कोरोनावायरस का खुलासा करने वाले डॉक्टर की मौत, अस्पताल ने की पुष्टि
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चीन में कोरोनावायरस के प्रकोप के बारे में सबसे पहले आगाह करने वाले डॉक्टर ली वेनलियांग की शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। वुहान सेंट्रल हॉस्पिटल ने बताया कि उनकी मौत कोरोनावायरस से पीड़ित होने के कारण शुक्रवार सुबह 2.58 बजे हो गई।
अस्पताल ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि हमारे अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ ली वेनलियांग कोरोनोवायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपने काम के दौरान दुर्भाग्य से संक्रमित हो गए थे। उनको बचाने का प्रयास असफल रहा और सात फरवरी को सुबह 2:58 बजे उनका निधन हो गया।
चीन ने व्हिसलब्लोअर डॉक्टर की मौत के बाद जांच शुरू की
चीन की भ्रष्टाचार विरोधी प्रहरी संस्था ने कोरोना वायरस की सबसे पहले जानकारी देने वाले व्हिसलब्लोअर डॉक्टर की मौत के बाद शुक्रवार को इस बारे में जांच को आदेश दिए। डॉक्टर की मौत के बाद कोरोना वायरस आपदा से निपटने के सरकार के तरीके को लेकर लोगों में आक्रोश था।
अनुशासन निरीक्षण आयोग ने एक बयान में कहा कि जांच टीम वायरस प्रभावित वुहान शहर जाएगी, जहां वेनलियांग की मौत हुई। यह टीम डॉ ली वेनलियांग की मौत के अलावा अन्य मुद्दों की समग्र जांच करेगी।
इससे पहले सरकार संचालित ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 34 वर्षीय ली ने इस महाबीमारी के बारे में अन्य डॉक्टरों को सतर्क करने का प्रयास किया था। उन्होंने पिछले साल दिसंबर में वुहान में पहला मामला सामने आने पर ही इस वायरस के बारे में रिपोर्ट दी थी। इस बारे में उन्होंने वीचैट एप पर अपने मेडिकल स्कूल के एलुमनी ग्रुप में जानकारी दी थी।
उन्होंने अपने दोस्तों को अपने जानकारों, दोस्तों, रिश्तेदारों को गोपनीय तरीके से इस बारे में आगाह करने को कहा था लेकिन कुछ ही घंटों में उनके संदेश का स्क्रीनशॉट वायरल हो गया था। इस पर वुहान पुलिस ने उन पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया था।
30 दिसंबर को बीमारी के बारे में किया था आगाह
ली वेनलियांग ने पिछले साल 30 दिसंबर को ही इस बारे में आगाह किया था। जिस मेडिकल स्कूल से वह पढ़े थे, उसी के ऑनलाइन एल्युमनी चैट ग्रुप वीचैट पर बताया कि उनके अस्पताल में स्थानीय मछली बाजार से सात मरीज आए हैं, जिनमें सार्स जैसी बीमारी के लक्षण पाए गए हैं और उन्हें अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।
2003 में भी सरकार ने छिपाई थी बीमारी
ली ने बताया कि जांच के बाद पाया गया कि यह बीमारी कोरोनावायरस है, जो वायरस का एक बड़ा परिवार है। वर्ष 2003 में भी इस वायरस ने सैंकड़ों लोगों की जान ली थी और चीन में इस वायरस की जड़ें काफी पुरानी हैं। डॉक्टर ली ने कहा, 'मैं अपने विश्वविद्यालय के साथियों को इस बारे में आगाह करना चाहता था।'
वायरल स्क्रीनशॉट बना मुसीबत का सबब
34 साल के ली कोरोनावायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित चीनी प्रांत वुहान में प्रैक्टिस करते थे। ली ने अपने साथियों को कहा था कि वह अपने परिजनों को इस बारे में गोपनीय तरीके से बता दें। मगर उनका स्क्रीनशॉट कुछ ही समय में वायरल हो गया। इसके बाद ही ली को समझ में आ गया कि अब उनके लिए मुसीबत होने वाली है।
वुहान के स्वास्थ्य प्रशासन ने ली को नोटिस भेजकर पूछा कि आखिर आपको इस बारे में कैसे पता चला। इसके एक दिन बाद ही प्रशासन ने इसे लेकर घोषणा कर दी। मगर ली की परेशानियां खत्म नहीं हुईं।
अफवाह फैलाने का लगा आरोप
डॉक्टर ली के मैसेज भेजने के कुछ देर बाद ही पुलिस ने उन पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया। ऐसा नहीं है कि आवाज उठाने वाले वह अकेले थे। पुलिस ने सभी मेडिकल अधिकारियों को निशाने पर ले लिया। सरकार की तरफ से नोटिस आ गया कि कोई भी बीमारी और उसके इलाज के बारे में जानकारी लीक नहीं करेगा। डॉक्टर ली को भी लिखित में ऐसा दोबारा नहीं करने की बात कहते हुए माफी मांगनी पड़ी।