{"_id":"6124dda0b59254489e127605","slug":"cia-director-burns-held-a-secret-meeting-in-kabul-on-monday-with-taliban-s-de-facto-leader-abdul-ghani-baradar","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफगानिस्तान: अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर ने की बरादर से सीक्रेट मीटिंग, जानें क्या है वजह ","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
अफगानिस्तान: अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर ने की बरादर से सीक्रेट मीटिंग, जानें क्या है वजह
Tue, 24 Aug 2021 05:26 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Tue, 24 Aug 2021 05:26 PM IST
सार
तालिबान ने 15 अगस्त को ही अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। इससे दो हफ्ते पहले अमेरिका ने दो दशक के बाद अपनी सेना की वापसी के लिए तैयार हुआ था। अमेरिका ने एलान किया था कि 31 अगस्त तक उसके सैनिक अफगानिस्तान से बाहर आ जाएंगे।
विज्ञापन
विलियम जे बर्न्स
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर विलियम जे बर्न्स ने 23 अगस्त को तालिबान के वरिष्ठ नेता मुल्ला गनी बरादर से मुलाकात की। यह हाईलेवल मीटिंग अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हुई। अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर वॉशिंगटन पोस्ट को इस बात की जानकारी दी है।
बता दें कि तालिबान ने 15 अगस्त को ही अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। इससे दो हफ्ते पहले अमेरिका ने दो दशक के बाद अपनी सेना की वापसी के लिए तैयार हुआ था। अमेरिका ने एलान किया था कि 31 अगस्त तक उसके सैनिक अफगानिस्तान से बाहर आ जाएंगे। तालिबान के कब्जे के बाद अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात चले गए थे।
यह हाईलेवल मीटिंग ऐसे वक्त हुई है, जब अमेरिका, अफगानिस्तान से अपने लोगों को जल्द से जल्द निकालने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रेस्क्यू मिशन को सबसे बड़ा और सबसे कठिन बताया है। ऐसे में टॉप अमेरिकी जासूस को काबुल भेजने के फैसले को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
अमेरिका को चेतावनी भी दी
इससे पहले तालिबान ने अमेरिका को खुली धमकी दी थी। तालिबान के प्रवक्ता सोहेल शाहीन ने सोमवार को एक बयान दिया था कि अगर अमेरिका अपने सैनिकों की वापसी में देरी करता है, तो उसको इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अमेरिकी सेना 31 अगस्त तक यहां से वापस चली जाए नहीं, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
तालिबान ने 15 अगस्त को किया था कब्जा
दरअसल, 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर तालिबानी लड़ाकों के कब्जे के बाद से हालत बिगड़ती जा रही है। बड़ी संख्या में लोग देश छोड़ रहे हैं। इसके अलावा काबुल एयरपोर्ट पर लोग अपने वतन लौटने के लिए पहुंच रहे हैं। काबुल एयरपोर्ट पर लोगों की हिफाजत के लिए अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिकी सैनिकों के मुताबिक ही वहां से अलग-अलग देशों की विमानें उड़ान भर रहे हैं।
कुशल अफगान नागरिकों को देश के बाहर न ले जाए अमेरिका: तालिबान
इस बीच समाचार एजेंसी एएनआई ने एएफपी के हवाले से खबर दी है कि तालिबान के प्रवक्ता ने अमेरिका से कुशल अफगानों को देश से बाहर ले जाने के काम को रोकने के लिए कहा है। वहीं टोलोन्यूज ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद का कहना है कि अमेरिका को अफगान अभिजात वर्ग को देश छोड़ने के लिए प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि तालिबान पंजशीर में शांति से समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
विज्ञापन
बता दें कि तालिबान ने 15 अगस्त को ही अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। इससे दो हफ्ते पहले अमेरिका ने दो दशक के बाद अपनी सेना की वापसी के लिए तैयार हुआ था। अमेरिका ने एलान किया था कि 31 अगस्त तक उसके सैनिक अफगानिस्तान से बाहर आ जाएंगे। तालिबान के कब्जे के बाद अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात चले गए थे।
विज्ञापन
यह हाईलेवल मीटिंग ऐसे वक्त हुई है, जब अमेरिका, अफगानिस्तान से अपने लोगों को जल्द से जल्द निकालने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रेस्क्यू मिशन को सबसे बड़ा और सबसे कठिन बताया है। ऐसे में टॉप अमेरिकी जासूस को काबुल भेजने के फैसले को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
अमेरिका को चेतावनी भी दी
इससे पहले तालिबान ने अमेरिका को खुली धमकी दी थी। तालिबान के प्रवक्ता सोहेल शाहीन ने सोमवार को एक बयान दिया था कि अगर अमेरिका अपने सैनिकों की वापसी में देरी करता है, तो उसको इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अमेरिकी सेना 31 अगस्त तक यहां से वापस चली जाए नहीं, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
तालिबान ने 15 अगस्त को किया था कब्जा
दरअसल, 15 अगस्त को अफगानिस्तान पर तालिबानी लड़ाकों के कब्जे के बाद से हालत बिगड़ती जा रही है। बड़ी संख्या में लोग देश छोड़ रहे हैं। इसके अलावा काबुल एयरपोर्ट पर लोग अपने वतन लौटने के लिए पहुंच रहे हैं। काबुल एयरपोर्ट पर लोगों की हिफाजत के लिए अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिकी सैनिकों के मुताबिक ही वहां से अलग-अलग देशों की विमानें उड़ान भर रहे हैं।
कुशल अफगान नागरिकों को देश के बाहर न ले जाए अमेरिका: तालिबान
इस बीच समाचार एजेंसी एएनआई ने एएफपी के हवाले से खबर दी है कि तालिबान के प्रवक्ता ने अमेरिका से कुशल अफगानों को देश से बाहर ले जाने के काम को रोकने के लिए कहा है। वहीं टोलोन्यूज ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद का कहना है कि अमेरिका को अफगान अभिजात वर्ग को देश छोड़ने के लिए प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि तालिबान पंजशीर में शांति से समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।