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'CPEC' का नाम बदलने के प्रस्ताव पर विशेषज्ञ बोले- चीन रच रहा नया षडयंत्र

Tue, 09 May 2017 04:53 AM IST
हिमांशु मिश्र/ नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र/ नई दिल्ली Updated Tue, 09 May 2017 04:53 AM IST
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Experts speak on proposal to change the name of CPEC

वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) योजना में भारत को शामिल कराने के लिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) का नाम बदलने संबंधी प्रस्ताव को विदेश मामलों के विशेषज्ञ चीन के नए दांव के रूप में देख रहे हैं। 

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विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस प्रस्ताव के जरिए भारत का रुख भांपना चाहता है। यही कारण है कि चीन ने सीपीईसी का नाम बदलने का प्रस्ताव देने के साथ ही भारत-पाकिस्तान के सीमा विवाद में नहीं पड़ने की भी बात कही है। 
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गौरतलब है कि चीन कई बार भारत से ओबीओआर में शामिल होने की अपील करता रहा है। हालांकि भारत इसी योजना के तहत बनने वाले सीपीईसी के पाक अधिकृत क्षेत्र से गुजारने के कारण अपना लगातार विरोध दर्ज कराया है।
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पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर के मुताबिक ओबीओआर में भारत को शामिल कराने की चीन की यह पहली कोशिश नहीं है। नया यह है कि इस बार उसने सीपीईसी का नाम बदलने और भारत-पाकिस्तान सीमा विवाद में नहीं पड़ने की बात कही है। 

सीपीईसी में भारत को शामिल कर बड़ा लाभ

Experts speak on proposal to change the name of CPEC

दरअसल चीन का निगाहें सीपीईसी में भारत को शामिल कर बड़ा लाभ हासिल करने की है। उसकी योजना ओबीओआर के जरिए समुद्री व्यापार मार्ग पर अपनी स्थिति मजबूत करने की है। चूंकि सीपीईसी गिलगित-बटालिस्तान से गुजारने की योजना है जिसे भारत अपना अंग मानता है। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि भारत चीन के इस नए दांव के बावजूद ओबीओआर में दिलचस्पी दिखाएगा।

एक अन्य पूर्व विदेश सचिव शशांक के मुताबिक ओबीओआर में भारत के शामिल होने केकारण होने वाले लाभ से चीन वाकिफ है। खासतौर से अमेरिका के नए नेतृत्व केआक्रामक रुख के कारण चीन इसके माध्यम से दूसरे देशों के बंदरगाहों पर अपनी स्थिति मजबूत कर लेना चाहता है। अगर भारत इसका अंग बना तो निश्चित रूप से इससे चीन को मजबूती मिलेगी। 

जहां तक चीन के प्रस्ताव का सवाल है तो क्या चीन अफगानिस्तान-भारत आर्थिक गलियारे की इजाजत देगा। क्या वह यह मानेगा कि पीओके भारत का हिस्सा है। जाहिर तौर पर चीन की तात्कालिक कोशिश पाकिस्तान को नाराज किए बिना भारत को साधने की है। हालांकि इस मामले में उसे सफलता मिलने की संभावना न के बराबर है।

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