यूरोप में नहीं थम रहा पाक विरोधी प्रदर्शन, अब ब्रिटेन में लगे नारे
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ब्रिटेन में रह रहे पाकिस्तानी मूल के दर्जनों बलोच और सिंधी लोगों ने सोमवार को यहां चीनी दूतावास के सामने चीन-पाकिस्तान के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। पाक-चीन के बीच 46 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से बनने वाले प्रस्तावित आर्थिक गलियारे का प्रदर्शनकारियों ने कड़ा विरोध किया। आक्रोशित लोगों ने गलियारे को मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाला बताया।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं जिनपर बलूचिस्तान को आजाद करो, बलूचिस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद आदि नारे लिखे हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने इस मुद्दे को उठाने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में भी नारे लगाए। गौरतलब है कि इसी तरह का विरोध प्रदर्शन पिछले हफ्ते जर्मनी के लेपिज्ग में किया गया था।
जर्मनी में प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार से मांग की थी कि वह बलूचिस्तान में प्रस्तावित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) योजना को तत्काल रद्द करे।
पाक पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप
यहां विरोध प्रदर्शन कर रहे बलोच स्टूडेंट्स एंड यूथ एसोसिएशन (बीएसवाईए) के एक सदस्य युवक ने कहा, ‘पाकिस्तान जबरन बलूचिस्तान पर सीपीईसी को थोपना चाहता है। हमें अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में दर्शाकर अपनी ही जमीन से विस्थापित किया जा रहा है।’ प्रदर्शनकारियों में कई अन्य ग्रुप के लोग भी शामिल थे जिनमें बलोच मानवाधिकार परिषद यूके (बीएचआरसी-यूके) और वर्ल्ड सिंधी कांग्रेस के कार्यकर्ता भी थे।
बीएचआरसी-यूके ने कहा, ‘पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने क्रूरता पूर्वक सीपीईसी पर अमल करते हुए बलूचिस्तान और सिंध में अपना अभियान तेज कर दिया है। मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन किया जा रहा है।’
दरअसल बलोच समुदय के लोगों को लगता है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक गलियारे की योजना से वह अपने ही प्रदेश में अल्पसंख्यक बन जाएंगे। इसी वजह से वह प्रस्तावित गलियारे का विरोध कर रहे हैं।