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सुषमा ने जैश-ए-मोहम्मद की हकीकत सामने रखी तो चीन ने दिया पाकिस्तान को झटका

Wed, 27 Feb 2019 10:24 PM IST
Gaurav Pandey वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Gaurav Pandey Updated Wed, 27 Feb 2019 10:24 PM IST
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Sushma put forward the reality of Jaish-e-Mohammad, China shocked Pakistan
सुषमा स्वराज (फाइल फोटो)

पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को चीन और रूस का साथ मिला है। 16वीं रूस, चीन, भारत (आरआईसी) बैठक में पुलवामा आतंकी हमले का जिक्र करते हुए सुषमा ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेर लिया। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुषमा ने कहा, ‘पुलवामा हमले के पीछे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ रहा है और अब आतंक पर जीरो टॉलरेंस का वक्त आ गया है।’ 

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सुषमा स्वराज ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से भी मुलाकात की। बैठक के बाद चीनी विदेश मंत्री ने अपने दोस्त पाक को झटका देते हुए कहा कि हम आतंकवाद और कट्टरपंथ की जमीन खत्म करने में सहयोग करेंगे। रूस व चीनी विदेश मंत्रियों की बैठक में सुषमा स्वराज ने बताया कि क्यों भारत को पाक में घुसकर आतंकी ठिकाने नष्ट करने की कार्रवाई करना पड़ी। 
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उन्होंने दो-टूक कहा कि पुलवामा हमले में जैश का हाथ है और उसका संचालन पाक से हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘पाक हमेशा आतंकी संगठनों को पनाह देना नकारता रहा है जबकि हमें पुख्ता खुफिया सूचना मिली कि जैश भारत में और हमले करने की फिराक में है। इसीलिए हमने कार्रवाई की और ध्यान रखा कि इस लक्ष्य में आम लोगों को कोई नुकसान न पहुंचे। हमारा मकसद सिर्फ जैश के ठिकानों को नष्ट करना था, हमने सैन्य ठिकानों तक को निशाने पर नहीं लिया।’  

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आतंकवाद के खिलाफ हर मदद को तैयार चीन

उधर, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अपने जिगरी दोस्त पाक को हैरत में डालते हुए कहा कि वह आतंकवाद के खिलाफ हर संभव मदद को तत्पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘यदि चीन के हित साधने की नौबत आएगी तो वह अपने रुख में बदलाव भी कर सकता है।’ एक राजनयिक ने कहा कि चीन अपने मित्र पाक को कह सकता है कि भारत के साथ संघर्ष में वह बीजिंग से किसी मदद की उम्मीद न करे। वह उसे सिर्फ आर्थिक मोर्चे पर सीमित साथ दे सकता है। 

आतंकवाद के कड़े विरोध की पुष्टि करते हुए, भारत, रूस और चीन ने संयुक्त बयान में कहा कि आतंकी समूहों का इस्तेमाल किसी भी तरह से राजनीतिक और भू-राजनीतिक लक्ष्यों के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। बयान के मुताबिक आतंकी कार्रवाई करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उन्हें न्याय के कठघरे में ठहराना चाहिए। आरआईसी के विदेश मंत्रियों की 16 वीं बैठकमें, तीनों देशों ने आतंकवाद की कड़ी निंदा की।

हम पाक के साथ और तनाव बढ़ाना नहीं चाहते : भारत

भारत ने विश्व बिरादरी को आश्वस्त किया कि वह पाक के साथ तनाव को और बढ़ाना नहीं चाहता है। सुषमा ने रूस-भारत-चीन समूह के विदेश मंत्रियों की 16वीं बैठक में कहा, ‘बालाकोट कार्रवाई सैन्य अभियान नहीं थी, न ही हमने किसी भी सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना बनाया है। हमने सिर्फ जैश के ठिकानों को निशाना बनाया है। भारत तनाव को और नहीं बढ़ाना चाहता बल्कि जिम्मेदारी व संयम से काम करता आ रहा है।’


आतंकवाद के खिलाफ आरआईसी एकजुट
पुलवामा हमले के मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर पाक को अलग-अलग करने के लिए भारत को चीन और रूस दोनों का साथ मिला है। हालांकि चीन ने भारत और पाक दोनों को संयम बरतने की सलाह दी है लेकिन साथ ही दोनों देशों ने आतंकवाद पैदा करने वाली जमीन को खत्म करने के लिए एक करीबी नीति पर समन्वय के लिए सहमति जताई। भारत के लिहाज से यह सहमति बेहद अहम है क्योंकि चीन-पाक में करीबी दोस्ती है और रूस भी उसका करीबी हो रहा 

पुलवामा हमले की पृष्ठभूमि में आतंकवाद पर हुई वार्ता के बाद चीनी विदेश मंत्री ने कहा कि हमारे बीच करीबी नीतिगत समन्वय व सहयोग के जरिए सभी स्वरूपों में आतंक से लड़ने पर सहमति बनी है। खासतौर पर जहां कहीं आतंकवाद पनप रहा है, उन्हें खत्म करना जरूरी है। यहां आतंकवाद के पनपने की जगह शब्द का इस्तेमाल अहम है क्योंकि बालकोट में जैश के शिविर पर हमले के बाद चीन ने अपने दोस्त पाक का बचाव करते हुए कहा था कि पाक खुद आतंक का विरोध करता है।

पाक को चीन ने नहीं दिया ठोस आश्वासन

पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बालकोट में ‘जैश-ए-मोहम्मद’ के ठिकानों को नष्ट किए जाने के चंद घंटों बाद अपने सरपरस्त चीनी विदेश मंत्री वांग यी से टेलीफोन पर बातचीत करते हुए अपना रोना रोया। बताया जाता है कि चीनी विदेश मंत्री वांग ने कुरैशी की बातचीत ध्यान से सुनी, लेकिन कोई भी आश्वासन नहीं दिया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा कि चीन ने भारत-पाक से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने भारत से विशेष रूप से कहा है कि वह अन्तरराष्ट्रीय सहयोग से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखे।

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