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ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को दूसरी बार मिली मंजूरी, बने ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति
Thu, 14 Jan 2021 06:59 AM IST
Amit Mandal
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 14 Jan 2021 06:59 AM IST
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Donald trump
- फोटो : PTI
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अमेरिकी संसद भवन (कैपिटल) पर भीड़ को विद्रोह के लिए उकसाने के आरोप में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निचले सदन (प्रतिनिधि सभा) में 197 के मुकाबले 232 मतों से महाभियोग प्रस्ताव को पारित कर दिया गया। इस प्रस्ताव को दस रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों का समर्थन भी मिला। राष्ट्रपति पर आरोप है कि उन्होंने छह जनवरी को एक रैली के दौरान अपने भाषण से भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया था।
इससे पहले दिसंबर-2019 में भी ट्रंप द्वारा यूक्रेन से बाइडन की जांच का कहकर कानून तोड़ने के आरोप में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लाया गया था जिसमें सीनेट में रिपब्लिकनों का बहुमत होने के कारण उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। उस वक्त एक भी रिपब्लिकन ने ट्रंप के खिलाफ मतदान नहीं किया था। प्रतिनिधि सभा में चली कार्यवाही के दौरान ट्रंप पर चुनाव नतीजों को पलटने की कोशिश में हिंसा भड़काने का आरोप लगा और उन्हें फिर से सार्वजनिक पद संभालने से अयोग्य घोषित करते हुए पद से हटाने की अपील की गई। निचले सदन की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने गत सप्ताह के घटनाक्रम को इतिहास में काला अध्याय घोषित करते हुए सहयोगियों से सांविधानिक उपाय अपनाने को प्रेरित किया। इस दौरान निचले सदन में कई घंटे तक गरमागरम बहस होती रही।
सीनेट में ट्रंप को हटाने के लिए 17 रिपब्लिकनों का टूटना जरूरी
अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के निचले सदन में डेमोक्रेटों का बहुमत है इसलिए यहां महाभियोग प्रस्ताव का पारित होना महज एक औपचारिकता थी, लेकिन इसके बाद ममला सीनेट (ऊपरी सदन) में जाएगा जहां अपराध तय करने के लिए ट्रायल चलेगा और ट्रंप को दोषी ठहराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। यानी कम से कम 17 रिपब्लिकन सदस्यों को इसके पक्ष में मत डालने होंगे। दूसरी तरफ, 20 रिपब्लिकन सीनेटर ऐसे हैं जो राष्ट्रपति को दोषी ठहराने के लिए तैयार हैं। माना जा रहा है कि सीनेट में 19 जनवरी से पहले इस मामले पर शायद ही कोई कार्यवाही हो पाए। सीनेट इस ट्रायल में इस बात पर भी वोट करवा सकता है कि ट्रंप फिर कभी राष्ट्रपति बनने की रेस में शामिल ना हो पाएं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे 2024 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रचार करेंगे।
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प्रस्ताव पास होने के बाद नैंसी बोलीं, कानून से ऊपर कोई नहीं
निचले सदन में ट्रंप के खिलाफ 13 माह में दूसरी बार महाभियोग प्रस्ताव पारित होने के बाद स्पीकर नैंसी पेलोसी ने कहा, द्विदलीय तरीके से हुई इस कार्यवाही ने साबित कर दिया है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। अमेरिका का राष्ट्रपति भी नहीं। उन्होंने बहस के दौरान ट्रंप को देश के लिए खतरा बताते हुए कहा, हम जानते हैं उन्होंने देश के खिलाफ विद्रोह के लिए भीड़ को उकसाया। उन्हें इसके लिए हटना ही चाहिए। पेलोसी ने कहा, मेरा मानना है कि राष्ट्रपति को सीनेट की ओर से दोषी ठहराया जाना चाहिए। यह संवैधानिक उपाय उस शख्स (ट्रंप) से हमारे गणतंत्र को सुरक्षित करेगा, जो लगातार इसे नुकसान पहुंचा रहा है।
बचाव में उतरे रिपब्लिकन सांसद
महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान के दौरान कई रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेटों से राष्ट्रीय एकता के लिए इस प्रस्ताव को वापस लेने की अपील भी की। सीनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैक्कॉनेल ने कहा कि राष्ट्रपति के दफ्तर छोड़ने से पहले अंतिम फैसला नहीं हो सकेगा। जिम जॉर्डन ने डेमोक्रेटों पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगाते हुए इस कार्यवाही की आलोचना की। सांसद केविन मैक्कार्थी ने भीड़ को उकसाने में ट्रंप को जिम्मेदार मानते हुए कहा कि इतने कम समय में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लाना एक गलती होगी। रिपब्लिकन सांसद डायना हैर्शबार्गर ने भी ट्रंप का बचाव किया।
10 रिपब्लिक सांसदों ने भी ट्रंप के खिलाफ मतदान किया। ये सांसद हैं-
ट्रंप का बयान
वहीं, ट्रंप ने कहा कि भीड़ की हिंसा हर उस चीज के खिलाफ है जिसमें मैं भरोसा करता हूं। मेरा सच्चा समर्थक कभी भी राजनीतिक हिंसा नहीं करेगा, कानूनों की धज्जियां नहीं उड़ाएगा। अगर आप ऐसा कुछ कर रहे हैं तो हमारे आंदोलन का समर्थन नहीं कर रहे हैं, आप हमारे देश पर हमला कर रहे हैं।
जबरदस्त गहमागहमी रही
इससे पहले अमेरिकी संसद में कैपिटल हमले के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराते हुए महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान के दिन जबरदस्त गहमागहमी देखी गई। इससे ठीक पहले सांसदों ने एक प्रस्ताव पास किया जिसमें उपराष्ट्रपति माइक पेंस को 25वें संशोधन के तहत सांविधानिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए ट्रंप की शक्तियां छीनने के लिए कहा गया। प्रस्ताव को 205 के मुकाबले 223 मत प्राप्त हुए।
उपराष्ट्रपति को ट्रंप की शक्तियां छीनने वाला यह प्रस्ताव मेरीलैंड की सांसद जैमी रस्किन लाई थीं। रिपब्लिकन सांसद एडम किंजिंगर ने भी इस प्रस्ताव के पक्ष में मत दिया। हालांकि माइक पेंस ने प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी को पहले ही इस प्रस्ताव का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया और लिखा कि ‘हमारे संविधान में, 25वां संशोधन सजा देने या अधिकार छीनने का जरिया नहीं है। इस प्रकार से 25वां संशोधन लागू करना खराब उदाहरण पेश करेगा।’ इस संशोधन में पेंस को यह हक मिल जाता कि वे ट्रंप को पद से हटाकर खुद नवनिर्वाचित राष्ट्रपति की शपथ तक शक्तियां ले लें। इधर, सांसदों ने संसद भवन (कैपिटल) में भारी सुरक्षा किलेबंदी के बीच कार्यवाही में भाग लिया। बुधवार को सांसद जैमी रस्किन, डेविड सिसिलिने और डेट लियू द्वारा तैयार महाभियोग प्रस्ताव को 211 सदस्यों ने सह-प्रायोजित किया है।
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इससे पहले दिसंबर-2019 में भी ट्रंप द्वारा यूक्रेन से बाइडन की जांच का कहकर कानून तोड़ने के आरोप में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लाया गया था जिसमें सीनेट में रिपब्लिकनों का बहुमत होने के कारण उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया था। उस वक्त एक भी रिपब्लिकन ने ट्रंप के खिलाफ मतदान नहीं किया था। प्रतिनिधि सभा में चली कार्यवाही के दौरान ट्रंप पर चुनाव नतीजों को पलटने की कोशिश में हिंसा भड़काने का आरोप लगा और उन्हें फिर से सार्वजनिक पद संभालने से अयोग्य घोषित करते हुए पद से हटाने की अपील की गई। निचले सदन की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने गत सप्ताह के घटनाक्रम को इतिहास में काला अध्याय घोषित करते हुए सहयोगियों से सांविधानिक उपाय अपनाने को प्रेरित किया। इस दौरान निचले सदन में कई घंटे तक गरमागरम बहस होती रही।
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सीनेट में ट्रंप को हटाने के लिए 17 रिपब्लिकनों का टूटना जरूरी
अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के निचले सदन में डेमोक्रेटों का बहुमत है इसलिए यहां महाभियोग प्रस्ताव का पारित होना महज एक औपचारिकता थी, लेकिन इसके बाद ममला सीनेट (ऊपरी सदन) में जाएगा जहां अपराध तय करने के लिए ट्रायल चलेगा और ट्रंप को दोषी ठहराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। यानी कम से कम 17 रिपब्लिकन सदस्यों को इसके पक्ष में मत डालने होंगे। दूसरी तरफ, 20 रिपब्लिकन सीनेटर ऐसे हैं जो राष्ट्रपति को दोषी ठहराने के लिए तैयार हैं। माना जा रहा है कि सीनेट में 19 जनवरी से पहले इस मामले पर शायद ही कोई कार्यवाही हो पाए। सीनेट इस ट्रायल में इस बात पर भी वोट करवा सकता है कि ट्रंप फिर कभी राष्ट्रपति बनने की रेस में शामिल ना हो पाएं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे 2024 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव प्रचार करेंगे।
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प्रस्ताव पास होने के बाद नैंसी बोलीं, कानून से ऊपर कोई नहीं
निचले सदन में ट्रंप के खिलाफ 13 माह में दूसरी बार महाभियोग प्रस्ताव पारित होने के बाद स्पीकर नैंसी पेलोसी ने कहा, द्विदलीय तरीके से हुई इस कार्यवाही ने साबित कर दिया है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। अमेरिका का राष्ट्रपति भी नहीं। उन्होंने बहस के दौरान ट्रंप को देश के लिए खतरा बताते हुए कहा, हम जानते हैं उन्होंने देश के खिलाफ विद्रोह के लिए भीड़ को उकसाया। उन्हें इसके लिए हटना ही चाहिए। पेलोसी ने कहा, मेरा मानना है कि राष्ट्रपति को सीनेट की ओर से दोषी ठहराया जाना चाहिए। यह संवैधानिक उपाय उस शख्स (ट्रंप) से हमारे गणतंत्र को सुरक्षित करेगा, जो लगातार इसे नुकसान पहुंचा रहा है।
बचाव में उतरे रिपब्लिकन सांसद
महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान के दौरान कई रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेटों से राष्ट्रीय एकता के लिए इस प्रस्ताव को वापस लेने की अपील भी की। सीनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैक्कॉनेल ने कहा कि राष्ट्रपति के दफ्तर छोड़ने से पहले अंतिम फैसला नहीं हो सकेगा। जिम जॉर्डन ने डेमोक्रेटों पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगाते हुए इस कार्यवाही की आलोचना की। सांसद केविन मैक्कार्थी ने भीड़ को उकसाने में ट्रंप को जिम्मेदार मानते हुए कहा कि इतने कम समय में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लाना एक गलती होगी। रिपब्लिकन सांसद डायना हैर्शबार्गर ने भी ट्रंप का बचाव किया।
10 रिपब्लिक सांसदों ने भी ट्रंप के खिलाफ मतदान किया। ये सांसद हैं-
- वाशिंगटन के डैन न्यूजहाउ
- न्यू यॉर्क के जॉन काटको
- वाशिंगटन के जैमी हेरेरा
- इलिनोइस के एडम किंजिंगर
- मिशिगन के फ्रेड अपटन
- व्योमिंग की लिज चेने
- मिशिगन के पीटर मीजर
- ओहियो के एंथनी गोंजालेज
- दक्षिण कैरोलिना के टॉम राइस
- कैलिफोर्निया के डेविड वलाडाओ
ट्रंप का बयान
वहीं, ट्रंप ने कहा कि भीड़ की हिंसा हर उस चीज के खिलाफ है जिसमें मैं भरोसा करता हूं। मेरा सच्चा समर्थक कभी भी राजनीतिक हिंसा नहीं करेगा, कानूनों की धज्जियां नहीं उड़ाएगा। अगर आप ऐसा कुछ कर रहे हैं तो हमारे आंदोलन का समर्थन नहीं कर रहे हैं, आप हमारे देश पर हमला कर रहे हैं।
जबरदस्त गहमागहमी रही
इससे पहले अमेरिकी संसद में कैपिटल हमले के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराते हुए महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान के दिन जबरदस्त गहमागहमी देखी गई। इससे ठीक पहले सांसदों ने एक प्रस्ताव पास किया जिसमें उपराष्ट्रपति माइक पेंस को 25वें संशोधन के तहत सांविधानिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए ट्रंप की शक्तियां छीनने के लिए कहा गया। प्रस्ताव को 205 के मुकाबले 223 मत प्राप्त हुए।
उपराष्ट्रपति को ट्रंप की शक्तियां छीनने वाला यह प्रस्ताव मेरीलैंड की सांसद जैमी रस्किन लाई थीं। रिपब्लिकन सांसद एडम किंजिंगर ने भी इस प्रस्ताव के पक्ष में मत दिया। हालांकि माइक पेंस ने प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी को पहले ही इस प्रस्ताव का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया और लिखा कि ‘हमारे संविधान में, 25वां संशोधन सजा देने या अधिकार छीनने का जरिया नहीं है। इस प्रकार से 25वां संशोधन लागू करना खराब उदाहरण पेश करेगा।’ इस संशोधन में पेंस को यह हक मिल जाता कि वे ट्रंप को पद से हटाकर खुद नवनिर्वाचित राष्ट्रपति की शपथ तक शक्तियां ले लें। इधर, सांसदों ने संसद भवन (कैपिटल) में भारी सुरक्षा किलेबंदी के बीच कार्यवाही में भाग लिया। बुधवार को सांसद जैमी रस्किन, डेविड सिसिलिने और डेट लियू द्वारा तैयार महाभियोग प्रस्ताव को 211 सदस्यों ने सह-प्रायोजित किया है।
