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लद्दाख में चीनी सेना की घुसपैठ को भारत ने किया नाकाम, खबर से तिलमिलाया ड्रैगन

Thu, 17 Aug 2017 01:58 PM IST
बीबीसी, हिंदी
बीबीसी, हिंदी Updated Thu, 17 Aug 2017 01:58 PM IST
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India failed to infiltrate the Chinese army in Laddakh, irritates PLA
INDIAN ARMY - फोटो : file photo
15 अगस्त के दिन भारत के लद्दाख क्षेत्र में चीनी सेना की घुसपैठ को नाकाम करने की खबर को चीन की ऑनलाइन मीडिया ने हाथों हाथ लिया है। यह खबर चीन की अंग्रेजी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने छापी है। भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों की सेनाओं ने लद्दाख में पत्थरबाजी की। यह क्षेत्र भारत के कश्मीर में पड़ता है।
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ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अंत में भारतीय सेना से बिना किसी शर्त पीछे हटाने की चीन की मांग को दुहराने के साथ ही बीजिंग की चेतावनी भी दुहराई गई है कि "चीन अपनी जायज अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हर संभव उपाय करेगा।" गौरतलब है कि जून के महीने से भारत और चीन की सेना भूटान की सीमा से सटे एक विवादित इलाके डोकलाम में आमने सामने डटी हैं।
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ऑनलाइन यूजर्स ने किया भारत पर हमला

India failed to infiltrate the Chinese army in Laddakh, irritates PLA
भारत-चीन सीमा
कई चीनी ऑनलाइन यूजर्स ने लद्दाख की सीमा पर हुए इस ताजा झड़प की रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ग्लोबल टाइम्स की लेख पर खबर लिखे जाने तक 13,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं दी गईं, जिसमें अधिकतर लोगों ने लड़ाकू रुख अख्तियार किया।

लान्जो सिटी से एक यूजर ने लिखा, "इतना लंबा टकराव। दोनों पक्षों के बीच इस तरह लंबे समय तक न युद्ध, न शांति का माहौल दीर्घकालिक समाधान नहीं है। इस विकट स्थिति को सुलझाया जाना जरूरी है। जापान और अमेरिका को चेतावनी देने के लिए उसे मार डालो।"

बीजिंग से एक यूजर 'कैच अप विद द सन' ने लिखा, "भारत पर हमले के लिए हमें किसी भ्रम की स्थिति में नहीं रहना चाहिए। वो ईमानदारी से इसे वापस नहीं लेगा।" हालांकि, कुछ इंटरनेट यूजर्स ने चीन को भारत के साथ युद्ध की स्थिति से बचने की सलाह भी दी है।

चीन के हित में नहीं है युद्ध
चोंगक्विंग से एक यूजर ने लिखा, "भारत से दुश्मनी, और भारत से लड़ने की क्षणिक संतुष्टि, चीन के रणनीतिक हित में नहीं है।" हुबेई प्रांत के वुहान सिटी से एक यूजर ने लिखा, "अगर हम आज आक्रमणकारियों से नहीं लड़ते हैं, तो कल वियतनामी भारत से सीखेंगे।"

गुआंग्डोंग प्रांत के झांनजियांग से एक इंटरनेट यूजर ने लिखा, "डोंगलैंड (डोकलाम) क्षेत्र में लड़ाई चीन के लिए हानिकारक होगा। यह ऊंचाई पर है जबकि हम नीचे हैं यहां। हम पर हमले की स्थिति में बेहद नुकसान होगा। अगर हम लड़ने जा रहे हैं तो पूरी सीमा पर जवाबी हमले के लिए तैयार रहना चाहिए।"

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लिशन सिटी से एक यूजर ने लिखा, "आप में किसी को यह नहीं दिख रहा कि समस्या भारतीय ए-सैन (यह शब्द भारतीयों के अपमान के लिए चीन में उपयोग किया जाता है) नहीं बल्कि कोरियाई प्रायद्वीप है। अगर हम ए-सैन के खिलाफ बढ़ते हैं तो उत्तरी कोरिया भी तुरंत लड़ाई करना चाहेगा, और अमरीका, जापान और दक्षिण कोरिया भारत के साथ हो जाएगा। जब तक हम युद्ध शुरू नहीं करते, इनके पास दूसरा रास्ता नहीं होगा।"

कुछ चीनी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को लद्दाख में पत्थरबाजी की भारतीय मीडियाई रिपोर्ट्स पर हैरानी है। बीजिंग से एक यूजर ने कहा, "क्या भारतीय मीडिया अफवाहें उड़ा रहा है? क्या सशस्त्र सेना ने पत्थरों का इस्तेमाल किया होगा?"

पहले पन्ने पर लद्दाख की खबर नहीं

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भारत-चीन सीमा
इस बीच, ताइवान की चीन टाइम्स की एक रिपोर्ट में हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट और भारतीय टीवी न्यूज चैनल एनडीटीवी की वेबसाइट का हवाला दिया गया। चीन टाइम्स ने कहा कि न तो भारतीय सेना और न ही चीनी अधिकारियों ने इस खबर पर टिप्पणी की है। केवल कश्मीर की पुलिस ने ही इसके विषय में बात की है।

पहले पन्ने पर पाकिस्तान को प्रमुखता
लद्दाख की इस खबर को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म रेफरेंस न्यूज़ (चीनी भाषा में इसे कांकाकोसियाकोसि कहा जाता है) ने अपने पहले पन्ने पर नहीं रखा। हालांकि उसके पहले पन्ने पर चीन के उप प्रधानमंत्री वांग यांग की पाकिस्तान यात्रा को प्रमुखता दी गई है। इसके पहले पन्ने पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति मनमून हुसैन की वो टिप्पणी भी रखी गई है जिसमें चीनी क्षेत्र में भारतीय आक्रमण के मुद्दे पर इस्लामाबाद ने चीन का समर्थन किया है।

रेफरेंस न्यूज ने सिंगापुर की वेबसाइट लियाना शांपां का हवाला देते हुए लिखा कि जून में भारत के साथ डोकलाम विवाद शुरू होने के बाद से दक्षिण एशियाई दौरे पर जाने वाले वांग पहले चीनी अधिकारी हैं।
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