ड्रैगन की घेराबंदी : दक्षिण चीन सागर में भारत समेत चार देशों ने तैनात किए लड़ाकू जहाज, मकसद पर कयास

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, सिंगापुर Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 14 Aug 2021 09:20 PM IST

सार

क्या भारत समेत चार देशों ने चीन की घेराबंदी की है? क्या ये देश विश्व व्यवस्था के प्रति अपनी जिम्मेदारी का प्रदर्शन कर रहे हैं? अमेरिका की इस पर क्या है राय? जानिए क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ
 
South china sea
South china sea
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, और भारत ने दक्षिण चीन सागर में अपने लड़ाकू जहाज तैनात किए हैं। जानकारों का कहना है कि इसके जरिए इन देशों ने इस सागर पर चीन के दावों का जवाब दिया है। उन्होंने इसके जरिए मौजूदा ‘अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था’ की रक्षा करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। उधर अमेरिकी विश्लेषकों ने कहा है कि ये तैनाती चीन के प्रभाव को सीमित करने की अमेरिकी कोशिश के प्रति इन देशों के एकजुट समर्थन का प्रतीक है।
विज्ञापन


हालांकि क्षेत्र के कई विश्लेषकों ने कहा है कि इस अभियान को लेकर कई भ्रम कायम हैं। उन्होंने इस दावे पर सवाल उठाया है कि लड़ाकू जहाजों की ये तैनाती मुक्त नौवहन के प्रति चीन से पैदा हुई चुनौती का जवाब है। इन विश्लेषकों का कहना है कि चीन ने कभी यह नहीं कहा कि वह सभी तरह के मुक्त नौवहन के खिलाफ है। चीन को आपत्ति कारोबारी नौवहन से नहीं, बल्कि इस इलाके में सैन्य तैनाती से रही है।


ऑस्ट्रेलिया, जापान और फिलीपींस शामिल नहीं हुए
विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिकी दबाव के बावजूद उसके कई सहयोगी देशों ने इस तैनाती में भाग लेने से इनकार कर दिया। इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान और फिलीपींस शामिल हैं। इन देशों ने कहा है कि चीन ने व्यापारिक परिवहन रोकने या उनकी सुरक्षा के लिए कोई धमकी नहीं दी है।

वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपे एक विश्लेषण में कहा गया है कि अब तक सिर्फ ब्रिटेन ऐसा देश है, जो बिना शर्त अमेरिकी योजना का हिस्सा बना है। जहां तक जर्मनी का सवाल है, तो उसका रुख मिलाजुला है। उसने अपने जहाज की तैनाती के साथ ही चीन को यह आश्वासन दिया कि जर्मनी किसी भड़काऊ या टकराव वाली कार्रवाई में शामिल नहीं होगा। उसने ये भरोसा भी दिया कि उसका जहाज पारंपरिक समुद्री मार्गों में ही रहेगा। यह ताइवान जलडमरूमध्य में प्रवेश नहीं करेगा। विश्लेषकों के मुताबिक फ्रांस का रुख भी जर्मनी से मिलता जुलता है।

भारत ने नौसैनिक टास्क फोर्स को भेजा
भारत ने अपना नौसैनिक टास्क फोर्स को भेजा है, लेकिन साथ ही कहा है कि उसका मकसद वहां कामकाजी पहुंच को सुनिश्चित करना, शांति पूर्ण उपस्थिति, और दोस्त देशों के साथ एकजुटता जताना है, ताकि समुद्री क्षेत्र में अच्छी व्यवस्था कायम रहे। जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत किसी गुट में शामिल ना होने की नीति पर चलता रहा है। ऐसे में वह किसी सैन्य पहल में भाग लेगा, इसकी संभावना कम है।

चीन ने तैनात की हैं परमाणु पनडुब्बियां
जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि चीन दक्षिण चीन सागर को अपना प्रभाव क्षेत्र मानता है। इस क्षेत्र को वह अपना राष्ट्रीय सुरक्षा कवच बताता है। उसने यहां परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियां तैनात कर रखी हैं। चीन का दावा है कि उसने ये तैनाती हमला होने पर बचाव के लिए की हैं।

अमेरिका भी बढ़ा रहा मौजूदगी
उधर अमेरिका लगातार इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। इससे इस इलाके में तनाव बढ़ा है। जब ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और भारत ने अपने जहाज यहां तैनात किए, तो उसे उसी पृष्ठभूमि में देखा गया। लेकिन इस तैनाती से यहां का शक्ति संतुलन कितना बदला है, इस सवाल पर इस क्षेत्र के रणनीतिक जानकार सहमत नहीं है। उनमें कुछ से चीन के लिए स्पष्ट संदेश मानते हैं, जबकि कुछ दूसरे विश्लेषकों ने कहा है कि इस बारे में स्पष्टता का अभी अभाव है। 

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00