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खान जिसमें छिपा है ‘एलियन’ रहस्य

Sat, 10 Aug 2013 12:18 PM IST
Updated Sat, 10 Aug 2013 12:18 PM IST
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alien mystery is hidden in mine

दूसरे ग्रहों पर जीवन की तलाश विज्ञान के लिए बेहद चुनौती भरा काम रहा है। मगर अब इंग्लैंड के उत्तरपूर्व में मौजूद एक खान से इसकी कुंजी हासिल हो सकती है।

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शोधकर्ताओं को यकीन है कि बेहद गहराई में रह रहे छोटे-छोटे जीवों का अध्ययन करके वो धरती से परे जीवन की संभावनाओं का पता लगाने में कामयाब हो सकते हैं।

इस खान तक पहुंचने के लिए एक पिंजरे में बंद होकर धरती के भीतर करीब एक किलोमीटर अंदर सफर करने में बस कुछ मिनट लगते हैं।

जैसे ही हम टॉर्च लगी हैट पहने और आपातकालीन श्वास उपकरणों के साथ पिंजरे से बाहर निकलते हैं तो सामना होता है तेज गर्मी से। यह गर्मी खान के कुछ हिस्सों में 35 डिग्री तक पहुंच सकती है।
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नमक और पोटाश की खान
क्लीवलैंड पोटाश लिमिटेड की देखरेख में चल रही यह बोल्बी खान यूरोप की कुछ सबसे गहरी खानों में से एक है और यह उत्तरी यॉर्कशायर और क्लीवलैंड से रेडकार बॉर्डर तक फैली है।
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खानकर्मी अपनी शिफ्ट करने के लिए कई सुरंगों के जरिए यहां पहुंचते हैं। 1970 के दशक से इसकी जमीन से पोटाश और नमक निकाला जाता रहा है मगर इस खान की चट्टानों में कुछ और भी छिपा है।

हालांकि यूं तो धूल भरा रास्ता बिल्कुल खाली दिखता है लेकिन इसमें बेहद महीन जीव छिपे हैं।

एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में यूके सेंटर फॉर एस्ट्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर चार्ल्स कॉकेल कहते हैं, ‘हमें यहां जीवन के लिहाज से काफी मुश्किल परिस्थितियां देखने को मिली हैं। यहां काफी नमक है, अंधेरा है और इसका मतलब है कि ऊर्जा पाने के लिए सूरज की रोशनी भी नहीं। यहां बहुत कम पानी मिलेगा।’

‘ऐसे में इतनी गहराई के भीतर जीवन की मौजूदगी काफी मुश्किल है और हमारी रुचि यह जानने में है कि यहां जीवन कैसे बच सकता है और कैसे आगे बढ़ सकता है।’

बेहद सूक्ष्म जीव मौजूद
इस खान में आंखों से दिखाई न देने वाले बेहद सूक्ष्म जीव एक्स्ट्रीमोफाइल्स मिलते हैं। प्रोफेसर कॉकेल और उनकी टीम इनके नमूने लेने आई है ताकि इनके बारे में और जानकारी हासिल कर सके।

उनका कहना है कि इनके बारे में अध्ययन से हमें पता चलेगा कि क्या हमारे ब्रह्मांड में कहीं ऐसे हालात में जीवन मौजूद है।

‘अगर आप मंगल ग्रह को देखें तो आप उसकी सतह पर नमक पाएंगे यानी सोडियम क्लोराइड। अगर आप ब्रहस्पति के चंद्रमा यूरोपा को देखें तो वहां आप बर्फीली सतह के नीचे एक नमक का महासागर पाएंगे।’

‘पूरे ब्रह्मांड में नमक हर जगह मौजूद है। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि दूसरे ग्रहों के वातावरण में जीवन कैसे पैदा हुआ और कैसे बढ़ता है तो आपको सबसे पहले वहां के बेहद नमकीन पर्यावरण को समझना होगा।’

अपनी टॉर्च के सहारे रोशनी करते हुए हम खान में बनी एक प्रयोगशाला में पहुंचते हैं।

यह दूसरी खानों के मुक़ाबले पूरी तरह अलग है। हम एक बेहद रौशन कमरे में पहुंचते हैं जहां कई वैज्ञानिक उपकरण रखे हुए हैं।

खान में प्रयोगशाला
इस लैब को सालों से चलाया जा रहा है और यह असल में साइंस एंड टैक्नोलॉजी फैसिलिटीज काउंसिल और खनन कंपनी की साझेदारी का नतीजा है।

बॉल्बी अंडरग्राउंड लैबोरेट्री के डायरेक्टर डॉक्टर शान पालिंग कहते हैं, ‘किसी खान में इस तरह की प्रयोगशाला होना अजूबा ही है। यह खानकर्मियों के लिए भी अजूबे से कम नहीं। उन्हें यकीन नहीं होता कि हमने यहां प्रयोगशाला बना रखी है।’

हाल तक यहां चलने वाले शोध कार्य का केंद्र बिंदु डार्क मैटर की तलाश रहा है। डार्क मैटर यानी वो कण जिनसे ब्रह्मांड का चौथाई हिस्सा बना है। हालांकि अब यह टीम अपने शोध के दायरे को बढ़ा रही है।

सुलझेंगे ब्रह्मांड के सवाल
डॉ. पालिंग के मुताबिक, ‘जिस वजह से हम यहां आए हैं उसकी वजह यहां का बेहद शांत वातावरण है। यहां प्राकृतिक विकिरण का बिल्कुल खतरा नहीं जो धरती की सतह पर मिलता है।’

डॉ. पालिंग कहते हैं, ‘मगर बहुत से ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो आप इस वातावरण में कर सकते हैं। हमारा एक प्रोजेक्ट वातावरण पर शोध के संबंध में है। कुछ रेडियो डेटिंग और कार्बन कैप्चर पर भी काम चल रहा है और अब एस्ट्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला शुरू की गई है।’

वह बताते हैं, ‘इसमें कोई विरोधाभास नहीं, आप अक्सर ऐसे सवालों से दो-चार होते हैं कि ब्रह्मंड किस चीज से बना है और क्या दूसरे ग्रहों पर जीवन है या वहां जीवन किस तरह का है। अभी तक हम इसका जमीन के भीतर अध्ययन कर रहे हैं पर यही असल में हो रहा है। इस तरह के वातावरण में ही ऐसा शोध कर पाना मुमकिन है।’

अभी शोध शुरुआती दौर में है पर जेनेटिक जांच से पता चला है कि इस खान में कुछ जीवों की अजीबोगरीब प्रजातियां मौजूद हैं। उम्मीद की जा रही है कि एक दिन हम यहां काफी विकसित जीवन का पता लगा पाएंगे। इस बात की संभावना ज्यादा है कि इस खान में मौजूद सामान्य से जीव ही शायद एलियन प्रजातियां साबित हों।


प्रोफेसर चार्ल्स कॉकेल कहते हैं, ‘विज्ञान के सामने सबसे रोचक प्रश्न यही है कि क्या ब्रह्मांड में कहीं जीवन मौजूद है। इसलिए बॉल्बी में चल रही इसी जीवन की तलाश कोई आशावाद नहीं है। इसके पीछे वैज्ञानिक आधार है कि क्या ब्रह्मांड में धरती से परे कहीं जीवन है और अगर है तो क्या वह पृथ्वी जैसा है। अगर ऐसा नहीं तो ऐसा क्यों है।’

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