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Britain: निर्वासित होने के खतरे का सामना कर रही बुजुर्ग सिख महिला, समर्थन में आए समुदाय के हजारों लोग

Sun, 26 Nov 2023 06:56 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 26 Nov 2023 06:56 PM IST
सार

Britain: ब्रिटेन में भारतीय मूल की एक विधवा बुजुर्ग सिख महिला निर्वासित होने के खतरे का सामना कर रही हैं। उनके समर्थन में सिख समुदाय के हजारों लोग सामने आए हैं। यहां उनके लिए रैलियों का आयोजन किया जा रहा है। 

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Community fights for elderly Indian Sikh woman facing deportation from UK
गुरमीत कौर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ब्रिटेन के वेस्ट मिडलैंड्स में भारत की एक बुजुर्ग सिख महिला लंबे समय से निर्वासन का सामना कर रहीं हैं। हालांकि, उन्हें अपने समुदाय के भीतर से खूब समर्थन मिल रहा है, जिसने देश में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अब उनके समुदाय के हजारों लोग उनके निर्वासन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। 

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जुलाई 2020 में 'चेंज डॉट ओआरजी' पर एक याचिका शुरू की गई थी। इस याचिका पर 65 हजार से ज्यादा लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। याचिका में बताया गया था कि गुरमीत कौर (78 वर्षीय) 2009 में ब्रिटेन आई थीं और तब से स्मेथविक उनका घर है।

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इन दिनों स्थानीय सिख समुदाय विधवा महिला के साथ रैलियों का आयोजन कर रहा है। इसलिए, सोशल मीडिया पर 'वी ऑल आर गुरमीत' भी ट्रेंड कर रहा है।  

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याचिका में कहा गया था, 'गुरमीत कौर का ब्रिटेन में कोई परिवार नहीं है। पंजाब लौटने के लिए भी वहां उनका कोई परिवार नहीं है। इसलिए स्मेथविक के स्थानीय सिख समुदाय ने उन्हें गोद लिया है।' इसमें आगे कहा गया कि गुरमीत ने यहां रहने के लिए आवेदन किया था लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था। भारत के पंजाब लौटने के लिए उनका कोई परिवार नहीं है। गुरमीत के पास कुछ भी नहीं है, लेकिन वह एक बहुत ही दयालु महिला हैं। वह हमेशा वो अच्छा काम करती हैं, जो वह कर सकती हैं। इसमें आगे कहा गया है कि उनके ज्यादातर दिन स्थानीय गुरुद्वारे में स्वयंसेवा करते हुए बीतते हैं। 

वहीं, ब्रिटेन के गृह मंत्रालय का कहना है कि गुरमीत कौर अभी भी पंजाब में अपने गांव के लोगों के संपर्क में हैं और वह वहां फिर से अपनी जिंदगी शुरू करने में सक्षम होंगी। 
 

'चेंज डॉट ओआरजी' पर याचिका को ब्रशस्ट्रोक कम्युनिटी प्रोजेक्ट के इमिग्रेशन एडवायजर सलमान मिर्जा ने शुरू किया था। वह कहते हैं कि गुरमीत के लिए निर्वासन एक सजा की तरह है। पंजाब के गांव में उनका घर जर्जर हालत में है, जिसपर कोई छत भी नहीं है। उन्हें उस गांव में जीवन बिताने के लिए भोजन और संसाधन ढूंढने पड़ेंगे, जहां वह बीते 11 वर्षों से नहीं गई हैं। 

इस मामले पर गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, 'हम व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। लेकिन, सभी आवेदनों पर उनके गुण-दोष और उपलब्ध कराए गए सबूतों के आधार पर सावधानीपूर्वक विचार कर सकते हैं।' 

गुरमीत कौर पहली बार 2009 में एक शादी में शामिल होने के लिए ब्रिटेन आईं थीं और शुरुआत में अपने बेटे के साथ रह रहीं थीं। बाद में वह अपने परिवार से अलग हो गईं। तब से वह यहां अजनबी लोगों की दया के भरोसे जीवन बिता रही हैं। उन्हें अपने सिख समुदाय से बड़े पैमाने पर समर्थन मिल रहा है। वह गुरुद्वार में स्वयंसेवा कर रही हैं। 

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