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कच्ची उम्र में कहीं पॉर्नोग्राफ़ी का चस्का तो नहीं?

Tue, 21 May 2013 08:12 PM IST
Updated Tue, 21 May 2013 08:12 PM IST
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be aware children from pornography

ब्रिटेन में अध्यापकों की एक संस्था का कहना है कि जैसे ही बच्चों को इंटरनेट की सुविधा दी जाती है, उन्हें पॉर्न (अश्लील वीडियो, चित्रों) के खतरों के बारे में आगाह किया जाना चाहिए।

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नेशनल एसोसिएशन ऑफ़ हेड टीचर्स (एनएएचटी) ने इंटरनेट पर अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता पर चिंता जताई है।

संस्था के महासचिव रसेल हॉबी ने कहा कि जैसे ही बच्चे इंटरनेट पर सर्फिंग करना शुरू करें, उनसे इस विषय पर बातचीत शुरू कर देनी चाहिए।

लीड्स में मिलफ़ील्ड स्कूल के स्टीफ़ेन वॉटकिंस कहते हैं, "तीन साल के भी बच्चे भी कंप्यूटर का इस्तेमाल करते है। ऐसे में अगर वो कुछ ऐसा देखते है जो वहां नहीं होना चाहिए तो उन्हें ये जानकारी दी जानी चाहिए वो इस बारे में अपने बड़ों को आकर बताएं।''
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उन्होंने अपने साथ हुई एक घटना को याद करते हुए कहा कि एक लड़का नॉर्थ पोल पर कोई जानकारी इकट्ठा कर रहा था कि तो उसके सामने अश्लील चित्र आ गए और इसकी जानकारी उसने दी थी लेकिन वे नहीं समझ पाए कि क्या करना है।
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अश्लील सामग्री
वॉटकिंस का कहना था कई माता-पिता इस तरह की सामग्रियों की मोबाइल या स्मार्ट फोन पर आसानी से उपलब्धता को लेकर चिंतित थे, जो वे कंप्यूटर की तरह ब्लॉक भी नहीं कर सकते हैं।

उन्होंने ये भी कहा कि माता-पिता अपने बच्चों का छोटी सी उम्र में ही फ़ेसबुक अकाउंट खोल रहे है जिसके बाद उनके लिए अश्लील सामग्री देखने का दरवाजा खुल जाता है। 14 साल से कम उम्र के बच्चे फ़ेसबुक पर अपना अकांउट नहीं खोल सकते है।

वॉटकिंस के अनुसार 33 बच्चों में से 24 बच्चों के फ़ेसबुक अकाउंट थे और उनकी उम्र 10 से 11 साल के बीच थी। इस बारे में उन्होंने इन बच्चों के माता-पिता चेतावनी दी कि वे सोशल नेटवर्किंग के नियमों के खिलाफ जा रहे हैं और अपने बच्चों को खुद अश्लील सामग्री के संपर्क में ला रहे हैं।

एनएएचटी ने 1009 माता-पिता पर किए गए एक स्वतंत्र सर्वेक्षण में पाया कि 83 फीसदी ने स्वीकार किया कि बच्चों को जब यौन शिक्षा दी जाती है उस समय बच्चों को पॉर्नोग्राफी के खतरे के बारे में भी बताया जाना चाहिए।

दस में चार माता-पिता का कहना था कि ये जानकारी प्राइमरी शिक्षा के दौरान ही दी जानी चाहिए जबकि 51 प्रतिशत का मानना था कि किशोरावस्था में ही इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।

आंकड़े
एनएएचटी का कहना था कि उसके पास इस बात को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ें नहीं कि कितने बच्चे पॉर्नागाफ्री देख रहे है लेकिन इसका सही पता लगाने के लिए एजेंसियां मिल कर काम करेंगी और आंकड़े जुटाएंगी।

इंटरनेट के इस्तेमाल पर निगरानी रखने वाली एक संस्था बिटडिफेंडर ने 19000 माता-पिता से बात की। अपने इस सर्वेक्षण में उन्होंने पाया कि 1.16 फीसदी बच्चों ने छह साल की उम्र में पॉर्नोग्राफी के संपर्क में आ चुके थे।


एनएएचटी का कहना था कि ये मुद्दा शिक्षकों और प्रमुख के बीच परेशानी का सबब बना हुआ है। सर्वेक्षण के मुताबिक 83 फीसदी माता-पिता को स्कूल पर भरोसा है कि वे बच्चों की मदद कर पाएंगे तो वहीं 13 फीसदी का मानना था कि इस विषय को माता-पिता के भरोसे ही छोड़ देना चाहिए।

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