कोरोनावायरस: बीमार बच्चों को हवाई अड्डे पर ही छोड़कर विमान में जा बैठे माता-पिता
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चीन में कोरोनावायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। लोगों में डर का माहौल है। चीन के लोग जान बचाने के लिए दूसरे शहरों की तरफ रुख कर रहे हैं। वायरस की वजह से एयरलाइन कंपनियां भी डरी हुई हैं। एयरलाइन कंपनियां बीमार लोगों को फ्लाइट में बैठने की इजाजत नहीं दे रही हैं।
इसी तरह का मामला चीन के नाजिंग शहर के एक एयरपोर्ट पर सामने आया। जहां माता-पिता के साथ सफर कर रहे बीमार बच्चों को एयरलाइन ने फ्लाइट में बैठाने से इंकार कर दिया। मजबूरी में परिजनों को बच्चों को हवाई अड्डे पर ही छोड़ना पड़ा।
बच्चों को एयरपोर्ट पर ही छोड़कर माता-पिता अकेले विमान में सवार हो गए। जिसके बाद काफी हंगामा हुआ। दरअसल, दंपती दो बच्चों के साथ चांगसा शहर जाने के लिए नाजिंग एयरपोर्ट पहुंचा। उनके बेटे को बुखार के कारण फ्लाइट में बैठने की इजाजत नहीं दी गई।
बच्चों के परिजनों ने डिपार्चर गेट ब्लॉक कर दिया और बच्चों को साथ ले जाने पर अड़े रहे। इस बीच पुलिस बीच-बचाव करने आई और माता-पिता बच्चों को वहीं छोड़कर जहाज में बैठ गए जिससे एयरपोर्ट पर मौजूद कर्मचारी और यात्री भी हैरान रह गए।
हालांकि, कुछ समय बाद एयरलाइन कंपनी मान गई और बच्चों को प्लेन के केबिन में बैठने की इजाजत दे दी गई।
चीन ने 13 शहर में लगाया यात्रा प्रतिबंध
चीन ने खतरनाक विषाणु कोरोनावायरस के फैलने की आशंका को देखते हुए और विषाणु पर नियंत्रण करने के मद्देनजर इससे प्रभावित शहर के आसपास मौजूद चार और शहरों में शुक्रवार को यात्रा प्रतिबंध लगा दिया, जिससे यात्रा प्रतिबंध वाले शहरों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है और इसके कारण इन शहरों में रह रही करीब 4.1 करोड़ की आबादी प्रभावित है।
मध्य हुबेई प्रांत में स्थित शियानिंग, शियाओगन, एन्शी और झिजियांग शहरों में अधिकारियों ने बताया कि बस एवं रेलवे स्टेशन समेत सार्वजनिक परिवहन बंद रहेंगे। हुबेई प्रांत में ही इस विषाणु का सबसे पहले पता चला था। नए कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए बीते 24 घंटे में हुबेई प्रांत के शहरों पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध में ये नए नाम जुड़ गए हैं। इस विषाणु से 800 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
26 लोगों की मौत
विषाणु का पता सबसे पहले हुबेई प्रांत की राजधानी वुहान शहर में चला था, जहां इस महामारी के केंद्र के तौर पर एक सीफूड और पशुओं के बाजार की पहचान हुई थी। विषाणु के संक्रमण से अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है और सार्स (सीवियर एक्युट रेस्पिरेट्री सिंड्रोम) से मिलते जुलते लक्षण के कारण खतरा बढ़ गया है। सार्स के कारण 2002-2003 में चीन और हांगकांग में करीब 650 लोग मारे गए थे।