फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   climate Study finds planetary waves linked to wild summer weather have tripled since 1950

Climate: जलवायु परिवर्तन पर बड़ा खुलासा, अध्ययन में दावा- ग्रहीय तरंगों से पड़ रही भीषण गर्मी, आ रही बाढ़

Tue, 17 Jun 2025 10:07 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 17 Jun 2025 10:07 AM IST
सार

रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2021 में उत्तर पश्चिम प्रशांत महासागर इलाके में जो हीटवेव चली थी, रूस में साल 2010 में जो हीटवेव और पाकिस्तान में बाढ़ आई थी और साल 2003 में यूरोप में जो हीटवेव आई थी, उसकी वजह ये ग्रहीय तरंगे ही थीं। 

विज्ञापन
climate Study finds planetary waves linked to wild summer weather have tripled since 1950
भीषण गर्मी का प्रकोप जारी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

जलवायु परिवर्तन को लेकर एक अध्ययन में बड़ा खुलासा हुआ है। अध्ययन में कहा गया है कि ग्रहीय तरंगें बीते 75 वर्षों में बढ़कर तीन गुना हो गई हैं। ये ग्रहीय तरंगे भीषण गर्मी से जुड़ी होती हैं। इन तरंगों की वजह से ही मौसम विशेषज्ञों के अनुमान अक्सर फेल हो जाते हैं और हीट वेव, सूखा और बाढ़ की घटनाओं में तेजी आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 1950 में धरती पर गर्मी के मौसम में औसतन एक बार ग्रहीय तरंगे चलतीं थी, लेकिन अब ये बढ़कर तीन हो गई हैं। 
विज्ञापन


रिपोर्ट में पिछली आपदाओं का किया गया जिक्र
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2021 में उत्तर पश्चिम प्रशांत महासागर इलाके में जो हीटवेव चली थी, रूस में साल 2010 में जो हीटवेव और पाकिस्तान में बाढ़ आई थी और साल 2003 में यूरोप में जो हीटवेव आई थी, उसकी वजह ये ग्रहीय तरंगे ही थीं। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- चिंताजनक: दुनियाभर की नदियों में पानी ही नहीं पारा भी बह रहा, सेहत के लिए धीमा जहर, इन बीमारियों का है खतरा
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्रहीय तरंगे कैसे लाती हैं बाढ़ और सूखा
ग्रहीय तरंगे पृथ्वी पर हमेशा बहती रहती हैं, लेकिन कई बार वे बहुत ताकतवर और मजबूत हो जाती हैं। खासकर पहाड़ी इलाकों और घाटियों में ये ज्यादा ताकतवर और लहरदार हो जाती हैं। इस अवस्था में जब ये तरंगे किसी जगह फंस जाती हैं और वहां एक हफ्ते या ज्यादा समय  तक रहती हैं तो इनके असर से वहां या तो बहुत तेज गर्मी या हीटवेव चलेगी या फिर वहां कई दिनों तक बहुत बारिश होगी, जिससे बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाएंगे। अध्ययन में पता चला है कि अब जलवायु परिवर्तन के चलते यह अक्सर होने लगा है। इसमें जीवाश्म ईंधन के जलने, आर्कटिक के गर्म होने से तेजी आई है। 
 
जलवायु वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि दुनिया का तापमान बढ़ने पर इन ग्रहीय तरंगों में और तेजी आएगी। जिससे गर्मी, सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं बढ़ेंगी। इन ग्रहीय तरंगों को रोकने का उपाय ग्रीन हाउस गैसों का कम उत्सर्जन है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed