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4 देशों की सीमाएं पार कर जाता है दफ्तर
Updated Sun, 19 Jan 2014 07:37 PM IST
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आधुनिक जीवन ने इंसान को अनगिनत सुख-सुविधाएं दी हैं। तो कई मुश्किलें भी खड़ी कर दी हैं। इन्हीं में से एक है काम के लिए हर रोज लंबा सफर।
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मगर कुछ लोग इसे यूं तय करते हैं कि इसकी थकान और एकरसता उन पर हावी नहीं होती।
घर से दफ्तर के बीच नियमित सफर तय करने में जिन लोगों को तीन घंटे या जdयादा वक्त लगा। उन्होंने अपने अनुभव यहां रखे।
मैल्कम होव ब्रसेल्स में रहते हैं और पेरिस काम करने के लिए जाते हैं। उन्हें रोज 303 किलोमीटर का सफ़र तय करना होता है। इसमें क़रीब छह घंटे का समय लग जाता है।
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चार देशों से गुजरकर जाता हूं दफ्तर: मैल्कम होव
मैल्कम दफ्तर पहुंचने के लिए अपनी कार और कई बार ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं।
वह कहते हैं कि सात साल तक उन्होंने रोज ब्रसेल्स से पेरिस तक सफर किया। पेरिस जाने के लिए हफ्ते में चार दिन वो कार का इस्तेमाल करते थे। इस सफर में एक तरफ से उन्हें तीन घंटे लगते थे।
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यह सफ़र बेहद उबाऊ होता था। एकरसता से बचने के लिए हफ्ते में एक बार वो टीजीवी (फ्रांस की हाईस्पीड ट्रेन सेवा) से दफ़्तर जाते थे। इससे वो केवल डेढ़ घंटे में पहुंच जाते थे।
ट्रेन से जल्दी तो पहुंचते थे। मगर सफ़र का ख़र्च अधिक हो जाता था। इसलिए वो हफ़्ते में केवल एक बार ही ट्रेन से जाते थे।
अपने लंबे सफ़र के दौरान वो कार में कई कॉन्फ्रेंस कॉल कर लेते थे। उनका कहना है कि गाड़ी चलाते समय आप दिमाग़ी कसरत वाले गेम भी खेल सकते हैं।
आजकल वो 'फ्रेंच आल्प्स' में रहते हैं और लक्जमबर्ग काम करने जाते हैं।
दफ़्तर पहुंचने के लिए रास्ते में उन्हें चार देशों की सीमाओं से गुज़रना पड़ता है। फ्रांस से स्विट्जरलैंड। स्विट्जरलैंड से जर्मनी। जर्मनी से वापस फ्रांस और फ्रांस से लक्जमबर्ग । इन सबमें उन्हें छह घंटे लग जाते हैं।
गैरी ईगान का घर पोर्थकॉल में है और वे काम करने के लिए कार से रोज़ वेल्स से लंदन के पास वॉटफ़ोर्ड जाते हैं। रोज़ वे क़रीब 291 किलोमीटर दूरी तय कर लेते हैं। यह सफ़र छह घंटे का होता है।
वो कहते हैं कि वो वेल्स के पोर्थकॉल में रहते हैं। हफ्ते में कम से कम पांच दिन वॉटफ़ोर्ड जाना जरूरी होता है। उनका अलार्म रोज़ सुबह 3.30 बजे घनघना उठता है।
फिर रास्ते में क़रीब ढाई से तीन घंटे तक ड्राइव करते हुए दफ़्तर 6.30 बजे तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। वो एक बड़ी ग्राफ़िक कंपनी के प्रोडक्शन हेड हैं।
गैरी ईगान को रोज 12 घंटे काम करना पड़ता है। घर लौटते हैं तो रास्ते में सुबह के मुकाबले ट्रैफिक ज्यादा होता है। घर पहुंचने में तीन से साढ़े तीन घंटे लग जाते हैं।
रोज़ के इस आने-जाने में डीज़ल का खर्च 900 पाउंड हर महीने (यानी 91308.60 रुपए) आता है। कई बार किस्मत इतनी बुरी होती है कि उन्हें चार घंटे भी लग जाते हैं।
