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ड्रैगन की मनमानी: जेल में मरने वाले तिब्बती भिक्षु की यादें मिटा रहे चीनी अफसर
Sun, 31 Oct 2021 12:55 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, बीजिंग।
एजेंसी, बीजिंग।
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 31 Oct 2021 12:55 AM IST
सार
चीन के कम्युनिस्ट अफसर धार्मिक इतिहास से तुल्कु को हटाते हुए उनकी स्मृति में समर्पित एक ऑनलाइन चैट समूह को भी बंद कर रहे हैं।
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चीन का झंडा (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Social media
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विस्तार
सिचुआन की जेल में रहस्यमय हालात में मौत का शिकार हुए लोकप्रिय तिब्बती भिक्षु तुल्कु तेनजिन डेलेक की यादें मिटाने के लिए चीन के अधिकारी उनकी सार्वजनिक चर्चा पर प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं। चीन के कम्युनिस्ट अफसर धार्मिक इतिहास से तुल्कु को हटाते हुए उनकी स्मृति में समर्पित एक ऑनलाइन चैट समूह को भी बंद कर रहे हैं।
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यह बात रेडियो फ्री एशिया (आरएफए) के लिए लिखने वाले सांग्याल कुंचोक ने एक जानकारी में दी। आरएफए के एक अन्य सूत्र ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर यह भी बताया कि चीन सरकार ने बौद्ध भिक्षुओं के मठों के इतिहास का दस्तावेजीकरण करने का आदेश दिया था और तिब्बतियों ने इसे संकलित भी किया तथा जनता के बीच वितरित किया। इन पुस्तकों को जब तिब्बतियों ने पढ़ा तो यह देखकर निराशा हुई कि उनमें तुल्कु तेनजिन डेलेक का जिक्र तक नहीं है।
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ऐसे में वे सोशल मीडिया पर एक-दूसरे से इस संबंध में चर्चा करने लगे। तभी ऑनलाइन समूह के 500 लोगों से पुलिस ने पूछताछ की और चैट समूह बंद कर दिया। बता दें कि डेलेक ने काम नालंदा थेकचेन जंगचुब चोलिंग मठ के पुनरुद्धार में मुख्य भूमिका निभाई थी लेकिन मठ के इतिहास से उनका नाम गायब कर दिया गया।
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13 वर्ष की सजा काट चुके थे डेलेक
बौद्ध बिक्षु तुल्कु तेनजिन डेलेक (65) को अप्रैल 2002 में सिचुआन की प्रांतीय राजधानी चेंगदू में एक सार्वजनिक चौक पर हुई बमबारी के आरोप में गलत ढंग से दोषी ठहराया गया और 12 जुलाई 2015 को उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। उन्हें 22 साल की सजा हुई थी जिसमें से 13 वर्ष की सजा वे काट चुके थे। उन्हें शुरुआत में मौत की सजा भी सुनाई गई थी। लेकिन बाद में उसे उम्रकैद में बदला गया।