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जिनपिंग के साथ रिश्तों को पटरी पर लाने का प्रयास करेंगे पीएम मोदी
शशिधर पाठक, अमर उजाला
Updated Sun, 31 Jul 2016 08:17 PM IST
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Prime Minister Narendra Modi
- फोटो : ani
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एनएसजी में भारत के प्रवेश के विरोध और चीन के सैनिकों की हाल में घुसपैठ से दोनों देशों के बीच बिगड़े माहौल को सुधारने की नई पहल कर सकते हैं। प्रधानमंत्री चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सितंबर महीने में एक गर्मजोशी भरी पहल की तैयारी में है। दोनों देशों के शिखर नेताओं की द्विपक्षीय भेंट की तैयारी चल रही है। विदेश मंत्रालय सूत्रों के अनुसार 4-5 सितंबर को ह्वांग्झू(चीन) में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आपसी हितों पर चर्चा कर सकते हैं।
जी-20 शिखर सम्मेलन एक शक्तिशाली फोरम है। 11वें जी-20 की मेजबानी चीन कर रहा है। मौजूदा समय में यह इसलिए भी काफी अहम है, क्योंकि पिछले साल तुर्की में जी-20 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले पेरिस में आतंकी हमला हुआ था। इस समय भी दुनिया के तमाम देशों में आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन के हमले की आशंका बनी है। भारत भी लंबे समय से पाकिस्तान से प्रयोजित आतंकवाद से पीडि़त है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया के देशों से आतंकवाद को लेकर दोहरा मानदंड न अपनाने की अपील कर सकते हैं। भारत का पहले से मानना है कि आतंकवाद, सिर्फ आतंकवाद है। इसको लेकर किसी तरह का विभेद नहीं किया जाना चाहिए।
समझा जा रहा है कि जी-20 के बरअक्स प्रधानमंत्री की चार-पांच देशों के शिखर नेताओं से भी द्विपक्षीय चर्चा संभव है। इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रमुख हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव चल रहा है और 20 जनवरी 2017 तक ही ओबामा कार्यकाल है। इस क्रम में मोदी-ओबामा की भेंट काफी अहम हो सकती है। दूसरी तरफ चीन और भारत रिश्तों को मजबूती देने का लगातार प्रयास कर रहें हैं। सीमा विवाद से लेक र कई अन्य अहम मुद्दे हैं। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात काफी अहम हो सकती है।
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गौरतलब है कि चीन ने उज्बेकिस्तान के ताशकंद में शांघाई सहयोग संघ की बैठक के दौरान एनएसजी में भारत के दावों को खारिज कर दिए था। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की शी जिनपिंग से भेंट की पहली संभवना बन रही है। इसी तरह से भारत में आतंकवाद के सूत्रधार हाफिज मोहम्मद सईद और जैश-ए- मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहता है। संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध का प्रयास कर रहा है। चीन के साथ संतुलित द्विपक्षीय व्यापार भी बड़ा मुद्दा है। समझा जा रहा है कि 4-5 सितंबर को दोनों शिखर नेताओं की भेंट में यह अहम मुद्दा बन सकता है।
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जी-20 शिखर सम्मेलन एक शक्तिशाली फोरम है। 11वें जी-20 की मेजबानी चीन कर रहा है। मौजूदा समय में यह इसलिए भी काफी अहम है, क्योंकि पिछले साल तुर्की में जी-20 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले पेरिस में आतंकी हमला हुआ था। इस समय भी दुनिया के तमाम देशों में आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन के हमले की आशंका बनी है। भारत भी लंबे समय से पाकिस्तान से प्रयोजित आतंकवाद से पीडि़त है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया के देशों से आतंकवाद को लेकर दोहरा मानदंड न अपनाने की अपील कर सकते हैं। भारत का पहले से मानना है कि आतंकवाद, सिर्फ आतंकवाद है। इसको लेकर किसी तरह का विभेद नहीं किया जाना चाहिए।
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समझा जा रहा है कि जी-20 के बरअक्स प्रधानमंत्री की चार-पांच देशों के शिखर नेताओं से भी द्विपक्षीय चर्चा संभव है। इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रमुख हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव चल रहा है और 20 जनवरी 2017 तक ही ओबामा कार्यकाल है। इस क्रम में मोदी-ओबामा की भेंट काफी अहम हो सकती है। दूसरी तरफ चीन और भारत रिश्तों को मजबूती देने का लगातार प्रयास कर रहें हैं। सीमा विवाद से लेक र कई अन्य अहम मुद्दे हैं। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात काफी अहम हो सकती है।
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गौरतलब है कि चीन ने उज्बेकिस्तान के ताशकंद में शांघाई सहयोग संघ की बैठक के दौरान एनएसजी में भारत के दावों को खारिज कर दिए था। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की शी जिनपिंग से भेंट की पहली संभवना बन रही है। इसी तरह से भारत में आतंकवाद के सूत्रधार हाफिज मोहम्मद सईद और जैश-ए- मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहता है। संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध का प्रयास कर रहा है। चीन के साथ संतुलित द्विपक्षीय व्यापार भी बड़ा मुद्दा है। समझा जा रहा है कि 4-5 सितंबर को दोनों शिखर नेताओं की भेंट में यह अहम मुद्दा बन सकता है।