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भारत के स्पेस मिशन से बौखलाया ब्रिटेन, सांसदों ने की आर्थिक मदद रोकने की मांग

Thu, 05 Jan 2017 06:33 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 05 Jan 2017 06:33 PM IST
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Britain MPs demand handouts are stopped as India reveals plans to explore space

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम ब्रिटेन को रास नहीं आ रहे हैं। ब्रिटेन के सांसदों और इंग्लिश मीडिया ने भारत खिलाफ प्रचार करना शुरू कर दिया है। वहां के अंग्रेजी समाचार पत्र डेलीमेल ने बहुत तल्ख लहजे में लिखा है कि ब्रिटेन भारत को जो आर्थिक मदद दे रहा है, उससे वह अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम चला रहा है। यही नहीं, भारत अतरिक्ष कार्यक्रमों के जरिए दुनिया के अन्य देशों से एक बड़ी रकम कमा रहा है। 

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डेलीमेल की खबर के मुताबिक भारत ने अगले महीने रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में एक साथ 103 उपग्रहों को छोड़ने का कार्यक्रम तय किया है। अगर भारत ऐसा करने में सफल होता है तो वह एकसाथ सबसे ज्यादा उपग्रह अंतरिक्ष की कक्षाओं में स्थापित करने वाला पहला देश बन जाएगा। वह रूस को भी पीछे छोड़ देगा, जिसके नाम एकसाथ 39 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने की उपलब्धि है। 
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ब्रिटेन में बाकायदा भारत के खिलाफ एक प्रचार अभियान चालाया जा रहा कि उनकी दी हुई रकम पर भारत अंतरिक्ष प्रोग्राम चला रहा है। खबर के मुताबिक 2015 में ब्रिटेन ने भारत को 185 मिलियन पाउंड यानी तकरीबन 15 अरब 46 करोड़ 29 लाख 77 हजार 784 रुपयों की आर्थिक मदद दी थी। यह भी कहा गया है कि भारत ने बृहस्पति और शुक्र ग्रह के लिए भी अंतरिक्ष प्रोग्राम बनाया है।

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...तो क्या रुक जाएगी ब्रिटेन से मिलने वाली आर्थिक मदद?

Britain MPs demand handouts are stopped as India reveals plans to explore space

ब्रिटेन की अंग्रेजी मीडिया में कहा गया है कि भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। भारत जो अंतरिक्ष प्रोग्राम करने जा रहा है उसमें भारत में बने केवल तीन उपग्रह हैं, जबकि 100 उपग्रह अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी के है। बावजूद इसके ब्रिटेन उसे आर्थिक मदद दे रहा है।

खबर में कहा गया है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान के एसोसिएट डायरेक्टर एम नागेश्वर राव ने कहा कि भारत अंतरिक्ष कार्यक्रमों में और विस्तार करने जा रहा है, जिसके तहत बृहस्पति और शुक्र ग्रहों में अंतरिक्ष खोज कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

सांसद एंड्रयू रोसिनडेल ने कहा कि अगर भारत इस तरह के रॉकेट प्रोग्राम चला रहा है तो उसे ब्रिटेन का आर्थिक सहायता देना समझ से परे है। 

सांसद पीटर बोन ने कहा कि वह नहीं चाहते है कि भारत को उसका स्टेटस बनाने के लिए ब्रिटेन अब एक पाई भी दे। 

बता दें कि जून 2016 में भारत ने एकसाथ 20 उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े थे। मई 2016 में भारत ने अपना पहला मिनी स्पेस शटल लॉन्च किया था।

खबर के मुताबिक ब्रिटेन दुनिया के उन 6 देशों में से है, जो कि अपने राष्ट्रीय आय का कुल 0.7 फीसदी हिस्सा विदेशों को आर्थिक मदद देने में खर्च करते हैं।

'भारत को दी जाने वाली मदद से 1 करोड़ 80 लाख लोगों को खाना खिलाया जा सकता है'

Britain MPs demand handouts are stopped as India reveals plans to explore space

डेली मेल ने खबर के जरिए भारत के खिलाफ अभियान शुरू किया है, जिसमें पाठकों से कहा गया है कि भारत को ब्रिटेन जो आर्थिक मदद देता है, उससे कई सामाजिक कल्याण की योजनाओं के लिए खर्च निकाला जा सकता है। खबर में कहा गया है कि भारत को दी जाने वाली आर्थिक मदद के बराबर के रकम से 1 करोड़ 80 लाख लोगों को गर्म खाना खिलाया जा सकता है। 

यह भी कहा गया कि इस रकम से बीमार और बूढ़े गरीब पेंशनर्स के खाने-पीने का इंतजाम किया जा सकता है। आगे कहा गया है कि सरकार के पास फंड की कमी होने की वजह से तकरीब 45 फीसदी काउंसिल्स ने 2010 से ही इस योजना में कमी कर दी है। पैसों की कमी के चलते 140 में से करीब 63 अथॉरिटीज ने यह योजना खत्म कर दी है।

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