भारत-चीन में बढ़ा भरोसा, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की ताकत मिलकर करेगी पूरी दुनिया का भला
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चीन की दो दिवसीय यात्रा पर वुहान पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ लंच और प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के बाद कहा कि अनौपचारिक शिखर वार्ता से दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ा है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि दोनों देशों की ताकत मिलकर पूरी दुनिया का भला करेगी। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अगले साल भारत में जिनपिंग को ऐसी ही अनौपचारिक बातचीत के लिए आमंत्रित कर उन्हें खुशी होगी।
अगले साल शी का भारत में स्वागत करने पर होगी खुशी: मोदी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया कि शुक्रवार सुबह जिनपिंग ने हुबेई के म्यूजियम में मोदी का भव्य स्वागत किया। इस दौरान दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के मुद्दे पर विचार साझा किए। म्यूजियम में सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होने से पहले दोनों नेताओं ने हाथ मिलाते हुए तस्वीरें खिचवाईं। इसके बाद ईस्ट लेक के नजदीक गेस्ट हाउस में मोदी और जिनपिंग के अलावा दोनों पक्षों के छह-छह अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत की। इस दौरान रणनीतिक और भविष्य में बेहतर संबंधों को लेकर हुई प्रगति की समीक्षा की गई।
प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता से पहले हुबेई म्यूजियम में प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भारत और चीन की मिलीजुली संस्कृति देखने को मिली। रवीश कुमार ने ट्वीट किया कि दोनों देशों का सांस्कृतिक जुड़ाव बॉलीवुड, योग और हमारी संस्कृति के सदियों से चीन पर प्रभाव में स्पष्ट दिखाई देता है।
गुजरात के सीएम रहते हुबेई पहुंचे थे मोदी
एक-दूसरे से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने जिनपिंग को हुबेई के अपने पिछले दौरे के अनुभवों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब वह थ्री जॉर्ज बांध का अध्ययन करने के लिए हुबेई पहुंचे थे। उन्होंने कहा, 'जिस तेजी से आपने इस बांध को बनाया, उसने मुझे काफी प्रभावित किया। इसलिए मैंने पूरी जानकारी जुटाने के लिए एक दिन बांध पर बिताया। यांगजी नदी पर बनाई गई दुनिया के सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना तके पानी को कई तरह से नियंत्रित करने की प्रणाली है। यह बांध 2309 मीटर लंबा और 185 मीटर ऊंचा है। इसमें 32 पनबिजली टर्बो जेनरेटर हैं।
जिनपिंग ने मोदी को दिखाई प्रदर्शनी
एक-दूसरे के साथ समय बिताने के दौरान राष्ट्रपति जिनपिंग ने मोदी को हुबेई म्यूजियम में जेंग संस्कृति के अवशेषों और खजानों से जुड़ी मार्किस यी की प्रदर्शनी दिखाई। म्यूजियम में बड़ी संख्या में चीन के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवशेषों को संजोया गया है।
ऐसी वार्ता बननी चाहिए परंपरा : मोदी
ईस्ट लेक गेस्ट हाउस में हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत के दौरान मोदी ने सदियों पुराने भारत-चीन संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि दोनों देशों के पास साथ काम करने के बहुत मौके हैं। इससे दोनों देशों के लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा, 'दोनों देशों के बीच ऐसी अनौपचारिक बातचीत की परंपरा बननी चाहिए। मुझे 2019 में भारत में ऐसी ही अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए जिनपिंग को आमंत्रित करने में खुशी होगी।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों पर दुनिया की 40 फीसदी आबादी के लिए काम करने की जिम्मेदारी है। हमारे पास अपने लोगों के साथ ही दुनिया की भलाई के लिए काम करने का मौका है। मोदी ने 2000 साल के इतिहास को याद करते हुए कहा कि भारत-चीन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति और मजबूती दी है। करीब 1600 साल दोनों देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में 50 फीसदी हिस्सेदारी रही।
उन्होंने जिनपिंग से कहा, 'शायद मैं पहला भारतीय प्रधानमंत्री हूं, जिसके स्वागत के लिए आप दो बार बीजिंग से बाहर आए हैं। इस पर भारतीयों को गर्व होता है। इससे पहले 2015 में जिनपिंग ने अपने गृहनगर शिआन में मोदी का स्वागत किया था। पिछले पांच साल में हमने काफी कुछ हासिल किया है। हम कई मौके पर एक-दूसरे से मिले। दोनों देशों ने अपने संबंधों और सहयोग को मजबूती दी है। हमने सकारात्मक प्रगति की है।