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चीन से मिली धमकी, भारत पीछे नहीं हटा तो होगा युद्ध
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
Updated Wed, 09 Aug 2017 08:18 AM IST
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चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक बार फिर से भारत को धमकी दी है। ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसिया भारत सरकार को गुमराह कर रही हैं कि चीन भारत पर हमला नहीं करेगा। ये ठीक वैसा ही है, जैसे साल 1962 में नेहरू की सरकार को गुमराह किया गया था। चीनी मीडिया ने साफ कहा कि ये भारत के लिए आखिरी चेतावनी है कि वो अपने सैनिकों को वापस बुलाए, क्योंकि चीन फिर से वो कदम उठा सकता है, जिसकी भारतीय एजेंसियों को उम्मीद नहीं है।
डोकलाम विवाद: युद्ध छेड़कर कोई रिस्क नहीं लेना चाहता है चीन
ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय मीडिया के लेख का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय एजेंसियों ने ये बात तय कर ली है कि चीन भारत पर हमले या सीमित हमले का रिस्क नहीं उठाएगा। ये बात रही है कि चीन युद्ध नहीं चाहता, पर अगर चीनी जमीन पर भारतीय सैनिक मौजूद रहे, तो मामला दूसरा हो सकता है। इस बाबत ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने वीडियो भी जारी किया है।
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ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने साल 1962 में भी सीमा पर लगातार उकसाने वाले काम किए थे। उस समय की नेहरू सरकार को भी यकीन था कि चीन भारत पर हमला नहीं करेगा। क्योंकि उस समय चीन अपने अंदरूनी मुश्किलों से निपट रहा था। अमेरिका-चीन में तनातनी थी और रूस के साथ संबंधों में भी गर्मी थी। पर अब का समय बदल चुका है, लेकिन भारत की सोच नहीं बदली। भले ही अबतक 55 साल बीच चुके हैं।
ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि कोई भी सरकार अपने मजबूत पड़ोसी देश से उलझना नहीं चाहती। खुद भारत सरकार भी मान चुकी है कि विवादित हिस्सा चीन और भूटान के बीच विवादित है। इसके अलावा ये भी साफ है कि भारतीय लोगों को पता है कि वो चीनी सेना को नहीं हरा सकते। बावजूद कि चीन उनपर हमला नहीं करेगा, ये सोच बना कर चल रहे हैं।
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डोकलाम विवाद: युद्ध छेड़कर कोई रिस्क नहीं लेना चाहता है चीन
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ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय मीडिया के लेख का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय एजेंसियों ने ये बात तय कर ली है कि चीन भारत पर हमले या सीमित हमले का रिस्क नहीं उठाएगा। ये बात रही है कि चीन युद्ध नहीं चाहता, पर अगर चीनी जमीन पर भारतीय सैनिक मौजूद रहे, तो मामला दूसरा हो सकता है। इस बाबत ग्लोबल टाइम्स के एडिटर ने वीडियो भी जारी किया है।
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ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने साल 1962 में भी सीमा पर लगातार उकसाने वाले काम किए थे। उस समय की नेहरू सरकार को भी यकीन था कि चीन भारत पर हमला नहीं करेगा। क्योंकि उस समय चीन अपने अंदरूनी मुश्किलों से निपट रहा था। अमेरिका-चीन में तनातनी थी और रूस के साथ संबंधों में भी गर्मी थी। पर अब का समय बदल चुका है, लेकिन भारत की सोच नहीं बदली। भले ही अबतक 55 साल बीच चुके हैं।
ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि कोई भी सरकार अपने मजबूत पड़ोसी देश से उलझना नहीं चाहती। खुद भारत सरकार भी मान चुकी है कि विवादित हिस्सा चीन और भूटान के बीच विवादित है। इसके अलावा ये भी साफ है कि भारतीय लोगों को पता है कि वो चीनी सेना को नहीं हरा सकते। बावजूद कि चीन उनपर हमला नहीं करेगा, ये सोच बना कर चल रहे हैं।
अमेरिका को अपने साथ मान रहा है भारत
China
ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि भारत अमेरिका को अपने साथ मानकर चल रहा है। जो चीन पर दबाव डालेगा। ये दिखाता है कि भारत अमेरिका के भरोसे बैठा है और वो चीन-भारत के बीच रणनीतिक-सामरिक नियंत्रण बनाने की होड़ को नजरअंदाज कर रहा है। भारत को लगता है कि अगर चीन आगे बढ़ा तो अमेरिका उसके पक्ष में स्टेटमेंट जारी करेगा या फिर भारतीय महासागर में अपने युद्धक पोत भेजेगा।
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक भारत अपने कानूनी और नैतिक समझ को भुलाकर बैठा है। पर चीन अपने होश में है और वो पहले कोई भी बड़ा कदम उठाना नहीं चाहता। चीन चाहता है कि भारत खुद पहल करके अपनी सेना को पीछे हटाए, और चीन को बड़ा कदम उठाने पर मजबूर न करे। पर अगर भारत को इस बात का भरोसा है कि चीन मिलिटरी एक्शन नहीं लेगा, तो उसका अनुमान इंटरनेशनल पॉलिटिक्स और मिलिटरी साइंस दोनों ही कसौटियों के आधार पर बिल्कुल गलत है। अगर भारत अपने इसी नीति पर टिका रहता है, तो चीन के लिए कोई भी कदम उठाना मुश्किल नहीं होगा।
गौरतलब है कि भारत और चीन की सेनाएं डोकलम में करीब दो माह से आमने-सामने है। इस जगह पर चीनी सैनिक सड़क बना रहे थे, जो भारत-भूटान-चीन के बीच ट्राई जंक्शन है। इसे भारतीय सैनिकों ने रोक दिया और तभी से दोनों देशों के बीच तनाव हालिया समय में अपने चरम पर पहुंच चुका है।
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक भारत अपने कानूनी और नैतिक समझ को भुलाकर बैठा है। पर चीन अपने होश में है और वो पहले कोई भी बड़ा कदम उठाना नहीं चाहता। चीन चाहता है कि भारत खुद पहल करके अपनी सेना को पीछे हटाए, और चीन को बड़ा कदम उठाने पर मजबूर न करे। पर अगर भारत को इस बात का भरोसा है कि चीन मिलिटरी एक्शन नहीं लेगा, तो उसका अनुमान इंटरनेशनल पॉलिटिक्स और मिलिटरी साइंस दोनों ही कसौटियों के आधार पर बिल्कुल गलत है। अगर भारत अपने इसी नीति पर टिका रहता है, तो चीन के लिए कोई भी कदम उठाना मुश्किल नहीं होगा।
गौरतलब है कि भारत और चीन की सेनाएं डोकलम में करीब दो माह से आमने-सामने है। इस जगह पर चीनी सैनिक सड़क बना रहे थे, जो भारत-भूटान-चीन के बीच ट्राई जंक्शन है। इसे भारतीय सैनिकों ने रोक दिया और तभी से दोनों देशों के बीच तनाव हालिया समय में अपने चरम पर पहुंच चुका है।