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अब तो कमर ही टूट गई है म्यांमार के प्राइवेट बैंकों की, तख्तापलट ने बढ़ाया एनपीए का बोझ

Thu, 03 Jun 2021 03:52 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 03 Jun 2021 03:52 PM IST
सार

सैनिक तख्ता पलट के बाद क्यात के मूल्य में भारी गिरावट आई है। जनवरी के अंत में एक अमेरिकी डॉलर का मूल्य लगभग 1,350 क्यात के बराबर था। अब ये मूल्य 1600 क्यात तक पहुंच चुका है...

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Due to political instability in the Myanmar people are withdrawing their deposits from Banks
म्यांमार में विरोध - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

म्यांमार में प्राइवेट बैंकों की मुसीबत बढ़ती जा रही है। देश में बढ़ रही राजनीतिक अस्थिरता के कारण लोगों में अपनी जमा रकम निकालने की होड़ बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों में बैंकों के एटीएम के सामने लंबी कतारें देखी गई हैं। इसे देखते हुए कुछ बैंकों ने एक दिन में 25 लोगों को ही रुपया निकालने की सीमा लगा दी है। इन बैंकों के एटीएम से पैसा निकालने के लिए लोगों को टोकन लेना पड़ रहा है। हांगकांग की वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कई जगहों पर टोकन लेने के लिए सुबह चार बजे से लोगों की कतार देखी गई है।

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इस रिपोर्ट के मुताबिक कुछ बैंकों ने तो लोगों को पैसा निकालने से रोकने के लिए निकासी पर शुल्क लेना भी शुरू कर दिया है। पिछले एक फरवरी को सैनिक तख्ता पलट के बाद भी रकम निकालने की होड़ लगी थी। लेकिन हाल में अर्थव्यवस्था के सिकुड़ने की खबर आने के बाद लोगों में अपने धन को लेकर अविश्वास और गहरा गया है। जानकारों के मुताबिक पश्चिमी देशों ने सैनिक तख्ता पलट के बाद म्यांमार जो प्रतिबंध लगाए, उनका असर अब साफ दिख रहा है। उनकी वजह से देश में आर्थिक गतिविधियां सुस्त हो गई हैं।
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सैनिक शासन लागू होने के बाद कई बैंकों ने भी लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों का साथ देने के लिए काम रोक दिया था। उसका असर आम कामकाज, अंतरराष्ट्रीय भुगतान और दूसरी वित्तीय सेवाओं पर पड़ा था। तब सैनिक शासकों ने तमाम बैंकों को अपनी शाखाएं खोलने और सामान्य ढंग से काम करने पर मजबूर किया। मार्च में लीक हुए पत्र के मुताबिक तब म्यांमार के सरकारी सेंट्रल बैंक ऑफ म्यांमार (सीबीएम) ने धमकी दी थी कि अगर बैंकों ने अपना कामकाज सामान्य ढंग से नहीं चलाया, तो उनमें जमा रकम को सरकारी संस्थानों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
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मार्च के बाद से म्यांमार के बड़े बैंकों- केबीजेड बैंक, एवाईए बैंक, सीबी बैंक और योमा बैंक की शाखाएं सामान्य ढंग से चलती रही हैं। लेकिन हालिया रिपोर्टों के मुताबिक लोगों ने उनमें जितना पैसा जमा किया है, उसकी तुलना में बहुत अधिक रकम उन्होंने निकाल ली है। मई में केबीजेड बैंक ने बताया कि उसके एटीएम से हर रोज दो लाख क्यात निकाले जा रहे हैं। उधर सेना के स्वामित्व वाले इनवा बैंक ने हर एक लाख क्यात की निकासी पर आठ सौ क्यात की फीस लगा दी।

कुछ विश्लेषकों ने कहा है कि रकम निकासी पर लगाई पाबंदियों का एक कारण नोटों की कमी हो सकती है। म्यांमार में मुद्रा की छपाई के लिए कच्चा माल जर्मनी की कंपनी गिसेके डेवरिएंट सप्लाई करती है। यूरोपियन यूनियन के प्रतिबंधों के कारण उसने बीते अप्रैल में इन सामग्रियों की आपूर्ति पर रोक लगा दी। 1972 के बाद से यही कंपनी क्यात की छपाई के लिए सामग्री उपलब्ध कराती रही है।  

सैनिक तख्ता पलट के बाद क्यात के मूल्य में भारी गिरावट आई है। जनवरी के अंत में एक अमेरिकी डॉलर का मूल्य लगभग 1,350 क्यात के बराबर था। अब ये मूल्य 1600 क्यात तक पहुंच चुका है। बताया जाता है कि इसकी वजह म्यांमार में डॉलर की बढ़ी मांग है। वहां अपनी मुद्रा में घटे विश्वास के कारण लोग डॉलर की जमाखोरी कर रहे हैं।


म्यांमार के प्राइवेट बैंकों की हालत सैनिक तख्ता पलट के पहले भी बेहतर नहीं थी। उन पर एनपीए का बोझ काफी बढ़ चुका था। लेकिन सैनिक तख्ता पलट के बाद बने हालात ने उनकी कमर तोड़ दी है। देश के एक बड़े बैंक में मैनेजर मा पर्ल ने एशिया टाइम्स से कहा- ‘मेरी जितनी जानकारी है, सीबीएम प्राइवेट बैंकों को पर्याप्त नोटों की सप्लाई नहीं कर रहा है, क्योंकि उसके पास भी नकदी नहीं है। इसके अलावा प्राइवेंट बैंकों को ब्रांच खोलने, रकम जमा करने, या निकासी के बारे में सीबीएम से बार-बार निर्देश मिलते हैं। इससे ग्राहकों में नाराजगी पैदा हुई है और उनका निशाना प्राइवेट बैंक बन जाते हैँ।’

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