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ट्रेड वॉर: चीन ने परियोजनाओं से खींचे हाथ, अमेरिकी तनातनी के चलते बीजिंग पर पड़ रहा बुरा असर
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, शंघाई
Updated Sun, 01 Jul 2018 06:39 AM IST
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china america relations
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वैश्विक स्तर पर अमेरिकी प्रभाव को तोड़कर अपनी ताकत बढ़ाने के लिए पिछले 5 साल में किए गए अंधाधुंध निवेश से चीन ने अचानक हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं। ये सैकड़ों अरब रुपये का ये निवेश एशिया, पूर्वी यूरोप और अफ्रीका में तमाम बड़ी परियोजनाओं में कर्ज के जरिए किया गया था। इनमें से बहुत सारी परियोजनाएं चीन की महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (ओबीओआर)’ योजना से इन देशों के जुड़ने पर हुए समझौते के तहत चलाई जा रही थीं। चीन के अचानक इन योजनाओं से पीछे हटने के लिए उसकी अर्थव्यवस्था में इस भारी-भरकम निवेश से आ रही मंदी और अमेरिका के साथ छिड़े ट्रेड वॉर (व्यापार युद्ध) के कारण उसके अपने घरेलू बाजार पर पड़ रहे बुरे प्रभाव को भी जिम्मेदार माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, चीनी अधिकारियों को सावधान किया गया है कि ओबीओआर के तहत हो रहे सौदे में वे पैसा लगाते समय ये ध्यान रखें कि क्या ये देश इस पैसे को वापस करने की स्थिति में हैं। इस कॉशन नोट से ही कर्ज दिए जाने में कमी आई है। अपने यहां की कंपनियों को ज्यादा कर्ज देने पर कई देशों ने भी सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ चाइना की चेयरपर्सन हु जियाओलियान ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति में बहुत अस्थिरता है और इसमें घाटे की आशंका बढ़ रही है।
कैसे दिए गए कर्ज
- राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2013 में शुरू की थी ओबीओआर
- इससे जुड़े देशों को इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए चीन से मिलता है कर्ज
- बदले में इन देशों को योजना व निर्माण का सारा काम चीनी कंपनियों से ही कराना होता है
- इससे चीन की घरेलू कंपनियों का इंटरनेशनल मार्केट में बढ़ रहा था दबदबा
कैसे पड़ रहा है प्रभाव
36.2 अरब डॉलर के सौदे किए हैं चीनी कंपनियों ने 2018 में ओबीओआर के तहत
06 फीसदी कमी आई है 2017 के पहले 5 महीनों में हुए सौदों के मुकाबले इस बार
2016 के मुकाबले 2017 में सौदों में आई कमी का अंतर दशमलव अंकों में था
2600 परियोजनाओं को अब तक ओबीओआर के तहत दिया गया है कर्ज
200 अरब डॉलर का है ये कर्ज चाइना बैंकिंग एंड इंश्योरेंस रेगुलेटरी आयोग के मुताबिक
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सूत्रों के अनुसार, चीनी अधिकारियों को सावधान किया गया है कि ओबीओआर के तहत हो रहे सौदे में वे पैसा लगाते समय ये ध्यान रखें कि क्या ये देश इस पैसे को वापस करने की स्थिति में हैं। इस कॉशन नोट से ही कर्ज दिए जाने में कमी आई है। अपने यहां की कंपनियों को ज्यादा कर्ज देने पर कई देशों ने भी सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ चाइना की चेयरपर्सन हु जियाओलियान ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति में बहुत अस्थिरता है और इसमें घाटे की आशंका बढ़ रही है।
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कैसे दिए गए कर्ज
- राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2013 में शुरू की थी ओबीओआर
- इससे जुड़े देशों को इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए चीन से मिलता है कर्ज
- बदले में इन देशों को योजना व निर्माण का सारा काम चीनी कंपनियों से ही कराना होता है
- इससे चीन की घरेलू कंपनियों का इंटरनेशनल मार्केट में बढ़ रहा था दबदबा
कैसे पड़ रहा है प्रभाव
36.2 अरब डॉलर के सौदे किए हैं चीनी कंपनियों ने 2018 में ओबीओआर के तहत
06 फीसदी कमी आई है 2017 के पहले 5 महीनों में हुए सौदों के मुकाबले इस बार
2016 के मुकाबले 2017 में सौदों में आई कमी का अंतर दशमलव अंकों में था
2600 परियोजनाओं को अब तक ओबीओआर के तहत दिया गया है कर्ज
200 अरब डॉलर का है ये कर्ज चाइना बैंकिंग एंड इंश्योरेंस रेगुलेटरी आयोग के मुताबिक