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काले धन वालों की अब खैर नहीं, अगले महीने भारत के साथ चर्चा करेगा स्विस पैनल
amarujala.com- Presented by: मोहित
Updated Sun, 27 Aug 2017 08:38 PM IST
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स्विट्जरलैंड का एक संसदीय पैनल कालेधन के खात्मे के लिए भारत और 40 अन्य देशों के साथ बैंकिंग सूचनाएं स्वत: साझा करने के जरूरी सुरक्षा उपायों को अपनाने पर अगले महीने विचार-विमर्श करेगा। इकोनॉमी एंड रॉयल्टीज ऑफ द नेशनल काउंसिल (सीईआर-एन) स्विस संसद का एक अहम पैनल है।
उसने 15 अगस्त को उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था जिसमें सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान यानी एईओआई के क्रियान्वयन को निलंबित करने की बात थी। स्विट्जरलैंड भारत समेत 41 देशों के साथ एईओआई को अपनाने पर सहमत हुआ है।
अब यह पैनल उन तौर-तरीकों की पड़ताल करेगा जिनसे सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान के तहत डाटा हासिल करने के लिए किसी देश को उसे संतुष्ट करने की जरूरत होगी। पैनल की पिछली बैठक के विवरण के मुताबिक, सीईआर-एन 11 सितंबर को होने वाली बैठक के दौरान अपनी पड़ताल जारी रखेगी। इनमें वो 41 एईओआईएस शामिल हैं जिन पर फेडरल काउंसिल ने सहमति जताई है। यह स्विस सरकार की फैसले लेने वाली सबसे बड़ी संस्था है।
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पढ़ें- कालेधन के खिलाफ PM मोदी की बड़ी जीत, स्विस बैंकों में जमा भारतीयों की रकम हुई आधी
डाटा दूसरे देश को दिया जाए अथवा नहीं, यह तय करने के लिए कैसे संबंधित संसदीय समिति की भूमिका को मजबूत बनाया जाए, संसदीय पैनल इस पर भी चर्चा करेगा। फेडरल काउंसिल ने 15 जून को भारत समेत 41 देशों के साथ एईओआईएस की शुरूआत से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। इस फैसले पर किसी तरह का जनमतसंग्रह नहीं होना है।
डाटा के आदान-प्रदान से पहले संबंधित देशों की ओर से डाटा सुरक्षा और गोपनीयता समेत जरूरी उपायों को सुनिश्चित करने के लिए काउंसिल ने संसद में एक रिपोर्ट पेश करने का प्रस्ताव किया है। इसका अनुपालन न होने की स्थिति में संभावित उपायों को भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
15 अगस्त की बैठक में खारिज हो गया था प्रस्ताव
कमेटी ने 15 अगस्त को हुई बैठक में 10 के मुकाबले 13 वोटों से एईओआई पर प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। वोटिंग के दौरान दो सदस्य अनुपस्थित रहे थे। प्रस्ताव में एईओआईएस को तब तक निलंबित रखने की बात कही गई थी जब तक फेडरल काउंसिल मापदंडों की उस सूची को पेश नहीं कर देती जिसके आधार पर यह तय किया जा सके कि किसी देश के साथ आदान-प्रदान करना है अथवा नहीं।
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उसने 15 अगस्त को उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था जिसमें सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान यानी एईओआई के क्रियान्वयन को निलंबित करने की बात थी। स्विट्जरलैंड भारत समेत 41 देशों के साथ एईओआई को अपनाने पर सहमत हुआ है।
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अब यह पैनल उन तौर-तरीकों की पड़ताल करेगा जिनसे सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान के तहत डाटा हासिल करने के लिए किसी देश को उसे संतुष्ट करने की जरूरत होगी। पैनल की पिछली बैठक के विवरण के मुताबिक, सीईआर-एन 11 सितंबर को होने वाली बैठक के दौरान अपनी पड़ताल जारी रखेगी। इनमें वो 41 एईओआईएस शामिल हैं जिन पर फेडरल काउंसिल ने सहमति जताई है। यह स्विस सरकार की फैसले लेने वाली सबसे बड़ी संस्था है।
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डाटा दूसरे देश को दिया जाए अथवा नहीं, यह तय करने के लिए कैसे संबंधित संसदीय समिति की भूमिका को मजबूत बनाया जाए, संसदीय पैनल इस पर भी चर्चा करेगा। फेडरल काउंसिल ने 15 जून को भारत समेत 41 देशों के साथ एईओआईएस की शुरूआत से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। इस फैसले पर किसी तरह का जनमतसंग्रह नहीं होना है।
डाटा के आदान-प्रदान से पहले संबंधित देशों की ओर से डाटा सुरक्षा और गोपनीयता समेत जरूरी उपायों को सुनिश्चित करने के लिए काउंसिल ने संसद में एक रिपोर्ट पेश करने का प्रस्ताव किया है। इसका अनुपालन न होने की स्थिति में संभावित उपायों को भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
15 अगस्त की बैठक में खारिज हो गया था प्रस्ताव
कमेटी ने 15 अगस्त को हुई बैठक में 10 के मुकाबले 13 वोटों से एईओआई पर प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। वोटिंग के दौरान दो सदस्य अनुपस्थित रहे थे। प्रस्ताव में एईओआईएस को तब तक निलंबित रखने की बात कही गई थी जब तक फेडरल काउंसिल मापदंडों की उस सूची को पेश नहीं कर देती जिसके आधार पर यह तय किया जा सके कि किसी देश के साथ आदान-प्रदान करना है अथवा नहीं।