रेशमी रूमाल और 93 साल का सुपर हीरो

बीबीसी हिन्दी Updated Tue, 30 Oct 2012 02:51 PM IST
bodybuilder 93 with winning muscles
तिरानवे साल के चार्ल्स यूगेस्टर अपने नेवी सूट और रेश्मी रुमाल में खूब जमते हैं। लेकिन किसी भी वक्त एक सुपर हीरो की तरह उछल-कूद के लिए तैयार रहते हैं।

भूतपर्व डेंटिस्ट यूगेस्टर ने महज छह साल पहले 87 वर्ष की उम्र में बॉडी बिल्डिंग करना शुरू किया और अपने आस-पास रखी फिटनेस मशीनों के बीच काफी सहज दिखते हैं।

बॉडी बिल्डिंग शुरू करने के पीछे की वजह यूगेस्टर बताते हैं, “मेरा मकसद बीच किनारे घूम रही 70 वर्षीय लड़कियों का ध्यान अपनी ओर खींचना था।” वजन बढ़ने से चिंतित यूगेस्टर एक बॉडी बिल्डिंग क्लब से जुड़े और एक पूर्व मिस्टर यूनिवर्स को अपना ट्रेनर बनाया।

'पचास पुश-अप'
यूगेस्टर हफ्ते में तीन या चार बार करीब दो घंटे तक कसरत करते हैं। और अब ट्रेनिंग असर दिखा रही है। हाल में हुई एक चैंपियनशिप में 45 सैंकड में 57 डिप्स, 61 चिन-अप्स, 50 पुश-अप और 48 एबडोमिनल क्रंचेस किए। वे कई बार अपने हुनर से पुरस्कार जीत चुके हैं।

तीस साल तक डेंटिस्ट के तौर पर काम करते हुए यूगेस्टर को कसरत का समय नहीं मिलता था। रिटायर होने के बाद उन्हें लगा कि वो मोटे हो रहे हैं। और तब उन्होंने अपने शरीर के बारे में कुछ कदम उठाने की ठानी।

वे कहते हैं, “मेरे ख़्याल से कोई भी ये कर सकता है। क्योंकि ये पुरानी कार के बदले नई कार खरीदने जैसा है। अगर आप अपनी कार का ख़्याल रखते हैं तो चिंता की कोई बात नहीं लेकिन अगर आप उस पर ध्यान नहीं देते तो आपको इसकी कीमत उठानी पड़ेगी। ” जोश से भरे डॉक्टर यूगेस्टर तुरंत कसरतों का उदाहरण देते हैं और साथ ही कुछ मशविरे भी।

बुढ़ापा?
ये पूछे जाने पर कि क्या वो कभी कसरत करने से ऊभते भी हैं, यूगेस्टर कहते हैं, “बिल्कुल नहीं। देखिए मांसपेशिया बनाने के लिए आपको जी-तोड़ मेहनत करनी पड़ती है। दरअसल आपको इतनी कड़ी मेहनत करनी होती है कि मांसपेशियां गठीली हो जाएं।”

लेकिन उम्र ढलने के बाद भी एक स्पोर्टिंग चैंपियन बनने की कोशिश क्या सही है? यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर स्टीव इलिफ चेतावनी देते हैं, “ये एक असाधारण मामला है। 90 साल की उम्र में ऐसा करने वाले बहुत ही कम लोग होंगे लेकिन अधिकतर के लिए ये सही नहीं है।”

प्रोफेसर स्टीव इलिफ कहते हैं कि हमें कसरत और शारिरिक गतिविधियों के बीच अंतर को समझना चाहिए। उनके अनुसार बूढ़े लोग पर्याप्त शारिरिक गतिविधि नहीं करते हैं और जिम में जी-तोड़ मेहनत से पहले उन्हें छोटी-मोटी कसरत करनी चाहिए।

उनके अनुसार दुकान तक पैदल जाना, कुत्ते को घुमाना और छोटे-मोटे काम खुद करना बुज़ुर्गों को तंदरुस्त रख सकता है। लेकिन डॉक्टर यूगेस्टर का कहना है कि छह साल की मेहनत ने उनकी ज‌िंदगी बदल दी है।

वे कहते हैं, “ मेरे ख्याल से बॉडीबिल्डिंग के लिए कोई भी उम्र ज्यादा नहीं होती। 93 साल की उम्र में भी मेरा शरीर लगातार बदल रहा है। बूढ़ा होना मेरे लिए एक ख़ुशनुमा दौर बन गया है।”

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