फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   China ›   yuan devaluation analysis

चीन के एक कदम से परेशानी में भारत

Sun, 16 Aug 2015 01:41 PM IST
Updated Sun, 16 Aug 2015 01:41 PM IST
विज्ञापन
yuan devaluation analysis

कमज़ोर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चीन ने अपनी मुद्रा युआन का तीन किस्तों में अवमूल्यन कर दिया है। गुरुवार को लगातार तीसरे दिन किए अवमूल्यन के बाद एक डॉलर के मुक़ाबले चीनी मुद्रा की क़ीमत 6.4010 युआन हो गई है। इस अवमूल्यन से एशियाई बाज़ारों पर असर पड़ा है और पिछले सात महीनों से गिरते निर्यात के कारण भारत के लिए संकट और बढ़ सकता है।

विज्ञापन


चीन की इस अवमूल्यन नीति में चारों ओर हड़कंप मचा है। मंगलवार को 'पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना' ने अपनी मुद्रा में 1.9 प्रतिशत की कमी लाते हुए एक डॉलर की क़ीमत 6.22298 युआन कर दी थी, जो पहले 6.1162 युआन थी। बुधवार को भी अवमूल्यन कर मुद्रा की क़ीमत 6.33 कर दी गई।

विज्ञापन

'देश की अर्थव्यवस्था ख़तरे के निशान पर पहुंच रही'

yuan devaluation analysis

मुद्रा मामलों के जानकार और कैंटोक्स के सीईओ फ़िलिप गेलिस कहते हैं, “मुद्रा नीति को लेकर चीन का यह अचानक यू टर्न दिखाता है कि देश की अर्थव्यवस्था ख़तरे के निशान पर पहुंच रही है।”

उनके मुताबिक़, “मुद्रा का संतुलन बनाए रखने की पिछली घोषणाओं के बावजूद चीन ने साफ़ साफ़ मुद्रा युद्ध का रास्ता अपना लिया है।” चीन अपनी मुद्रा की विनिमय दर ख़ुद तय करता है, हालांकि वो अब कह कह रहा है कि युआन के अवमूल्यन के लिए जो तरीक़ा इस्तेमाल किया गया है वो अधिक बाज़ार केंद्रित होगा। लेकिन ये छोटे-छोटे अवमूल्यन एक बड़ी योजना का हिस्सा हैं।

हालांकि निर्यात पर इसका कोई तुरंत असर नहीं पड़ने वाला है। सिंगापुर के डीबीएस बैंक ने अपने विश्लेषण में कहा है, “असल अवमूल्यन 10 से 30 प्रतिशत के बीच है और यह एक साल के लिए तब तक बना रहना चाहिए जब तक निर्यात में कोई सुधार नहीं होता।”

अभी क्यों?
जो सवाल पूछा जाना चाहिए वो ये नहीं कि चीन ने अपनी मुद्रा का कितना अवमूल्यन किया है बल्कि सवाल ये होना चाहिए कि अभी ही क्यों? चीन पर इस बात के लिए बहुत अंतरराष्ट्रीय दबाव है कि वो युआन को बाज़ार से नियंत्रित होने दे, जबकि सरकार वर्षों से इसका विरोध करती रही है। अमेरिका इस चीनी नीति का बहुत बड़ा आलोचक रहा है। उसके मुताबिक़, चीन निर्यात को बढ़ाने में मदद के लिए जानबूझ कर मुद्रा की क़ीमत को कम रखता है।

इसलिए सैद्धांतिक रूप से, चीन का कहना है कि वो वही कर रहा है जो अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय चाहता है। चीन के केंद्रीय बैंक के मुताबिक़, अब चीन युआन की क़ीमतों को अधिक लचीला होने की इजाज़त देगा। चीन के इस क़दम को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से पहले ही हरी झंडी मिल चुकी है। आईएमएफ़ ने रातों रात चीन के इस नए तरीके का स्वागत किया है। चीन आईएमएफ़ के ताक़तवर वैश्विक मुद्रा क्लब में शामिल होना चाहता है। यह ऐसा क़दम है, जिसे बिना युआन को बाज़ार के हवाले किए बिना असंभव सा है।

अमेरिका की नज़र

yuan devaluation analysis

इसलिए, सैद्धांतिक रूप से अमेरिका को भी चीन के इस क़दम का स्वागत करना चाहिए था। लेकिन अमरीकी ट्रेज़री डिपार्टमेंट ने कहा, “ये बदलाव कैसे होते हैं, हम इस पर नज़र बनाए रखेंगे और चीन पर सुधार के लिए दबाव बनाए रखेंगे। सुधारों से किसी भी तरह पीछे हटना मुश्किल पैदा करेगा।” सवाल वही है- लेकिन चीन ने अब ही क्यों अपनी मुद्रा का अवमूल्यन किया और बाज़ार की शक्तियों को अधिक खुले तौर पर खेलने की इजाज़त दी?

कुछ अर्थशास्त्री कहते हैं कि अवमूल्यन का यह क़दम तात्कालिक किया गया फैसला लगता है। अपेक्षा से कम निर्यात के आंकड़ों के जवाब में यह क़दम उठाया गया है। पिछले साल के मुक़ाबले निर्यात में आठ प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। जानकार कहते हैं कि चीनी अधिकारी इस बात से बहुत चिंतित थे कि अर्थव्यवस्था में संतुलन और निर्यात से घरेलू उपभोग की ओर जाने में उम्मीद से अधिक समय लग रहा है।

लेकिन चीनी फ़ैक्ट्रियों में दसियों लाख लोग लगे हुए हैं और किसी भी तरह की मंदी उनकी आजीविका पर संकट पैदा कर सकती है और नतीजन बड़े पैमाने पर नौकरियां जा सकती हैं। इसकी वजह से चीनी सरकार की लोकप्रियता तेजी से घट सकती है और संभवत: इससे सामाजिक अशांति पैदा हो सकती है।

विज्ञापन

संतुलन में समय लगता है

yuan devaluation analysis

सच्चाई ये है कि संतुलन में समय लगता है, लेकिन ऐसा लगता है कि चीनी अधिकारियों के अनुसार हो सकता है कि यह काफी लंबा समय ले रहा है। चीन के इस क़दम का असर एशियाई बाज़ारों पर दिखना शुरू भी हो गया है। सभी एशियाई मुद्राओं की क़ीमत कमोबेश गिर रही है। इसलिए इससे मुद्रा अवमूल्यन की दौड़ सी शुरू हो सकती है। एक ऐसी रेस जिसमें कोई नहीं जीतता है।

लेकिन चीन पहले ही कह चुका है कि वो मुद्रा बाज़ार को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं कर रहा है। एक बयान में पीपुल्स बैंक ऑफ़ चाइना ने कहा है, “घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थितियों को देखते हुए, फ़िलहाल युआन के लगातार अवमूल्यन का कोई आधार नहीं है।” लेकिन इस पर भरोसा करने की बजाय, बाज़ार चीन के अगले क़दम का इंतज़ार करना चाहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed