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Balochistan: पाकिस्तान के सत्तारूढ़ गठबंधन में दरार, बलूचिस्तान में स्वर्ण खनन प्रोजेक्ट को लेकर मतभेद

Wed, 14 Dec 2022 12:09 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 14 Dec 2022 12:09 PM IST
सार

विवादित परियोजना पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक हुई थी। इसका गठबंधन सरकार के दो सहयोगी दलों- जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) और बलूचिस्तान नेशनल पार्टी-मेंगल (बीएनपी-मेंगल) ने बहिष्कार किया।
 

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Cracks appear in Pakistans ruling coalition over Balochistan project
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पाकिस्तान में पहले से जारी राजनीतिक व आर्थिक अनिश्चितता के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन में दरार पैदा हो रही है। अशांत बलूचिस्तान प्रांत की प्रमुख स्वर्ण खनन परियोजना को लेकर   गठबंधन के दो सहयोगी दलों में मतभेद उभरे हैं।

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पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह बलूचिस्तान में अरबों डॉलर की रेको डिक कॉपर एंड गोल्ड माइन प्रोजेक्ट की बहाली को मंजूरी दे दी थी। 'डॉन' के अनुसार को इस विवादित परियोजना पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक हुई थी। इसका गठबंधन सरकार के दो सहयोगी दलों- जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) और बलूचिस्तान नेशनल पार्टी-मेंगल (बीएनपी-मेंगल) ने बहिष्कार किया।
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रेको डिक प्रोजेक्ट का इसलिए विरोध
पाक गठबंधन सरकार के उक्त दोनों घटक दलों का मानना है कि सीनेट द्वारा सोमवार को पारित रेको डिक प्रोजेक्ट से संबंधित विदेशी निवेश (संवर्धन और संरक्षण) विधेयक 2022 बलूचिस्तान के नागरिकों के अधिकारों के खिलाफ है। उनका कहना है कि जेयूआई-एफ और बीएनपी-मेंगल को यह विधेयक तैयार करते समय विश्वास में नहीं लिया गया। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार शरीफ मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जेयूआई-एफ और बीएनपी-एम दोनों ने अलग-अलग बैठकें कीं। इसमें कहा गया कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे सत्तारूढ़ गठबंधन छोड़ देंगी। 
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पीएम शरीफ ने खतरा देख बनाई कैबिनेट समिति
स्वर्ण परियोजना को लेकर मतभेद व स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने दोनों सहयोगी दलों की शिकायतों को दूर करने के लिए एक कैबिनेट समिति का गठन किया है। उन्हें आश्वासन दिया है कि उनसे परामर्श के बाद जल्द ही एक संशोधन विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। कैबिनेट बैठक के बाद सूचना मंत्री मरियम औरंगजेब ने कहा कि नाराज दलों की शिकायतों को हल करने के लिए कैबिनेट ने एक समिति का गठन किया है। 

अंतिम करार पर कल दस्तखत
मंत्री औरंगजेब ने कहा कि कैबिनेट ने रेको डिक प्रोजेक्ट की फंडिंग योजना को मंजूरी दे दी है। दो अंतरराष्ट्रीय कंपनियों- एंटोफगास्टा पीएलसी और बैरिक गोल्ड कॉरपोरेशन के साथ परियोजना के अंतिम करार पर गुरुवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट के मूल समझौते पर 2006 में हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें कनाडा की बैरिक गोल्ड और चिली के एंटोफगास्टा कंपनी दोनों को बराबर बराबर 37.5 फीसदी हिस्सेदारी तय की थी, जबकि बलूचिस्तान सरकार को 25 फीसदी हिस्सेदारी मिली थी।

दो अंतरराष्ट्रीय कंपनियां कंसोर्टियम टेथियन कॉपर कंपनी का हिस्सा थीं। रेको डिक में सोने और तांबे के विशाल भंडार मिले थे, लेकिन स्थानीय सरकार द्वारा टेथियन कॉपर की लीज के नवीनीकरण से इनकार के बाद 2011 में यह खनन परियोजना ठप हो गई थी। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। 

विश्व बैंक ने की थी मध्यस्थता, पाक पर लगाया जुर्माना
2019 में विश्व बैंक की मध्यस्थता वाली न्यायाधिकरण समिति ने खनन परियोजना गैरकानूनी ढंग से रोकने के लिए पाकिस्तान पर जुर्माना लगाया था। हालांकि इसके बाद संघीय और बलूचिस्तान सरकारें दो फर्मों एंटोफगास्टा पीएलसी और बैरिक गोल्ड कॉरपोरेशन के साथ एक नया करार किया। इसमें रेको डिक परियोजना का पुनर्गठन किया गया। पुनर्गठित परियोजना के तहत बलूचिस्तान में सोने और तांबे के भंडार की खुदाई होगी। विश्व बैंक के मध्यस्थता समझौते के कारण पाकिस्तान को 11 अरब डॉलर के जुर्माने से राहत मिल गई थी। 

नए समझौते के तहत बैरिक ने परियोजना में पाकिस्तान और बलूचिस्तान की सरकारों और तीन राज्य के स्वामित्व वाली संस्थाओं के साथ 50 फीसदी भागीदार का फैसला किया जबकि चिली की फर्म पाकिस्तानी शेयरधारकों द्वारा भुगतान किए गए 90 करोड़ डॉलर के बदले अनुबंध से बाहर हो गई। 


नए समझौते में यह रहेगी हिस्सेदारी
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार नए समझौते के तहत परियोजना में बलूचिस्तान सरकार की 25 फीसदी और अन्य की 25 फीसदी हिस्सेदारी होगी। बता दें, खजिन संसाधन से भरपूर बलूचिस्तान प्रांत, ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है, लेकिन यहां लंबे समय से हिंसक विद्रोह हो रहा है। बलूच विद्रोही समूहों ने इससे पहले प्रांत में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) परियोजनाओं को निशाना बनाते हुए कई हमले किए थे। 

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