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बूढ़ी वेश्याओं की 'रंगीन' ज़िंदगी

Wed, 03 Oct 2012 03:16 PM IST
अन्ना हॉलीगन/बीबीसी
अन्ना हॉलीगन/बीबीसी Updated Wed, 03 Oct 2012 03:16 PM IST
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colorful life of old prostitutes

ऐसे में अगर 70 साल की दो बुज़ुर्ग महिलाएं अपनी जीवनी से पूरी दुनिया को ये बताने का फैसला करती हैं कि एक वेश्या के तौर पर उनका ये सफर कैसा रहा।

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लुईस और मार्टिन फॉकिंस जुड़वा बहनें हैं, जिनके जीवन पर किताब छपने के बाद अब एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई गई है।

'मीट द फॉकिंस' नाम की इस फिल्म में दोनों बहनों ने अपने पेशे से जुड़े राज़ का उल्लेख किया है।

लुईस और मार्टिन एम्सटर्डम में एक दो कमरे के अपार्टमेंट में रहती हैं. दोनों बहनों के हाव-भाव में काफी समानता है।

यादें
"तब शायद हम 14-15 साल के थे और अन्य लड़कियों की तरह हमने भी अपने भविष्य को लेकर कई सपने पाल रखे थे। हमें नहीं पता था कि हम वेश्यावृति के धंधे में आ जाएंगे।"
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मार्टिन स्वभाव से खुशमिजाज़ हैं और रह-रह कर गाना गुनगुनाने लगती हैं लेकिन लुईस के मन में कुछ ग़हरे ज़ख्म हैं।

वो उन कठिनाइयों का ज़िक्र करती है जिस कारण उनके परिवार को द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अपना घर छोड़कर भागना पड़ा था।

उनके नाना-नानी में से एक यहूदी थे जिस कारण युद्ध के दौरान वे नीदरलैंड्स में नाज़ी सेना से छिपने में सफल रहे थे।

वे कहती हैं, ''युद्ध के समय हम काफी छोटे थे. जब भी लड़ाई शुरू होने की सूचना भोंपू से दी जाती थी तब हमें हमारी मां तहख़ाने में ले जाकर छिपा दिया करती थी। हमारे पास हेल्मेट नहीं होता था लेकिन हम फ्राइंग-पैन से अपने सिर को ढंका करते थे।''
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जब उनसे पूछा गया कि एम्सटर्डम में बिताए गए वक्त की यादें अच्छी हैं या बुरी, तो उनका कहना था कि उनकी यादों ने ज़िंदगी के प्रति उनका नज़रिया बदल दिया है।

पहले जहां लोग उन्हें भला-बुरा कहते थे वहीं अब उनकी इज्ज़त करते हैं। वे कहती हैं, ''अगर आप जीवन में दुखी भी हैं तो आपको हंसते रहना चाहिए क्योंकि आप इसे बदल नहीं सकते। ऐसे में हंसते रहना ही अच्छा है।''

उनकी चमकीली मुस्कान के बीच भी उनकी आखों में उमड़े दुख के भाव छिप नहीं पाते।

उन दिनों को याद करते हुए मार्टिन कहती हैं, ''तब शायद हम 14-15 साल के थे और अन्य लड़कियों की तरह हमने भी अपने भविष्य को लेकर कई सपने पाल रखे थे। हमें नहीं पता था कि हम वेश्यावृति के धंधे में आ जाएंगे।''

लुईस कहती हैं, ''मुझे मेरे पति ने वेश्यावृत्ति में धकेला था. वे बहुत उग्र थे और चाहते थे कि पैसा कमाने के लिए मैं देहव्यापार करुं। मैं उनसे बेहद प्यार करती थी।''

लुईस के बच्चों का पालन पोषण एक पालक घर में हुआ था।

गुज़ारा
"हमें इस धंधे के दांव-पेंच अच्छी तरह से पता हैं। हम जानते हैं कि वे हमसे क्या चाहते हैं और हम उन्हें कैसे खुश करना है।"

लुईस और मार्टिन को हॉलेंड सरकार पेंशन देती है लेकिन इससे उनका गुज़ारा नहीं चलता।

लुईस को आर्थराइटिस है इसलिए वो अब ये काम नहीं करतीं। लेकिन मार्टिन आज भी इस पेशे से जुड़ी हुई हैं।

मार्टिन कहती हैं कि वे इस काम को छोड़ना चाहती हैं लेकिन ऐसा कर नहीं सकती। उनके ग्राहक अब ज़्यादातर उम्रदराज़ पुरुष होते हैं।

कई बार काम के दौरान कम उम्र के मर्द उनका मज़ाक उड़ाते हैं लेकिन वे उनकी परवाह नहीं करतीं।

वे कहती हैं, ''समय बदल चुका है और आजकल लड़के भी काफी बदल गए हैं। वे काफी शराब पीते हैं और मोटे हो गए हैं। वे आपकी इज्ज़त भी नहीं करते। उन्हें पूरे दिन शराब में डूबे रहने के बजाय डच लड़कों की तरह बाइक चलाना चाहिए।''

मार्टिन को कम उम्र की लड़कियों से कड़ी टक्कर मिलती है लेकिन उसके बाद भी उनके पास ग्राहकों की कमी नहीं है।

उन्हें उम्रदराज़ मर्दों को संतुष्ट करने में महारथ हासिल है। वे उन्हें अपने वेश्यालय में आमंत्रित करने के लिए कई तरह की कामोत्तेजक वस्तुओं का इस्तेमाल करती हैं। इनमें ऊंची एड़ी के जूते से लेकर चाबुक जैसी चीज़ें भी शामिल हैं।

वे कहती हैं, ''हमें इस धंधे के दांवपेंच अच्छी तरह से पता हैं। हम जानते हैं कि वे हमसे क्या चाहते हैं और हम उन्हें कैसे खुश कर सकते हैं।''

अनुभव
मार्टिन के अनुसार वे खुशकिस्मत हैं कि वे आज तक ज़िंदा हैं। एक वाकये के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, ''मेरे पास एक बार एक ऐसा आदमी आया था जो मुझे पसंद नहीं था। मैंने उसके पूरे कपड़े उतरवा लिए लेकिन जब मैं बिस्तर पर बैठी तो ऐसा लगा कि उसने तकिये के नीचे एक छुरी छुपा रखी थी।''


इस तरह इन दोनों बहनों के जीवन में भी कई उतार-चढ़ाव आए हैं।

दोनों बहनों के पास लंबा-चौड़ा अनुभव है और उनका यही अनुभव अब पूरी दुनिया के सामने है।

उनका जीवन वृत्तांत डच भाषा में बिकने वाली बेहतरीन किताबों की श्रेणी में आ चुका है और उसका अंग्रेज़ी अनुवाद भी किया जा रहा है जो इस साल के अंत तक बाज़ार में आ जाएगा।

दोनों बहनों का कहना है, ''वेश्यावृत्ति करना हमारा काम है और हम यही जानते हैं। अगर हम ये नहीं करेंगें, तो क्या करेंगे। यही हमारी ज़िंदगी है और हम आज भी मज़ा कर रहे हैं।"

दोनों बहनों के अनुसार उनकी किताब 'मीट दि फॉकिंस' ने उनके जीवन को बेहतर किया है और अब लोग उन्हें सम्मान देते हैं।

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