साउथ चाइना सी में सैन्य कार्रवाई को लेकर घिरे चीनी राष्ट्रपति
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दक्षिण चीन सागर का मामला अब चीन के लिए भारी सिरदर्द बन गया है। इलाके को लेकर सेना राष्ट्रपति पर दबाव बना रही है कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत में वे सख्ती से अपनी बात रखें, वहीं मामले को लेकर चीन और अमेरिका के बीच भी टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। बीते 12 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय अदालत का फैसला फिलीपींस के पक्ष में आया था, इस फैसले को चीन ने अमेरिका की साजिश करार दिया था। चीन के भीतर मीडिया ने भी इस मुद्दे को खूब उछाला था, जिसके चलते खूब हंगामा कटा था।
सूत्रों की मानें तो चीनी नेतृत्व इस मामले पर शांतिपूर्ण तरीके हल चाहता है, उधर बीजिंग की तरफ से भी कोई ठोस कदम उठाने का संकेत नहीं मिला है।
लेकिन चीन के भीतर कई संगठन चाहते हैं कि जिनपिंग अंतर्राष्ट्रीय अदालत में उसके फैसला का विरोध सख्ती से जताएं। चीनी सेना भी इसी रुख पर कायम है और उसने कहा कि अब वक्त आ गया है कि चीन विरोधियों को उसी तरह धूल चटाए, जैसी 1979 में डेंग जियाओपिंग के समय वियतनाम को चटाई थी।
फिलीपींस के पक्ष में अंतर्राष्ट्रीय अदालत का फैसला
हालांकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने ऊपर किसी तरह के दबाव से इनकार किया है। जिनपिंग इस मामले पर एहतियात बरत रहे हैं और फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
क्या है अंतर्राष्ट्रीय अदालत का फैसला?
अंतर्राष्ट्रीय अदालत के फैसले के मुताबिक दक्षिण चीन सागर और इसके संसाधनों पर तीन एकाधिकार का दावा करें, ऐसा कोई सबूत नहीं है। वहीं अदालत ने फिलीपींस के पक्ष में चीन को फटकार लगाई कि उसने फिलीपींस के मछली मारने के अधिकार में दखल दी है।
वहीं चीन ने अदालत के फैसले से कोई वास्ता होने से इनकार किया और उसे मानने से भी मना किया, यहां तक कि अदालती कार्रवाई में शामिल होने से भी इनकार किया।
'चीनी सेना वही करेगी जो उसे करना है'
अभी तक चीन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई करने के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन चीनी सेना से जुड़े कुछ तत्व दक्षिण चीन सागर में चीनी सेना के जरिए ठोस कार्रवाई की वकालत कर रहे हैं। मामले पर नाम न छापने की शर्त पर सूत्रों ने मीडिया को अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।
पहले सोर्स ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी दक्षिण चीन सागर में कार्रवाई के लिए कमर कस चुकी है। उसने कहा कि अब वक्त आ गया है कि चीन विरोधियों को उसी तरह धूल चटाए, जैसी 1979 में डेंग जियाओपिंग के समय वियतनाम को चटाई थी।
सूत्रों की मानें राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सेना पर अच्छी कमांड है। उन्होंने चीनी सेना आने वाली चुनौतियों से निपटने और ताकत में इजाफा करने को कहा है। दूसरे सूत्र ने बताया कि चीनी सेना वही करेगी जो उसे करना चाहिए, ऐसे में अमेरिका को जो करना है, वो करे।