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कैंसर की बीमारी इग्नोर कर अपनी सारी संपत्ति गरीब छात्रों में कर दी दान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Updated Thu, 30 Aug 2018 12:04 PM IST
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Cancer
चीन के त्सिंगहुआ शहर में एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर झआो जिआ की बदौलत आज हजारों युवाओं ने अपना लक्ष्य हासिल किया है। बता दें कि जब उन्हें कैंसर हुआ तो उन्होंने अपनी दवा पर बेहद कम पैसे खर्च किए। बचाए पैसों को उन्होंने गरीब छात्रों पर खर्च किया। झाओ ने कहा कि उन्हें शिक्षण पसंद है। वह दो हजार विद्यार्थियों की मदद के लिए अब तक 15 मिलियन युआन यानी 16 करोड़ रुपए दान कर चुके हैं। 1955 में स्कूल विभाग के रेडियो इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्शन से ग्रेजुएट करने के बाद उन्होंने त्सिंगहुआ विश्वविद्यालय में पढ़ाना शुरू किया।
साधारण सी जिंदगी जीने वाले झाओ ने इसके बाद वर्ष 1985 में इस विश्वविद्यालय में इकनोमिक्स और मैनेजमेंट स्कूल स्थापित करने में मदद की। यकीन नहीं होगा लेकिन यह सच्चाई है कि वह 10 वर्ष तक एक ही स्वेटर पहनकर संस्थान जाते रहे। वर्ष 2001 में टेक्सास विश्वविद्यालय में अतिथि प्रोफेसर के रूप में उन्होंने कार्य किया। उन्होंने विदेश में भी तीन साल तक शिक्षण किया। जब वह चीन वापस आए तो उन्होंने अपनी जमा पूंजी 5 मिलियन युआन देश के गरीब हाई स्कूल के छात्रों की मदद में लगाना शुरू कर दिया।
2011 में झाओ को फेफड़ों का कैंसर हो गया। इसके बावजूद भी उन्होंने गरीब छात्रों का समर्थन और उन्हें दान करने सा सिलसिला जारी रखा। इलाज के लिए खुद को कम से कम महंगी दवाएं खरीदने का विकल्प चुना। 2012 में उन्होंने एक फाउंउेशन भी स्थापित किया जो गरीब बच्चों की मदद के लिए बनाया गया।
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साधारण सी जिंदगी जीने वाले झाओ ने इसके बाद वर्ष 1985 में इस विश्वविद्यालय में इकनोमिक्स और मैनेजमेंट स्कूल स्थापित करने में मदद की। यकीन नहीं होगा लेकिन यह सच्चाई है कि वह 10 वर्ष तक एक ही स्वेटर पहनकर संस्थान जाते रहे। वर्ष 2001 में टेक्सास विश्वविद्यालय में अतिथि प्रोफेसर के रूप में उन्होंने कार्य किया। उन्होंने विदेश में भी तीन साल तक शिक्षण किया। जब वह चीन वापस आए तो उन्होंने अपनी जमा पूंजी 5 मिलियन युआन देश के गरीब हाई स्कूल के छात्रों की मदद में लगाना शुरू कर दिया।
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2011 में झाओ को फेफड़ों का कैंसर हो गया। इसके बावजूद भी उन्होंने गरीब छात्रों का समर्थन और उन्हें दान करने सा सिलसिला जारी रखा। इलाज के लिए खुद को कम से कम महंगी दवाएं खरीदने का विकल्प चुना। 2012 में उन्होंने एक फाउंउेशन भी स्थापित किया जो गरीब बच्चों की मदद के लिए बनाया गया।
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