से पीड़ित लोगों में किडनी का फेल होना एक सामान्य बीमारी है।
छोटा सा टेस्ट
अनुमान है कि इंग्लैंड में क़रीब तीस लाख लोगों को मधुमेह है। इनमें से ज्यादातर लोगों को टाइप 2 का मधुमेह है।
माना जाता है कि इसके अलावा साढ़े आठ लाख अन्य लोग टाइप 2 के मधुमेह से पीडि़त हैं और वो इस बीमारी से पीड़ित होने से अनजान हैं।
कुछ ऐसे निश्चित परीक्षण हैं जो मधुमेह के मरीज़ों को हर साल कराने चाहिए ताकि मधुमेह से आँख और पैर को प्रभावित करने वाली बीमारियों को शुरु में ही पकड़ा जा सके।
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मूत्र परीक्षण उन दो प्रयोगों में एक है जिससे मधुमेह की पहचान हो सकती है। इसके अलावा रक्त परीक्षण से भी पता चलता है कि किसी व्यक्ति की किडनी कितनी स्वस्थ है।
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डायबिटीज़ यूके के अनुसार ज्यादातर लोग मधुमेह के परीक्षण के लिए केवल रक्त परीक्षण कराते हैं लेकिन उन्हें मूत्र परीक्षण भी अवश्य कराना चाहिए।
डायबिटीज़ यूके का कहना है कि कई बार ऐसी समस्या बहुत मामूली कारणों से भी हो सकती है जैसे परीक्षण के दिन पेशाब का नमूना ले जाना भूल गए।
डायबिटीज़ पर भारी ख़र्च
डायबिटीज़ यूके की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बारबारा यंग का कहती हैं, “यह सचमुच काफी चिंताजनक है कि मधुमेह से पीड़ित एक चौथाई लोग एक मामूली सा परीक्षण नहीं कराते जिससे उनकी किडनी की ख़राबी को शुरुआती चरण में पहचाना जा सकता है और उसे बढ़ने से रोका जा सकता है। ”
वो कहती हैं, “हो सकता है कि किडनी का फेल होना मधुमेह पीड़ितों को उतना परेशान न करता हो जितना कि उन्हें नज़र चले जाने या अंगभंग होने से लगता है लेकिन इससे भी जीवन की गुणवत्ता पर भी उतना ही बुरा असर हो सकता है।”
“जो लोग यह परीक्षण नहीं कराते हैं उनके डायलासिस पर जाने और आख़िरकार उनकी जान जाने का ख़तरा काफी बढ़ जाता है।”
बारबारा यंग कहती हैं कि किडनी फेल होने के कारण ही इंग्लैंड के नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के बजट का 10 प्रतिशत हिस्सा मधुमेह के इलाज में खर्च होता है।