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नेपाल में चीन की सक्रियता पर उठे सवाल, अंदरूनी मामलों में दखल क्यों दे रहा है चीन

Sat, 26 Dec 2020 03:24 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: अनिल पांडेय Updated Sat, 26 Dec 2020 03:24 PM IST
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Chinese ambassador steps up as Nepal communist party stares at a split
चीनी राजदूत हाउ यांछी - फोटो : Twitter

नेपाल में राजनीतिक उथल- पुथल के बीच चीन की राजदूत की गतिविधियों को यहां के तमाम हलकों में बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। वैसे काठमांडू स्थित चीनी राजदूत हाउ यांछी ने पहले भी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के अंदरूनी विवाद में दखल देने की कोशिश की थी, लेकिन इस हफ्ते संसद के निचले सदन को भंग कराने के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के फैसले के बाद उनकी गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। जिस दिन सदन भंग करने का एलान हुआ, उसके अगले ही दिन हाउ नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से मिलीं। उसके बाद उनकी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के एक धड़े के नेता पुष्प कमल दहल से मुलाकात हुई। शुक्रवार को उन्होंने दहल के खेमे की तरफ से नियुक्त किए गए पार्टी के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल से भेंट की।

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माधव कुमार नेपाल के कार्यालय ने नेपाल और हाउ की मुलाकात की पुष्टि की है। कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि बातचीत के दौरान हाउ ने कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन पर चिंता जताई। साथ ही नेपाल से उनके गुट के अगले कदम के बारे में सवाल पूछे। इसके पहले गुरुवार को हाउ ने पार्टी की स्थायी समिति की सदस्य और पूर्व ऊर्जा मंत्री वर्षा मान पुन से भेंट की थी। इसके पहले पिछले मई और जुलाई में भी हाउ की ऐसी गतिविधियां देखी गई थीँ। तब नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में टकराव बढ़ रहा था। तब बताया गया था कि हाउ ने कम्युनिस्ट नेताओं को एकता बनाए रखने की सलाह दी थी।
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पुष्प कमल दहल ने कार्यालय ने बताया कि चीनी राजदूत दहल के साथ आधा घंटा रहीं। लेकिन दहल के कार्यालय ने इस मुलाकात को “अनौपचारिक” बताया। लेकिन दहल के करीबी सूत्रों ने बताया कि बातचीत हाल की राजनीतिक घटनाओं पर केंद्रित रही। हाउ की गतिविधियों पर इसलिए करीबी नजर रखी जा रही है, क्योंकि नेपाल की राजनीति पर हमेशा ही बड़े पड़ोसी देशों का प्रभाव रहा है। पिछले डेढ़ महीने के अंदर कई प्रमुख भारतीय अधिकारियों ने नेपाल की यात्रा की थी। उनमें भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख और भारत के सेनाध्यक्ष भी शामिल थे। इनके अलावा विदेश सचिव हर्ष वर्धन शृंगला भी नेपाल यात्रा पर आए। इन यात्राओं के तुरंत बाद चीन के स्टेट काउंसिलर और रक्षा मंत्री वेई फेंगझे ने नेपाल की एक दिन की यात्रा की थी।

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नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन के बाद दहल खेमे ने दहल के साथ माधव कुमार नेपाल को सह-अध्यक्ष नियुक्त किया है। दूसरे गुट का नेतृत्व प्रधानमंत्री ओली कर रहे हैं। इनमें किस खेमे को पार्टी के असली गुट के रूप में मान्यता मिलती है, यह नेपाल के निर्वाचन आयोग को तय करना है। निर्वाचन आयोग ऐसा करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। नेपाल का सुप्रीम कोर्ट सदन भंग करने के राष्ट्रपति के फैसले की संवैधानिकता पर सुनवाई शुरू कर चुका है। कोर्ट के फैसले से ही यह तय होगा कि पुराना सदन बहाल होगा या फिर नए चुनाव कराए जाएंगे। राष्ट्रपति ने नया चुनाव अगले 30 अप्रैल और 10 मई को कराने का एलान किया है।

इस बीच चीनी राजदूत की गतिविधियों पर कई हलकों में असहजता देखी गई है। कम्युनिस्ट नेताओं से लगातार उनकी मुलाकातों को नेपाल के अंदरूनी मामले में दखल माना गया है। कई कम्युनिस्ट नेता चीन से अपना वैचारिक रिश्ता मानते हैं। लेकिन एक संवैधानिक लोकतांत्रिक देश में बाहरी ताकत का इस तरह सीधा सक्रियता दिखाना असामान्य है। विपक्षी नेपाली कांग्रेस चीन के ऐसे दखल पर पहले भी एतराज करती रही है। उसके नेता अब फिर दबी जुबान में इस पर सवाल उठा रहे हैं।

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