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पॉर्न की लोकप्रियता और मां-बाप का सिरदर्द
Updated Wed, 03 Apr 2013 06:38 PM IST
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ब्रितानी अख़बार 'द इंडीपेंडेंट' ने एक लेख छापा है जिसमें एक मां ने बताया है कि कैसे उसके 11 साल के बेटे ने एक पॉर्न फ़िल्म देखी और उस पर इसका क्या मनोवैज्ञानिक प्रभाव हुआ।
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बच्चे ने एक पॉर्न वीडियो देखा था जिसमें एक युवती को इस तरह की यौन क्रीड़ा के लिए विवश किया जाता है जो बहुत ही बर्बर और घिनौना थी।
अख़बार में छपे लेख में कहा गया है कि हालांकि बच्चे ने यह वीडियो दोस्तों के कहने पर देखी थी लेकिन इसे देखने के बाद वो खिंचा-खिंचा रहने लगा, उसके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ गया और वो छोटी छोटी बातों पर नाराज़ हो जाता था।
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लेख में उस सर्वे का हवाला दिया गया है जो एक शिक्षक संघ ने हाल में ही प्रकाशित किया था।
'बच्चों को सचेत करें'
सर्वे में कहा गया है कि ब्रिटेन के आठ से 16 साल के बच्चों में से तक़रीबन 90 फ़ीसदी ने कभी न कभी पॉर्न फ़िल्म ज़रूर देखी होती है और इसलिए ज़रूरी है कि उनसे इस बारे में साफ़-साफ़ बातचीत कर इससे होने वाले नुक़सान के आगाह किया जाए।
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पॉर्न अब इतना आम हो चुका है कि एक सर्वेक्षण के मुताबिक़ अधिकांश बच्चे 11 साल की उम्र तक इससे किसी न किसी सूरत में परिचित हो चुके होते हैं।
इंटरनेट पर होने वाले सर्च में से 25 फ़ीसद पॉर्न से संबंधित होते हैं और हर सेकंड कम से कम 30,000 लोग इस तरह की साइट देख रहे होते हैं।
बीबीसी में पहले छपे एक लेख के अनुसार किशोरों के पॉर्न वेबसाइट देखने का एक बड़ा नुक़सान उनके भीतर सेक्स को लेकर पैदा हो रही भ्रांतियों के रूप में सामने आ रहा है जो माता-पिता और अभिवावक के लिए सिरदर्द बनती जा रही है।
आज जबकि हर बच्चे के पास निजी कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन और स्मार्टफोन मौजूद है तो माता-पिता को ये भी नहीं समझ में आ रहा कि इस पर रोक कैसे लगाएं।
पाठ्यक्रम में पॉर्न
साल 2011 में यूरोप में किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक नौ से 16 साल की उम्र के एक तिहाई बच्चों ने पॉर्न तस्वीरें देख रखीं थी लेकिन उनमें से सिर्फ 11 प्रतिशत ऐसे थे जिन्होंने ये तस्वीरें वेबसाइट पर देखी थीं।
जबकि 'यू गॉव' द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार 16-18 साल के बच्चों में से भी एक तिहाई ने पॉर्न तस्वीरें मोबाइल फोन पर देखीं थी।
ब्रिटेन का 'नेशनल एसोसिएशन ऑफ हेड टीचर्स' देश के पाठ्यक्रम में पॉर्नोग्राफी के असर को शामिल करना चाहता है, ताकि बच्चों को 10 साल की उम्र से ही सेक्स के बारे में सकारात्मक जानकारी दी जा सके।
इसमें उन्हें असुरक्षित और विकृत सेक्स की पहचान करने और उससे बचने के बारे में बताया जाएगा। ऊची क्लास के बच्चों के लिए पाठ्यक्रम को और विस्तृत करने का भी सुझाव है।