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महिला-पुरूष संबंधों को लेकर 20 साल में हुई 'नई क्रांति'

Tue, 01 Mar 2016 05:33 PM IST
Updated Tue, 01 Mar 2016 05:33 PM IST
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last 20 year and china sexual revolution

चीन में बीते 20 साल में सेक्स के प्रति रवैए में जबरस्त बदलाव हुए हैं। देश की पहली महिला सेक्सोलॉजिस्ट ली यिनही ने बीबीसी से कहा, "मैंने 1989 के सर्वे में पाया था कि 15.50 फीसदी लोग विवाह से पहले सेक्स संबंध बनाते थे।

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पर दो साल पहले के सर्वे में मैंने पाया कि ऐसे लोगों की तादाद बढ़कर 71 फीसदी हो गई है।" ली यिनही इसके लिए 'क्रांति' शब्द का इस्तेमाल करती हैं। वे कहती हैं कि 1997 के पहले तक विवाह पूर्व सेक्स संबंध को 'गुंडागर्दी' माना जाता था। इसके लिए कानूनी तौर पर सजा तक हो सकती थी। इसी तरह पोर्नोग्राफी, वेश्यावृत्ति और 'स्विंगर्स पार्टियां' भी काफी बढ़ी हैं।
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ब्रुकिंग्स इंस्टीच्यूट में भाषण देते हुए ली ने कहा कि 1996 में एक बाथहाउस मालिक को वेश्यावृत्ति कराने के आरोप में मौत की सजा दी गई थी। आज के दिन इस तरह के अपराध के लिए अधिकतम सजा यह हो सकती है कि वह व्यवसाय बंद करा दिया जाए। इसी तरह 1980 तक पोर्न सामग्री छापने वाले को मौत की सज़ा दी जा सकती थी। पर अब इसमें नरमी कर दी गई है।
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'स्विंगर्स पार्टी' अब भी ग़ैरक़ानूनी है, पर अब यह अधिक जगह आयोजित की जाती है। वे कहती हैं, "कोई इसकी शिकायत ही नहीं करता, इसलिए इस ओर किसी का ध्यान भी नहीं जाता है।" ली अमेरिका के पिट्सबर्ग में 1980 के दशक में समाज विज्ञान पढ़ती रहीं। वे जब चीन लौटीं तो पाया कि वहां अब भी माओ के समय का पुराना माहौल चल रहा है। कम्युनिस्ट शासन के शुरुआती दिनों में प्रेम पर लिखना बुर्जुआ काम समझा जाता था।

'सेक्स के बारे में कुछ लिखने पर 1980 तक रोक लगी हुई थी'

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चीन में प्रेम पर लिखना 1950 के बाद ही मुमकिन हो सका, पर सेक्स के बारे में कुछ लिखने पर 1980 तक रोक लगी हुई थी। ली की किताब 'द सबकल्चर ऑफ होमोसेक्सुअलिटी' 1998 में छपी। पर यह किताब वे लोग ही खरीद सकते थे, जिनके पास उनके नियोक्ता या वरिष्ठ अधिकारी की सिफारिशी चिट्ठी थी।

उनकी अगली किताब 'द सबकल्चर ऑफ सेडोमेसोचिस्म' तो इससे भी दो कदम आगे थी। ली ने बीबीसी से कहा, "मुझे किताब की सभी प्रतियां जला देने को कहा गया। पर उस समय तक इसकी 60,000 प्रतियां बिक चुकी थीं। इसलिए किताबें जलाने का नोटिस प्रभावी नहीं हुआ।"

चीन का कोई भी प्रकाशक बाइसेक्सुअलिटी पर उनकी किताब का अनुवाद छापने को तैयार नही हुआ। उन्हें हॉंन्ग कॉंन्ग में प्रकाशक ढूंढना पड़ा।

लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं। कम्युनिस्ट पार्टी सेक्सुअलिटी को अब निजी बात मानने लगी है। 'चीन में सेक्स' किताब के सह-लेखक हायजिंग यू कहते हैं, "वे अपने आप को ऐसे लेखक के रूप में पेश करती हैं, जो सेक्सुअलिटी के अंतरराष्ट्रीय मानक पेश करता हो। इसलिए उनके सहकर्मी, पाठक और सरकार ने भी उन्हें छूट दे रखी है।"

'बेहतर है कि समलैंगिकता को मंजूर कर लिया जाए'

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ली कहती हैं कि सेक्स के प्रति कम्युनिस्ट पार्टी के रवैए में बदलाव की वजह 'एक बच्चे की नीति' रही है. यह नीति वहां 1979 से 2015 तक लागू रही। वे कहती हैं, "इस नीति से लोगों को एक या अधिकतम दो बच्चे पैदा करने की छूट मिली।

इससे बच्चा पैदा करने के बाद सेक्स का आपका मकसद बदल जाता है या आप सेक्स से अलग हो जाते हैं। अब मजे के लिए सेक्स को उचित ठहराया जाने लगा।"

चाइना डेली में 2011 में शंघाई प्राइड मार्च पर खबर से सब कुछ बदल गया। आधिकारिक मीडिया भी अब समलैंगिक समुदाय के बारे में लिखने लगा था। चीन के ऑनलाइन वीडियो प्लेटफॉर्म 'आइचीई' पर किशोरों के समलैंगिक रिश्तों पर बना नाटक 'एडिक्शन' बहुत लोकप्रिय हुआ। बाद में इसे बगैर वजह बताए वहां से हटा दिया गया।

लेकिन उसके पहले माइक्रोब्लोगिंग साइट वीबो पर इससे जुड़े लाखों पोस्ट हो चुके थे। ली ने चीनी संसद के सामने प्रस्ताव रखा है कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दे दी जाए। वे कहती हैं, "बेहतर है कि समलैंगिकता को मंजूर कर लिया जाए।"

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