Coronavirus: कोरोना ने बदतर बना दी हालत, डायबिटीज के मामलों में तेजी से हुआ है इजाफा
Coronavirus: अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल डायिबिटीज फेडरेशन ने एक हालिया रिपोर्ट में बताया है कि 2021 में विकासशील देशों में डायबिटीज के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई। इसके आधार पर अनुमान लगाया गया है कि साल 2045 तक एशिया और अफ्रीका में इस रोग से पीड़ित लोगों की संख्या 56 करोड़ तक पहुंच जाएगी...
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एशिया और अफ्रीका में डायबिटीज मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसकी एक बड़ी वजह कोरोना महामारी के दिनों में लोगों की बदल गई आदतों को बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक लॉकडाउन के दिनों में घर पर रहने के कारण बहुत से लोगों की जीवन-शैली सुस्त हो गई। उसका नतीजा उनमें से अनेक लोगों के डायबिटीज का मरीज बनने के रूप में सामने आया है। वैसे मध्य वर्गीय परिवारों में बढ़ रहे मोटापे के कारण यह रोग कोरोना महामारी के पहले भी फैल रहा था।
वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में 2021 में डायबिटीज पीड़ित मरीजों की संख्या दस साल पहले की तुलना में 5.2 गुना ज्यादा हो चुकी थी। इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में डायबिटीज विशेषज्ञ मतिउल्लाह खान ने इस वेबसाइट से कहा- ‘पहले पाकिस्तान में डायबिटीज 40 साल से ज्यादा उम्र में ही होता था। लेकिन धीरे-धीरे 30 वर्ष और अब 20 वर्ष से अधिक के लोग भी इससे पीड़ित होने लगे हैं।’
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर डायबिटीज का ठीक से इलाज ना हो, तो यह हृदय रोग, स्ट्रोक (पक्षाघात) या अंधेपन का कारण बन सकता है। इस्लामाबाद स्थित संस्था डायबिटीज सेंटर के एक अधिकारी ने बताया कि देश में इस रोग को लेकर जागरूकता का अभाव है। सरकार ने लोगों को शिक्षित और जागरूक बनाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है, जबकि इस रोग के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इस मामले में पाकिस्तान अकेला उदाहरण नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल डायिबिटीज फेडरेशन ने एक हालिया रिपोर्ट में बताया है कि 2021 में विकासशील देशों में डायबिटीज के मामलों में तेज बढ़ोतरी हुई। इसके आधार पर अनुमान लगाया गया है कि साल 2045 तक एशिया और अफ्रीका में इस रोग से पीड़ित लोगों की संख्या 56 करोड़ तक पहुंच जाएगी। तब तक सिर्फ दक्षिण एशिया में अभी की तुलना में 70 फीसदी बढ़ोतरी के साथ इस रोग के 22 करोड़ मरीज हो चुके होंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज का कारण पैनक्रियाज (अग्नाशय ग्रंथि) का ठीक से काम ना करना होता है। पैनक्रियाज पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन बनाने में अक्षम हो जाता है, तो खून में शुगर की मात्रा बढ़ने लगती है। इस रोग के दो प्रकार होते हैं। इसके टाइप-1 के मरीजों में इसकी वजह वंशानुगत होती है, जबकि टाइप-2 डायबिटीज जीवन शैली संबंधी कारणों से होता है। 90 फीसदी डायबिटीज मरीज टाइप-2 श्रेणी में आते हैं।
ताजा अध्ययन रिपोर्टों के मुताबिक कोरोना वायरस के प्रसार से डायबिटीज की स्थिति बदतर हो गई है। अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया की एक स्टडी के मुताबिक नवंबर 2021 में लोग महामारी से पहले की तुलना में रोजाना औसतन दस फीसदी कम कदम चल रहे थे। यह अध्ययन कार्डियोलॉजिस्ट एक टिसन ने किया। प्रो. टिसन ने बताया कि अमेरिका और यूरोप में हालांकि कोविड प्रतिबंध काफी पहले हटा लिए गए, लेकिन लोगों की शारीरिक श्रम की मात्रा पहले जितनी बहाल नहीं हो सकी है। एशिया में तो इसमें 30 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। यही डायबिटीज फैलने का मुख्य कारण है।