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डेनमार्क में बढ़ते ऑनलाइन तलाक के मामलों पर देश की सरकार हुई सख्त
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 03 Apr 2018 12:18 PM IST
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डेनमार्क में प्रशासन डिजिटली स्ट्रांग है। सरकार शासन को आसान बनाने के लिए डिजिटलीकरण का कैंपेन चला रही है। यहां 16 और 89 साल के बीच के 90% से ज्यादा लोग सरकार द्वारा दी गई डिजिटल आईडी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस सरकारी आईडी की मदद से अपनी शिकायतों और जरूरतों के लिए संबंधित विभाग से ऑनलाइन ही संपर्क करते हैं।
वहां आम जन-जीवन से जुड़ी चीजें बस एक क्लिक ही दूर हैं चाहें वह मृत्यु प्रमाणपत्र हों या फिर हॉस्पिटल के रिकॉर्ड्स या फिर बात करें टैक्स रिटर्न्स की हर जरूरी और अहम दस्तावेज आसानी ने ऑनलाइन रजिस्टर किए जा सकते हैं और मिल भी जाते हैं। यहां तक की तलाक का आवेदन भी ऑनलाइन किया जाता है और चौंकाने वाली बात यह है कि आवेदन किए जाने के एक हफ्ते से कम समय में तलाक मिल भी जाता है। पहले जहां पूरे प्रोसेस में सालों साल लगा करता था अब कम समय में तलाक मिल जाता है वहीं इसके लिए सिर्फ 60 डॉलर जमा करने होते हैं।
लेकिन इस आसान ऑनलाइन प्रक्रिया का नुकसान देखते हुए लोगों की शादियां बहुत तेजी से टूटने लगीं। पति-पत्नी छोटे-मोटे झगड़ों पर भी एक दूसरे को तलाक लेने लगे हैं और इसका असर बच्चों पर भी देखने को मिला।
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वहां आम जन-जीवन से जुड़ी चीजें बस एक क्लिक ही दूर हैं चाहें वह मृत्यु प्रमाणपत्र हों या फिर हॉस्पिटल के रिकॉर्ड्स या फिर बात करें टैक्स रिटर्न्स की हर जरूरी और अहम दस्तावेज आसानी ने ऑनलाइन रजिस्टर किए जा सकते हैं और मिल भी जाते हैं। यहां तक की तलाक का आवेदन भी ऑनलाइन किया जाता है और चौंकाने वाली बात यह है कि आवेदन किए जाने के एक हफ्ते से कम समय में तलाक मिल भी जाता है। पहले जहां पूरे प्रोसेस में सालों साल लगा करता था अब कम समय में तलाक मिल जाता है वहीं इसके लिए सिर्फ 60 डॉलर जमा करने होते हैं।
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लेकिन इस आसान ऑनलाइन प्रक्रिया का नुकसान देखते हुए लोगों की शादियां बहुत तेजी से टूटने लगीं। पति-पत्नी छोटे-मोटे झगड़ों पर भी एक दूसरे को तलाक लेने लगे हैं और इसका असर बच्चों पर भी देखने को मिला।
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2017 में यहां तलाक की दर करीब 46.75% रही
वहीं कई मामलों में पति-पत्नी दोनों ही बच्चों को साथ रखने से मना कर देते हैं। 2017 में यहां तलाक की दर करीब 46.75% रही। यानी 100 शादियों में से करीब 46 टूटी। यह तलाक दर यूरोपीय देशों में सबसे अधिक है। ऐसे में सरकार तलाक लेने के नियमों को सख्त कर दिया है। नए नियम के तहत जिन दंपती के बच्चे हैं, उन्हें अपनी शादी को बनाए रखने के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा। इस दौरान पति पत्नी सरकारी निगरानी में रहेंगे और ये अधिकारी पति-पत्नी के बीच विवाद को खत्म करने की कोशिश करेंगे। सरकार दंपती को काउंसिलर भी उपलब्ध कराएगी और इसका कोई शुल्क भी नहीं लिया जाएगा।
नए नियम में बच्चों के प्रोटेक्शन के भी उपाय किए गए है। तीन महीने की वेटिंग अवधि के दौरान बच्चों की भी काउंसलिंग की जाएगी। नए नियम अगले साल से प्रभाव आएंगे। हालांकि जिन कपल के बच्चे नहीं है, ऐसे लोग ऑनलाइन व्यवस्था की तहत तत्काल ले सकेंगे। यहां तक हल्की-फुल्की झड़प के मामले में भी वो तलाक के लिए आवेदन कर सकते हैं। देश के बच्चों और सामाजिक मामले के मंत्री मेई मर्केडो का कहना है कि मौजूदा नियम के तहत माता-पिता तलाक लेते समय अपने बच्चों की व्यवस्था के लिए काफी कम समय में ही फैसला लेते थे।
हम उन्हें और अधिक समय देना चाहते हैं ताकि वो अपने फैसले पर ठीक से निर्णय ले। यह समय आपसी विवाद को सुलझाने में भी काफी अहम रोल अदा करेगा। आईटी यूर्निवर्सिटी के प्रोफेसर मोर्टेन जेल्हॉल्ट कहते हैं कि मानव जीवन को आईटी सिस्टम में फिट नहीं किया जा सकता। सरकार और उसके नागरिकों के बीच प्रभावी संचार के साथ डिजिटलीकरण बढ़ाना हमेशा अलग-अलग जीवन स्थितियों से मेल नहीं खाता है।
नए नियम में बच्चों के प्रोटेक्शन के भी उपाय किए गए है। तीन महीने की वेटिंग अवधि के दौरान बच्चों की भी काउंसलिंग की जाएगी। नए नियम अगले साल से प्रभाव आएंगे। हालांकि जिन कपल के बच्चे नहीं है, ऐसे लोग ऑनलाइन व्यवस्था की तहत तत्काल ले सकेंगे। यहां तक हल्की-फुल्की झड़प के मामले में भी वो तलाक के लिए आवेदन कर सकते हैं। देश के बच्चों और सामाजिक मामले के मंत्री मेई मर्केडो का कहना है कि मौजूदा नियम के तहत माता-पिता तलाक लेते समय अपने बच्चों की व्यवस्था के लिए काफी कम समय में ही फैसला लेते थे।
हम उन्हें और अधिक समय देना चाहते हैं ताकि वो अपने फैसले पर ठीक से निर्णय ले। यह समय आपसी विवाद को सुलझाने में भी काफी अहम रोल अदा करेगा। आईटी यूर्निवर्सिटी के प्रोफेसर मोर्टेन जेल्हॉल्ट कहते हैं कि मानव जीवन को आईटी सिस्टम में फिट नहीं किया जा सकता। सरकार और उसके नागरिकों के बीच प्रभावी संचार के साथ डिजिटलीकरण बढ़ाना हमेशा अलग-अलग जीवन स्थितियों से मेल नहीं खाता है।