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कोरोना काल में तिगुनी रफ्तार से बढ़ सकते हैं अवसाद के मामले
Fri, 04 Sep 2020 02:05 AM IST
Jeet Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 04 Sep 2020 02:05 AM IST
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Depression
- फोटो : Pixabay
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दुनिया भर में कोरोना के मामलों में दिन-ब-दिन बढ़त देखने को मिल रही है। इस बीच एक नए शोध में पता चला है कि इस महामारी से संक्रमित लोगों में अवसाद के लक्षणों के लक्षणों के तीन गुना बढ़ने की संभावना है।
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‘जामा नेटवर्क ओपन’ नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि 27.8 प्रतिशत अमेरिकी संक्रमितों में अप्रैल के मध्य तक अवसाद के लक्षण थे। अमेरिका में बोस्टन विश्वविद्यालय के वरिष्ठ लेखक सैंड्रो गैली ने कहा कि महामारी से पहले 8.5 प्रतिशत अवसाद से ग्रस्त थे।
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उन्होंने कहा कि हम पहली बार में इन परिणामों को देखकर हैरान थे। लेकिन बाद में अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं किए गए सर्वे में 5,065 लोगों के जवाबों का इस्तेमाल किया। इसमें 2017-2018 के यूएस नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे (एनएचएएनईएस) के आंकड़ों को भी शामिल किया।
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शोधकर्ताओं ने सभी समूहों के बीच अवसाद के लक्षणों में वृद्धि देखी। इसमें उन लोगों को अवसाद से सबसे अधिक ग्रसित पाया गया। जिनके पास महामारी के दौरान पैसी की कमी आई। अन्य सभी आंकड़ों को इकट्ठा करने के बाद अध्ययन में पाया गया कि कोरोना के दौरान, जिनके पास कम बचत थी उन लोगों में अवसाद के लक्षणों की संभावना 50 प्रतिशत से अधिक थी।