वो कहते हैं। "दफ़्तर से घर आते वक्त मैं रास्ते में अगले दिन के कार्यक्रम का ख़ाक़ा तैयार करता हूं। इसके अलावा मेरी कार में रेडियो है। हैंड-फ़्री कॉल की सुविधा है। मेरी कार मैसेज पढ़ सकती है और मैं ब्लूटूथ कनेक्शन के ज़रिए बात करते हुए वापस मैसेज भेज सकता हूं।
मेरा दफ्तर घर से नज़दीक होता। तो कितना अच्छा होता। मगर यहां वेल्स में काम के अवसर कम हैं। इसके अलावा मैं जो काम करता हूं। उसका क्षेत्र भी ज्यादा विस्तृत नहीं है।"
उनकी पत्नी दक्षिणी वेल्स पुलिस में काम करती हैं। उन पर भी काम का काफी दबाव रहता है।
साढ़े तीन घंटे में 291 किलोमीटर: गैरी ईगान
गैरी ईगान का कहना है कि उन दोनों ने कई बार घर से नज़दीक नौकरी करने के बारे में सोचा। लेकिन हर बार इसी नतीजे पर पहुंचे कि घर के पास वाटफ़ोर्ड में जो नौकरी मिलेगी। उससे उनके जीवनस्तर में काफ़ी गिरावट आ सकती है।
उनका कहना है कि इसके अलावा पड़ोसी उनका काफ़ी ख्याल रखते हैं। वो और उनकी पत्नी लंबा सफ़र तय करने की मजबूरी के बावजूद यहां खुद को बेहतर मानते हैं।
351 किलोमीटर रोज़ करता हूं तय: स्टुअर्ट विलियम्स
स्टुअर्ट विलियम्स लंकशायर के राम्सबॉटम से लंदन के अल्गेट तक का छह घंटे का सफर रोज़ करते हैं। राम्सबॉटम से अल्गेट तक वे रोज 351 किलोमीटर सफ़र तय करते हैं। वे कार। ट्रेन। और भूमिगत ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं।
वह बताते हैं कि वो आईटी प्रोजेक्ट मैनेजर हैं और रोज घर से दफ्तर जाते हैं।
विलियम्स कहते हैं। "मैं सुबह 4.45 बजे उठ जाता हूं। कार से स्टॉकपोर्ट रेलवे स्टेशन सुबह छह बजे पहुंचता हूं। वहां से अल्गेट के लिए भूमिगत ट्रेन पकड़ता हूं और दफ्तर नौ बजे तक पहुंच जाता हूं।
अगर दिन भर सब कुछ ठीक-ठाक रहा। तो मैं अस्टन से शाम छह बजे वापस लौटता हूं। तीन घंटे का सफ़र करने के बाद घर नौ बजे पहुंचता हूं।"
उन्होंने अनुमान लगाया है कि घर से दफ्तर और दफ्तर से घर आने-जाने में जितना ख़र्च आता है। वह लंदन में रहने के ख़र्चे के बराबर है। इसलिए उन्हें यहीं रहना ज्यादा बेहतर विकल्प लगता है।
पहले कार। फिर नाव। तब पैदल 80 किलोमीटर
क्रिस्टोफ़र काम पर जाने के लिए पोर्ट हैडलॉक से सिएटल। अमरीका तक का करीब 80 किलोमीटर का रोज़ सफ़र करते हैं।
पांच से छह घंटे का यह सफ़र कार। नौका और पैदल चलते हुए पूरा होता है।
क्रिस्टोफ़र कहते हैं। "मैं रोज़ ढाई से तीन घंटे का सफ़र करता हूं। वॉशिंगटन के एक छोटे इलाके। पोर्ट हैडलॉक में रहता हूं। मेरे साथ मेरी पत्नी और पांच बच्चे भी रहते हैं।
सिएटल जाने के लिए नाव से एक से डेढ़ घंटे की यात्रा करता हूं। फिर 30-40 मिनट पैदल चलता हूं। मैं अपनी शिफ्ट को इस तरह करता हूं ताकि रात के खाने पर घर पहुंच सकूं।"
उनका काम नेटवर्क सपोर्ट इंजीनियर का है। उनका मानना है कि जहां वो रहते हैं उस इलाके में इसका कोई भविष्य नहीं है।
वो घर के पास मौजूद चर्च में एक छोटे पादरी हैं। उनके माता-पिता। भाई बहन सब यहीं रहते हैं। चर्च से जुड़ी जिम्मेदारी। रहने का कम खर्च और परिवार वे कारण हैं। जो उन्हें यहां से हटने की इजाज़त नहीं देते।