नोटबंदी को होने जा रहे दो महीने लेकिन बदले नहीं हालात
नोटबंदी के करीब दो महीने बाद अर्थव्यवस्था पर इसके असर को आंका जाए तो पाएंगे कि वैसे तो इससे समाज का हर वर्ग प्रभावित हुआ है, लेकिन असंगठित क्षेत्र के लोग सर्वाधिक प्रभावित हैं। यहां असंगठित क्षेत्र का तात्पर्य दिहाड़ी मजदूर, किसान या हाशिये से बाहर जीवन यापन कर रहे लोगों से है। जहां तक बैंकों की बात है तो वहां अभी भी लोगों को मनमाफिक नकदी नहीं मिल रही है। ढेर सारे एटीएम अभी भी नोट की बाट जोह रहे हैं।
दिल्ली केचावड़ी बाजार के एक हैंडटूल की दुकान में काम करने वाले संजय पिछले कई कई हफ्तों से तनाव में हैं, क्योंकि नोटबंदी की वजह से उनके यहां 80 फीसदी तक काम घट गया है। जो काम बचा भी है, उसका भुगतान कारोबारी चेक से कर रहे हैं इसलिए मजदूरी मिलने में परेशानी हो रही है। उसका कोई बैंक खाता है नहीं, क्योंकि कोई स्थायी पता नहीं है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गहरी समझ रखने वाले अर्थशास्त्री देवेंद्र शर्मा का कहना है कि नोटबंदी से असंगठित लोगों की जीविका सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। ऐसे लोगों में दिहाड़ी मजदूर, किसान, भूमिहीन मजदूर और राजमिस्त्री, बढ़ई, कुम्हार जैसे कारीगर हैं। इन्हें गांवों में कौन कहे, शहरों में भी रोजगार मिल नहीं रहा है।
लोगों को मनमाफिक नोट नहीं मिल पा रहे हैं
बैंकों में भी स्थिति पहले जैसी
नोटबंदी के दो महीने बीतने के बाद भी बैंकों में लोगों को मनमाफिक नोट नहीं मिल पा रहे हैं। सरकार चाहे कुछ भी बोले, लेकिन स्थिति यह है कि ढेर सारे एटीएम अभी भी नकदी की राह देख रहे हैं।
राष्ट्रपति ने किया सचेत
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पिछले दिनों अपने संदेश में कहा है कि नोटबंदी से अस्थायी आर्थिक मंदी संभव है। साथ ही उन्होंने कहा कि गरीबी से निपटने और इसे खत्म करने के लिए ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी।
उद्योग संगठन भी हैं सशंकित
उद्योग संगठन फिक्की के नए अध्यक्ष पंकज आर. पटेल का कहना है कि नोटबंदी से देश की विकास दर को नुकसान होगा, लेकिन यह एक फीसदी से अधिक नहीं होगा। उन्होंने कहा है कि उद्योग जगत अब पटरी पर लौटता दिख रहा है।
उनके मुताबिक अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्र पर इसका असर नहीं है। सेवा क्षेत्र काफी अच्छा कर रहा है। लेकिन असंगठित क्षेत्र प्रभावित हुआ है और वस्त्र, हीरा और संपत्ति कारोबार पर भी इसका असर पड़ा है जो कि करीब 10 फीसदी तक है। कुछ उद्योगों पर 25 फीसदी तक भी असर पड़ा है, जिसमें मोटर वाहन क्षेत्र शामिल हैं।
उद्योग संगठन एसोचैम के महासचिव डीएस रावत का कहना है कि इसका सीधा असर जीडीपी की विकास दर पर पड़ेगा। उनका कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर रोजगार पर पड़ रहा है, विशेषकर छोटे-छोटे कारखानों में और निर्यात वाली इकाइयों में दिखेगा।
मुद्रास्फीति रहेगी काबू में
हालांकि विश्लेषक कहते हैं कि नोटबंदी की वजह से महंगाई की दर काबू में रहेगी। इस पर शर्मा कहते हैं कि मुद्रास्फीति तो काबू में तो रहेगी ही क्योंकि जब बाजार में चीजों के दाम ही नहीं मिल रहे हैं तो महंगाई कहां रहेगी।