वीडियो में ट्रंप ने कैपिटल हिल हमले की स्पष्ट रूप से निंदा की
निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैपिटल हिल में पिछले सप्ताह हुए हमले की साफ तौर पर निंदा की और कहा कि इस तरह की हिंसा को लेकर कोई सफाई नहीं दी जा सकती। व्हाइट हाउस के ओवल कार्यालय में रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में ट्रंप ने कहा, हिंसा और बर्बरता की हमारे देश में कोई जगह नहीं है और न ही हमारी मुहिम में इसके लिए कोई स्थान है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘अमेरिका को फिर से महान बनाने’ का अभियान हमेशा से कानून के शासन का बचाव करने और देश की सबसे पवित्र परंपराओं एवं मूल्यों को बनाए रखने से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा, यूएस कैपिटल पर हुए हमले ने हमारे गणतंत्र को ठेस पहुंचाई है। इसने करोड़ों अमेरिकियों को दुखी और नाराज किया है, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल में विश्वास रखते हों। मैं हमले की स्पष्ट रूप से निंदा करता हूं। मेरा सच्चा समर्थक कभी ऐसी राजनीतिक हिंसा का समर्थन नहीं करेगा। मेरा सच्चा समर्थक कभी कानून या हमारे अमेरिका के महान झंडे का निरादर नहीं करेगा। ट्रंप ने कहा, चाहे आप दक्षिणपंथी हों या वामपंथी, डेमोक्रेट हों या रिपब्लिकन, हिंसा की कोई सफाई नहीं दी जा सकती। कोई बहाना नहीं दिया जा सकता, कोई छूट नहीं दी जा सकती। पिछले सप्ताह हिंसा में शामिल सभी लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ट्रंप के अकाउंट पर रोक लगाना खतरनाक : ट्विटर सीईओ
माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अकाउंट पर स्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला एक खतरनाक मिसाल है। हालांकि उन्होंने ट्रंप के अकाउंट पर लगाए गए प्रतिबंध का बचाव करते हुए कहा कि हमें यह फैसला लेना पड़ा है। ट्विटर प्रमुख ने कहा, मुझे यह स्वीकारने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप को प्रतिबंधित करने पर हमें कोई गर्व नहीं है।
हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना जरूरी : बाइडन
20 जनवरी को नए राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि पिछले हफ्ते, हमने लोकतंत्र पर अभूतपूर्व हमला देखा। ऐसा 244 साल के इतिहास में कभी नहीं हुआ। इस हमले की योजना बनाई गई और समन्वय किया गया। यह सब उन राजनीतिक चरमपंथियों और घरेलू आतंकवादियों ने किया, जिन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ने उकसाया था। यह अमेरिका के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह था और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। बाइडन ने यह भी कहा कि देश एक घातक वायरस और आर्थिक संकट की चपेट में है। उन्होंने कहा, उन्हें उम्मीद है कि सीनेट नेतृत्व महाभियोग पर अपनी सांविधानिक जिम्मेदारियों से निपटने के लिए एक रास्ता खोजेगा और इस दौरान अन्य जरूरी कामकाज भी होंगे।
सुनवाई के लिए प्रबंधक नियुक्त
प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की सुनवाई के प्रबंधकों को नियुक्त किया था। मुख्य प्रबंधक सांसद रस्किन के अलावा डियाना डीगेटे, स्टेसी प्लास्केट, मैडेलीने डियान, डेविड सिसिलिने, टेड लियू और जो नेगुसे को इसकी जिम्मेदारी दी गई। महाभियोग पर मतदान से पहले पेलोसी ने कहा, राष्ट्रपति के खिलाफ अभियोग चलाना और उन्हें हटाना प्रबंधकों का सांविधानिक कर्तव्य है।
महाभियोग के लिए मजबूत आधार
बुधवार को मतदान से पहले मंगलवार देर रात प्रतिनिधि सभा की न्यायिक समिति के अध्यक्ष जेरोल्ड नैडलर ने ट्रंप के खिलाफ महाभियोग के लिए 50 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की। इसमें महाभियोग चलाने के लिए मजबूत आधार पेश किए गए।
यूट्यूब ने ट्रंप के चैनल को एक सप्ताह तक किया प्रतिबंधित
ट्विटर और फेसबुक के बाद यूट्यूब ने भी ट्रंप के चैनल को कम से कम एक सप्ताह के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। उसने कहा कि इसे आगे भी निलंबित रखा जा सकता है। कंपनी ने कहा कि ट्रंप के चैनल ने यूट्यूब की नीतियों का उल्लंघन किया है। बता दें कि इस चैनल पर हाल ही में एक वीडियो पोस्ट होने के बाद हिंसा भड़की थी। यूट्यूब ने उस वीडियो भी हटा दिया है।
सांसदों को मिल रही हैं धमकियां : रो खन्ना
भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कहा है कि जो बाइडन की जीत की पुष्टि के लिए तीन नवंबर को हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव के परिणाम को प्रमाणित करने के पक्ष में मतदान करने वाले अमेरिकी सांसदों को हिंसक धमकियां मिल रही हैं जिनमें जान से मारने की धमकियों भी शामिल हैं। उन्होंने सीएनएन न्यूज से कहा कि ये धमकियां डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के सांसदों को मिल रही हैं। उन्होंने कहा हिंसा का खतरा सिर्फ डेमोक्रेटों को ही नहीं, रिपब्लिकन नेताओं को भी है। मैं यह बताना नहीं चाहता कि धमकियां किन लोगों से मिली हैं लेकिन उन्हें जान से मारे जाने की भी धमकियां मिली हैं।
160 से ज्यादा दंगाइयों की जांच शुरू : एफबीआई
अमेरिका में एफबीआई ने कैपिटल हिल में 6 जनवरी को दंगा करने वालों के खिलाफ 160 से अधिक मामलों में जांच शुरू की और कहा कि यह महज शुरुआत है। जांच एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी स्टीवन अनटूनो ने बताया कि छह दिनों में हमने 160 से अधिक मामलों की फाइल खोली है। उन्होंने कहा कि एफबीआई हमला करने वाले एक-एक व्यक्ति तक पहुंचेगी।
महाभियोग के लिए मजबूत आधार
बुधवार को मतदान से पहले मंगलवार देर रात प्रतिनिधि सभा की न्यायिक समिति के अध्यक्ष जेरोल्ड नैडलर ने ट्रंप के खिलाफ महाभियोग के लिए 50 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की। इसमें महाभियोग चलाने के लिए मजबूत आधार पेश किए गए।
यूट्यूब ने ट्रंप के चैनल को एक सप्ताह तक किया प्रतिबंधित
ट्विटर और फेसबुक के बाद यूट्यूब ने भी ट्रंप के चैनल को कम से कम एक सप्ताह के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। उसने कहा कि इसे आगे भी निलंबित रखा जा सकता है। कंपनी ने कहा कि ट्रंप के चैनल ने यूट्यूब की नीतियों का उल्लंघन किया है। बता दें कि इस चैनल पर हाल ही में एक वीडियो पोस्ट होने के बाद हिंसा भड़की थी। यूट्यूब ने उस वीडियो भी हटा दिया है।
सांसदों को मिल रही हैं धमकियां : रो खन्ना
भारतीय-अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कहा है कि जो बाइडन की जीत की पुष्टि के लिए तीन नवंबर को हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव के परिणाम को प्रमाणित करने के पक्ष में मतदान करने वाले अमेरिकी सांसदों को हिंसक धमकियां मिल रही हैं जिनमें जान से मारने की धमकियों भी शामिल हैं। उन्होंने सीएनएन न्यूज से कहा कि ये धमकियां डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के सांसदों को मिल रही हैं। उन्होंने कहा हिंसा का खतरा सिर्फ डेमोक्रेटों को ही नहीं, रिपब्लिकन नेताओं को भी है। मैं यह बताना नहीं चाहता कि धमकियां किन लोगों से मिली हैं लेकिन उन्हें जान से मारे जाने की भी धमकियां मिली हैं।
160 से ज्यादा दंगाइयों की जांच शुरू : एफबीआई
अमेरिका में एफबीआई ने कैपिटल हिल में 6 जनवरी को दंगा करने वालों के खिलाफ 160 से अधिक मामलों में जांच शुरू की और कहा कि यह महज शुरुआत है। जांच एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी स्टीवन अनटूनो ने बताया कि छह दिनों में हमने 160 से अधिक मामलों की फाइल खोली है। उन्होंने कहा कि एफबीआई हमला करने वाले एक-एक व्यक्ति तक पहुंचेगी।