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डूरंड लाइन पर बाड़: तालिबान से बढ़ते टकराव से बढ़ेंगी पाकिस्तान की अंदरूनी चुनौतियां भी

Fri, 07 Jan 2022 01:48 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 07 Jan 2022 01:48 PM IST
सार

तालिबान को एतराज इस बात पर है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सरहद को बिना तय किए पाकिस्तान बाड़ लगा कर अपना दावा मजबूत कर रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा को डूरंड लाइन कहा जाता है। लेकिन तालिबान इस सीमा रेखा को मान्यता नहीं देता...

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Durand Line Fencing: tensions could rise with Taliban in Afghanistan could further exacerbate internal security challenges for Pakistan
डूरंड लाइन पर पाकिस्तान की फेंसिंग - फोटो : Agency

विस्तार

अफगानिस्तान के तालिबान शासन के साथ बढ़ रहे तनाव से पाकिस्तान के लिए सुरक्षा संबंधी अंदरूनी चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। इस घटनाक्रम पर नजर रख रहे पर्यवेक्षकों ने ये आशंका जताई है। उनके मुताबिक अफगान तालिबान का दबाव हटने के बाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पाकिस्तान के अंदर अपने हमले तेज कर सकता है।

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अफगानिस्तान से लगी सीमा पर बाड़ लगाने के मसले पर पाकिस्तान की सेना और अफगान तालिबान के बीच टकराव पैदा हो गया है, इस बात की नए सिरे से पुष्टि हुई है। पाकिस्तान की सेना ने इस मुद्दे पर तल्ख रुख अपनाते हुए एलान किया है कि बाड़ लगाने का काम जारी रहेगा। पाकिस्तान की सेना के प्रमुख जन संपर्क अधिकारी ने दो टूक ये बात कही। इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने कहा- ‘इस बाड़ को लगाने के लिए हमारे शहीद जवानों ने अपने खूब बहाए हैं।’

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तालिबान ने रोका बाड़ लगाने का काम

पिछले महीने अफगानिस्तान के नांगरहार प्रांत में पाकिस्तान से लगी सीमा पर तालिबान लड़ाकों ने बाड़ लगाने का काम जबरन रोक दिया था। उन्होंने बाड़ लगाने में काम आने वाली सामग्रियां जब्त कर ली थीं। साथ ही पाकिस्तान की सेना को चेताया था कि आगे वह बाड़ लगाने का काम ना करे। जबकि मेजर जनरल इफ्तिखार ने कहा कि बाड़ सीमा के दोनों तरफ के लोगों की रक्षा के लिए लगाई जा रही है। साथ ही इसका मकसद व्यापार को नियमित करना है। उन्होंने कहा- ‘पाक-अफगान सीमा पर सुरक्षा, सीमा के आर-पार आने-जाने, और व्यापार को रेगुलेट करने के लिए बाड़ की जरूरत है। इसका मकसद लोगों को बांटना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित करना है।’

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तालिबान को एतराज इस बात पर है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सरहद को बिना तय किए पाकिस्तान बाड़ लगा कर अपना दावा मजबूत कर रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा को डूरंड लाइन कहा जाता है। लेकिन तालिबान इस सीमा रेखा को मान्यता नहीं देता। इफ्तिखार ने बताया कि बाड़ लगाने का काम 94 फीसदी पूरा हो चुका है। लेकिन उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर कुछ व्यावहारिक मसले हैं, जिन्हें हल किया जा रहा है।

टीटीपी ने तोड़ा समझौता

पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब गौर करने की बात टीटीपी का रुख है। टीटीपी ने बीते नवंबर में अफगान तालिबान के दबाव में पाकिस्तान सरकार के साथ लड़ाई रोकने का समझौता किया था। समझौते की अवधि पूरी होने के बाद पिछले नौ दिसंबर को उसने ये समझौता तोड़ दिया। उसके बाद से उसने पाकिस्तान के अंदर कई हमले किए हैं। समझा जाता है कि पाकिस्तान से अफगान तालिबान के रिश्तों में आती कड़वाहट से टीटीपी का मनोबल और बढ़ेगा।



बताया जाता है कि टीटीपी नवंबर में भी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं था। उसका मकसद पाकिस्तान में शरिया कानून पर आधारित इस्लामी व्यवस्था लागू करना है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक टीटीपी के नेता जानते हैं कि यह काम बातचीत से नहीं हो सकता। टीटीपी से रिश्तों के बारे में भी मेजर जनरल इफ्तिखार से सवाल पूछा गया। इस पर उन्हंने कहा- ‘टीटीपी के साथ युद्धविराम नौ दिसंबर को खत्म हो गया। युद्धविराम का समझौता इस हिंसक संगठन के साथ विश्वास कायम करने के लिए वर्तमान अफगान सरकार के अनुरोध पर किया गया था।’ उन्होंने कहा कि वार्ता जारी रखने के लिए जिन शर्तों को पूरा करने की जरूरत थी, वह तालिबान ने नहीं किया।

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