भविष्य की चिंता: जलवायु परिवर्तन से बढ़ेगा बाढ़ का खतरा, बढ़ता तापमान बना मुसीबत
एक साथ कई समस्याओं से जूझ रही हमारी धरती और हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन के रूप में है। इस संकट से निपटने के लिए कई कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन अभी ये प्रयास पर्याप्त साबित नहीं हुए हैं। इसी बीच में वैज्ञानिकों ने एक और चेतावनी जारी की है। एक अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा है कि अगर जलवायु परिवर्तन ऐसे ही जारी रहा तो जल्द ही धरती के कई हिस्सों में भीषण बाढ़ जैसी आपदा का सामना करना पड़ सकता है।
विस्तार
न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के जलवायु विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक दल ने निष्कर्ष निकाला है कि अगर वैश्वित तापमान यूं ही बढ़ता रहा तो धरती के कई इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होगी। हालांकि, विशेषज्ञों ने कहा कि इस संकट को रोका जा सकता है, बशर्ते हम वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियल पर रोक पाएं। उन्होंने कहा कि वैश्विक तापमान वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए सामाजिक स्तर पर कई कदम उठाने की जरूरत है।
जलवायु परिवर्तन में बदलाव के प्रभावों का पता लगाने के लिए न्यूकैसल यूनिवर्सिटी, द यूनिवर्सिटी आफ ईस्ट एंग्लिया (यूईए), टिंडल सेंटर फार क्लाइमेट चेंज रिसर्च और ब्राजील के साओ पाउलो स्थित आईएनपीई के विज्ञानियों ने 170 अध्ययनों का विश्लेषण किया। इसके आधार पर प्राप्त निष्कर्ष सोमवार को साइंस ब्रीफ रिव्यू में प्रकाशित हुआ था। इसमें जलवायु परिवर्तन के चलते भारी बारिश और भीषण बाढ़ जैसी आपदाओं के बारे में तैयार रहने की चेतावनी दी गई है।
भारत के लिए जलवायु परिवर्तन और जहरीली हवा चिंता का विषय
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए जलवायु परिवर्तन और जहरीली हवा गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। उनका कहना है कि साफ हवा को 'विलासिता की वस्तु' नहीं बल्कि 'मूलभूत मानव अधिकार' मानना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण दमा, स्ट्रोक, फेफड़े के कैंसर और असमय मौत की बड़ी वजह है जबकि जलवायु परिवर्तन का भी काफी असर सेहत पर पड़ रहा है। इससे कई बीमारियां फैल रही हैं और कई जिंदगियां प्रभावित हो रही है।
ग्रीनपीस इंडिया के वरिष्ठ जलवायु प्रचारक अविनाश चंचल का कहना है कि हमें साफ हवा को विलासिता की वस्तु नहीं बनाना चाहिए। यह मूलभूत मानवाधिकार है। लोगों को प्रदूषित हवा में सांस लेने के लिए मजबूर किया गया है और वे गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं। हमने देखा है कि कैसे वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन लगातार हमारे जीवन को प्रभावित कर रहे हैं और यहां तक कि इस कोविड-19 महामारी में भी इनका असर देखने को मिल रहा है।
‘भारत में पर्यावरण की स्थिति’ पर जारी नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 आठवां सबसे गर्म साल रहा और सबसे गर्म 12 साल गत 15 साल में रिकॉर्ड किए गए। तापमान वृद्धि के अलावा भारत में गत दो दशक के दौरान पीएम 2.5 से होने वाली मौतों की संख्या में ढाई गुना वृद्धि हुई । रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से वर्ष 2019 के दौरान भारत में 50 लाख लोग विस्थापित हुए और इस दौरान देश में करीब 16.7 लोगों की जान वायु प्रदूषण से गई।