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SCO सम्मेलन: जिनपिंग से मिले पीएम मोदी, बोले- हमारे मजबूत संबंधों से दुनिया को मिलेगी शांति

Sat, 09 Jun 2018 09:20 PM IST
एजेंसी, किंगदाओ (चीन)
एजेंसी, किंगदाओ (चीन) Updated Sat, 09 Jun 2018 09:20 PM IST
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PM Modi met Chinese President Xi Jinping in sco summit

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को चीन के किंगदाओ शहर में राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। 

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पीएम मोदी ने कहा, भारत और चीन के मजबूत व स्थिर संबंधों से दुनिया को स्थिरता तथा शांति की प्रेरणा मिल सकती है। यह मुलाकात वुहान अनौपचारिक सम्मेलन के बाद हमारी दोस्ती को और मजबूती देगी। 
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मोदी और जिनपिंग के बीच छह हफ्ते में हुई यह दूसरी वार्ता है। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का खाका खींचा। साथ ही वुहान में लिए गए फैसलों के क्रियान्वयन की समीक्षा की। किंगदाओ में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन से पहले हुई मुलाकात में द्विपक्षीय संपर्क के सभी पहलुओं पर बात हुई। 
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दोनों देशों ने संबंधों को नए सिरे से स्थापित का इच्छा प्रकट की। पिछले साल के दोकलम गतिरोध और कई दूसरे विवादित मुद्दों के चलते प्रभावित हुए भरोसे को फिर से बहाल करने पर भी सहमति बनी। पीएम मोदी ने जिनपिंग से मुलाकात के बाद एक ट्वीट कर कहा, इस वर्ष से एससीओ के मेजबान राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। 

हमारी वार्ता भारत-चीन संबंधों को नई मजबूती देगी। वहीं राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा, इस बैठक को दोनों देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बहुत अच्छी तरह से लिया है। संबंधों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक सकारात्मक माहौल बन रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक ट्वीट कर इसे ‘गर्मजोशी भरी और आगे बढ़ने वाली बैठक’ बताया। इससे पहले, एससीओ के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पीएम मोदी दो दिन की यात्रा पर किंगदाओ पहुंचे।

ब्रह्मपुत्र और चावल के निर्यात पर करार

PM Modi met Chinese President Xi Jinping in sco summit
pm china

दोनों देशों के बीच ब्रह्मपुत्र नदी से संबंधित हाइड्रोलॉजिकल सूचनाओं को साझा करने पर एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान हुआ है। भारत से बासमती के अलावा दूसरी तरह के चावल के भी निर्यात की आवश्यकताओं की व्यवस्था में बदलाव से जुड़े करार पर भी हस्ताक्षर हुए हैं। 

वुहान में बनी सहमति की समीक्षा 

वुहान अनौपचारिक वार्ता के दौरान एशिया की दो बड़ी शक्तियों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर नजरिया साझा किया गया था। मोदी-जिनपिंग ने इसके क्रियान्वयन में हुई प्रगति की समीक्षा की।

भविष्य के रिश्तों का खाका खींचा

भारत में चीन के राजदूत लुओ झाओहुई ने कहा कि दोनों नेताओं ने अपना ध्यान वुहान में बनी सहमति के क्रियान्वयन पर केंद्रित रखा। साथ ही भारत-चीन के भविष्य के रिश्तों का खाका खींचा।

क्या है शंघाई सहयोग संगठन

एससीओ की स्थापना 2001 में हुई थी। इसका उद्देश्य सीमा विवादों का हल, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ाना और मध्य एशिया में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करना है। इसके सदस्यों में चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, भारत और पाकिस्तान हैं।

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