{"_id":"58717c7e4f1c1b1c571588e2","slug":"a-third-landed-drugs-in-the-market-are-without-improving","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना किसी सुधार के बाजार में उतरीं एक-तिहाई दवाएं","category":{"title":"Europe","title_hn":"यूरोप","slug":"europe"}}
बिना किसी सुधार के बाजार में उतरीं एक-तिहाई दवाएं
एजेंसी/ म्यूनिख
Updated Sun, 08 Jan 2017 05:10 AM IST
विज्ञापन
दवाइयां
- फोटो : Demo Pic
दुनिया भर में नई शोध और इलाज के तौर-तरीकों के लिहाज से दवाओं को अपडेट करती हैं और बाजार में नई दवा उतारती हैं। ऐसा इसलिए ताकि मरीज को रोग प्रतिरोधक क्षमता, जीन या भौगोलिक अथवा अन्य कारणों से दवाओं में सकारात्मक बदलाव किया जा सके। लेकिन नए अध्ययन में पता चला है कि बाजार में आने वाली एक तिहाई दवाएं बिना किसी सुधार के वैसी ही होती हैं, जैसी उनसे पहले वाली थीं।
विज्ञापन
जर्मन पब्लिक हेल्थ इंश्योरर्स एसोसिएशन ने एक अध्ययन कराया तो पता चला कि इस माह बाजार में जो नई 129 दवाएं आई हैं उनमें से 44 (करीब एक तिहाई) ही ऐसी थीं जिनमें नए या बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए थे। 44 दवाएं ऐसी थीं जो कुछ मरीजों पर तो असर कर पाईं लेकिन ज्यादातर के लिए कुछ नया नहीं कर पाईं। इनमें से एक तिहाई दवाएं ऐसी थीं कि उनमें कुछ भी सुधार नहीं किया गया।
विज्ञापन
यूरोप व अमेरिका के कई अखबारों ने यह रिपोर्ट सनसनीखेज हेडलाइंस के साथ छापी है कि एक तिहाई नई दवाएं बेकार हैं। हालांकि इन्हें बेकार कहने की जगह अनावश्यक कहना सही होगा। फेडरल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकेशन एंड मेडिकल प्रॉडक्ट्स के प्रवक्ता माइक पोमर ने बताया कि इस पूरी बहस के केंद्र में दवाओं का असर नहीं है बल्कि यह बात है कि जो नई दवाएं आ रही हैं वे कुछ अतिरिक्त फायदे नहीं पहुंचा रही हैं।
विज्ञापन