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चीनी राजनयिक पर लगा अमेरिका में वैज्ञानिकों की भर्ती में मदद का आरोप
Sat, 27 Jun 2020 05:08 AM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 27 Jun 2020 05:08 AM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपती शी जिनपिंग
- फोटो : फाइल
अमेरिका और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने कहा है कि वाशिंगटन में चीनी राजदूत और न्यूयॉर्क शहर में एक चीनी राजनयिक ने अमेरिका में वैज्ञानिकों की भर्ती में गुप्त रूप से मदद की है। दस्तावेजों में इस राजनयिक का नाम क्यूई तियानकाई बताया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने बीजिंग द्वारा अमेरिका में जासूसी को लेकर चिंता जताई है।
वाशिंगटन एग्जामिनी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की एक संघीय अदालत में पिछले साल एक हलफनामा दायर किया गया था जिसे अप्रैल में खोला गया। इसमें चीन की हरकतों को गहराई से बताया गया है। इसमें से चीन शब्द को कोर्ट फाइलिंग से लगभग पूरी तरह हटा दिया गया है लेकिन एक बार इसका जिक्र दिखाई दिया।
हलफनामे के मुताबिक, कनेक्टिकट में एक वैज्ञानिक की जांच करते हुए एफबीआई ने पाया कि वह उच्च स्तरीय भर्ती के लिए चीन सरकार से नियंत्रित हो रहा था। एफबीआई ने बताया कि चीन में स्टेम सेल शोधकर्ता और आणविक आनुवंशिकी के छात्रों को प्रयोगशालाओं में काम करने के लिए स्थानांतरित करने की योजना थी। यह प्रौद्योगिकी अमेरिका में प्रमुख शैक्षणिक और निजी क्षेत्र के अनुसंधान प्लेटफॉर्मों में विकसित हुई है। ये वैज्ञानिक अब चीन में साउथ मेडिकल यूनिवर्सिटी में काम कर रहे हैं।
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वाशिंगटन एग्जामिनी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की एक संघीय अदालत में पिछले साल एक हलफनामा दायर किया गया था जिसे अप्रैल में खोला गया। इसमें चीन की हरकतों को गहराई से बताया गया है। इसमें से चीन शब्द को कोर्ट फाइलिंग से लगभग पूरी तरह हटा दिया गया है लेकिन एक बार इसका जिक्र दिखाई दिया।
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हलफनामे के मुताबिक, कनेक्टिकट में एक वैज्ञानिक की जांच करते हुए एफबीआई ने पाया कि वह उच्च स्तरीय भर्ती के लिए चीन सरकार से नियंत्रित हो रहा था। एफबीआई ने बताया कि चीन में स्टेम सेल शोधकर्ता और आणविक आनुवंशिकी के छात्रों को प्रयोगशालाओं में काम करने के लिए स्थानांतरित करने की योजना थी। यह प्रौद्योगिकी अमेरिका में प्रमुख शैक्षणिक और निजी क्षेत्र के अनुसंधान प्लेटफॉर्मों में विकसित हुई है। ये वैज्ञानिक अब चीन में साउथ मेडिकल यूनिवर्सिटी में काम कर रहे हैं।
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- वैज्ञानिक को अमेरिकी नागरिकता दिलाई
- चीन ने किया इनकार