Israel Hamas War: जयशंकर और इस्राइली समकक्ष की बात, आतंक से लड़ाई पर साथ, फलस्तीन में 'टू-स्टेट' समाधान पर जोर
इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष के बाद पैदा हुए नाजुक हालात पर भारत भी नजरें रख रहा है। युद्धग्रस्त गाजा में मानवीय सहायता भेजी गई है। इसी बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने इस्राइली समकक्ष एली कोहेन से बात की है। कोहेन ने समर्थन के लिए आभार प्रकट किया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फलस्तीन, गाजा की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर बात
जयशंकर ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, "आज दोपहर इस्राइल के विदेश मंत्री एली कोहेन से बात की।" विदेश मंत्री ने बताया कि कोहेन के साथ बातचीत के दौरान इस्राइल मौजूदा हालात का आकलन कैसे करता है, इस पर सूचनाएं साझा की गईं। दोनों के बीच चर्चा फलस्तीन मुद्दा, गाजा में मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता और शांति सुनिश्चित करने वाले समाधान खोजने के महत्व पर केंद्रित रही।
युद्धग्रस्त इलाकों में नागरिकों की सुरक्षा पर जोर
आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को दोहराते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने इस खतरे का मुकाबला करने के लिए देश की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि युद्धग्रस्त इलाकों में नागरिकों का जीवन सुरक्षित रहे।
इटली दौरे पर आया जयशंकर का अहम बयान
इस्राइली विदेश मंत्री के साथ बातचीत के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने दशकों पुराने इस्राइल-फलस्तीन संघर्ष और दो-देश समाधान पर भारत के दृढ़ समर्थन को भी व्यक्त किया। बता दें कि विदेश मंत्री शुक्रवार को इटली की राजधानी रोम के दौरे पर थे। सीनेट के विदेश मामलों और रक्षा आयोग के संयुक्त सचिव सत्र में जयशंकर ने बातचीत के माध्यम से संघर्ष को हल करने के महत्व पर प्रकाश डाला।
सीधी बातचीत दोबारा शुरू करने की वकालत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, "भारत ने हमेशा इस्राइल के साथ शांति से सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर रहने वाले फलस्तीन के एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य देश की स्थापना के लिए सीधी बातचीत फिर से शुरू करने की वकालत की है।"
इस्राइली विदेश मंत्री ने जयशंकर का आभार प्रकट किया
विदेश मंत्री जयशंकर के बयान के बाद इस्राइली विदेश मंत्री ने आतंकवाद से लड़ाई में समर्थन के लिए आभार प्रकट किया। एली कोहेन ने एक्स पर जयशंकर को टैग कर लिखा कि इस्राइल का युद्ध संपूर्ण लोकतांत्रिक विश्व के घृणित आतंकवादी संगठन- हमास के खिलाफ है। उन्होंने हमास को इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) से भी बदतर है।
Thank you @DrSJaishankar for your support of Israel and of its war against the Hamas terrorist organization.
— אלי כהן | Eli Cohen (@elicoh1) November 4, 2023
Our war is the entire democratic world's war against a despicable terrorist organization that is worst than ISIS. https://t.co/F0QmEoSdWD
संघर्ष और आतंकवाद के माध्यम से कोई समाधान नहीं
मौजूदा पश्चिम एशियाई संकट के लिए दो-देश समाधान को भारत के समर्थन की पुष्टि करते हुए, विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि किसी समाधान तक पहुंचने के लिए बातचीत बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, संघर्ष और आतंकवाद के माध्यम से कोई समाधान नहीं खोजा जा सकता। वर्तमान स्थिति को देखते हुए...भारत का मानना है कि मानवीय कानून का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी भी जटिल स्थिति में, सही संतुलन न बनाना बुद्धिमानी नहीं है।
इस्राइल के साथ खड़ा है भारत, हमास का कृत्य जघन्य आतंकी वारदात
बता दें कि भारत ने हमेशा फलस्तीन को एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य देश के तौर पर मान्यता देने की वकालत की है। भारत का मानना है कि इस्राइल के पड़ोस में होने के कारण फलस्तीन को शांति से रहना चाहिए। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने करीब एक महीने पहले हुए हमलों के बाद इसे आतंकवादी हमला बताया था। पीएम मोदी भारत की तरफ से आतंकी वारदात की निंदा करने के साथ-साथ इस्राइल के साथ एकजुटता व्यक्त करने वाले चुनिंदा वैश्विक नेताओं में से एक थे।
हिंसक संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में अभूतपूर्व मानवीय संकट
गौरतलब है कि 7 अक्तूबर को हमास के रॉकेट हमलों के बाद से गाजा में इस्राइल के हवाई और जमीनी हमले में अब तक कम से कम 9,488 फलस्तीनी नागरिकों के मारे जाने की खबर है। इस्राइल डिफेंस फोर्स और हमास के हिंसक संघर्ष के कारण पूरा क्षेत्र मानवीय संकट से जूझ रहा है। आम नागरिकों तक पहुंच रही सहायता भी नाकाफी साबित हो रही है। मानवाधिकार संगठनों ने अधिक से अधिक सहायता का आग्रह किया है।