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कब, क्यों ब्रिटेन को माफी मांगनी पड़ी
Updated Thu, 21 Feb 2013 09:48 AM IST
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने 1919 में हुई जलियांवाला बाग घटना को शर्मनाक करार दिया है।
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कैमरन ने अमृतसर जाकर विजिटर्स बुक में लिखा है, "ब्रितानी इतिहास में यह एक बेहद शर्मनाक घटना रही जिसे विंस्टन चर्चिल ने भी 'राक्षसी घटना' करार दिया था। उसे याद करते हुए हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि ब्रिटेन दुनिया भर में शांतिपूर्ण विरोध प्रकट करने का समर्थन करता है।"
लेकिन ये पहली दफा नहीं है जब किसी ब्रितानी प्रधानमंत्री ने इतिहास में घटी घटना के लिए अफसोस जताया हो या फिर सीधे सीधे माफी मांगी हो। ऐसी कुछ घटनाओं पर नजर
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दास प्रथा
दास प्रथा के लिए ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने 2007 में माफी मांगी थी। तब इस प्रथा के खत्म हुए 200 साल होने वाले थे। इससे पहले ब्लेयर ने इस प्रथा के लिए अफसोस तो जताया था पर माफी नहीं मांगी थी।
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घाना के राष्ट्रपति के साथ बातचीत में ब्लेयर ने कहा था कि मैं फिर से माफी मांगता हूं। अतीत में जो कुछ हुआ उसे याद रखना होगा कि क्यों वो अस्वीकार्य था।
ब्लडी संडे, जून 2010
2010 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने 1972 में उत्तरी आयरलैंड में 13 प्रदर्शनकारियों की मौत के लिए माफी मांगी थी।
30 जनवरी 1972 को उत्तरी आयरलैंड में लंडनबैरी इलाके में लोग प्रदर्शन कर रहे थे जब ब्रितानी सेना की गोलीबारी में 13 लोगों की मौत हो गई थी. 14 लोग घायल हुए थे जिनमें से एक ने बाद में दम तोड़ दिया था।
दो हफ्ते बाद आधिकारिक जांच शुरू हुई थी लेकिन इसे लीपा पोती माना जाता रहा। 1998 में नए सिरे से जांच हुई जिसे पूरा होने में 12 साल लगे। इसमें पीड़ितों को निर्दोष बताया गया।
रिपोर्ट के आने के बाद कैमरन ने कहा था कि इन हत्याओं को न्यायपूर्ण नहीं कहा जा सकता। रिपोर्ट में कहा गया था कि ब्रितानी सैनिकों ने पहले गोली चलाई थी।
बाल मजदूरों को विदेश भेजना, फरवरी 2010
वर्ष 2010 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने इस बात के लिए माफी मांगी थी कि ब्रिटेन ने अपने पूर्व औपनिवेश देशों में एक लाख तीस हजार से ज्यादा बच्चों को भेजा। वहां इन बच्चों को यातनाएं दी गईं।
गॉर्डन ब्राउन ने इस प्रथा पर अफसोस जताया। उन्होंने बिछड़े परिवारों को मिलाने के लिए 60 लाख पाउंड के फंड की भी घोषणा की थी।
1920 से लेकर 1960 के बीच ब्रिटेन गरीब बच्चों को ये कहकर कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भेजता था कि उन्हें वहां बेहतर जीवन मिलेगा लेकिन बहुत से बच्चों से झूठ बोला जाता था और उन्हें प्रताड़ित किया जाता था।
गॉर्डन ब्राउन ने कहा था कि ब्रिटेन इस बात के लिए माफी मांगता है कि बच्चों का ध्यान रखने के बजाए उन्हें देश से दूर भेज दिया गया।
ऐलन ट्यूरिंग मामला
सितंबर 2009 में गॉर्डन ब्राउन ने इस बात के लिए माफी मांगी थी कि ऐलन ट्यूरिंग को समलैंगिक होने के लिए प्रताड़ित किया गया था।
ऐलन ट्यूरिंग ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के कुछ कोड तोड़े थे। उन्होंने कम्प्यूटिंग के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है।
ट्यूरिंग ने स्वीकार किया था कि वे समलैंगिक हैं। इसके बाद 1952 में ट्यूरिंग को सजा दी गई थी कि रासायनिक तरीके से उन्हें नपुंसक बनाया जाए। बाद में उन्होंने आत्महत्या कर ली।
गिल्डफोर्ड फोर
70 के दशक में इंग्लैंड के गिल्डफर्ड इलाके में बम धमाके हुए थे जिसके बारे में कहा गया था कि ये आईआरए ने किए हैं। इसके लिए पिल हिल, जेरी कॉनलन, पेट्रिक आर्मस्ट्रांग और कैरोल रिचर्डसन को दोषी करार दिया गया था।
लेकिन बाद में टोनी ब्लेयर ने इन चारों से माफी मांगी थी कि उन्हें गलत तरीके से हमलों के लिए दोषी ठहराया गया। चारों ने 15-15 साल जेल में बिताए। 1989 में उनके मामले में सज़ा का फैसला पलट दिया गया।